Saturday, 14 March 2015

गैंगस्टर महादेव महार हत्याकांड फैसला (क्र. 1 से 10)

1- आरोपीगण बच्चा उर्फ जायद, प्रभाष सिंह, विनोद बिहारी, सत्येन माधवन, मंगल सिंह, तपन सरकार, पिताम्बर साहू, रंजीत सिंह, शैलेन्द्र सिंह ठाकुर, बिज्जू उर्फ महेश, छोटू उर्फ कृष्णा राजपूत, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी, जयदीप सिंह, गुल्लू उर्फ अरविंद श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला, राजू खंजर, मुजीबुद्दीन पर भा0दं0सं0 की धारा 120 बी, 148, 302/149, 307/149 एवं 3 (2) (5) अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 एवं आरोपी सत्येन माधवन, मंगलसिंह, तपन सरकार, रंजीत सिंह, शैलेन्द्र सिंह ठाकुर, प्रभाष सिंह एवं बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी पर आयुध अधिनियम की धारा 25-27 के तहत यह आरोप है कि उन्होंने दिनांक 11/2/2005 को उक्तानुसार पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का अवैध जमाव इस उद्देश्य से गठित किया कि मृतक महादेव महार की हत्या करें, एवं उक्त उद्देश्य को अग्रसर करते हुये उक्त सभी आरोपियों ने घातक आयुध माउजर, कट्टा, पिस्टल, तलवार, नारियल काटने का दांव और डण्डे से प्रातः 6.35 बजे उसकी हत्या कारित की। शेष आरोपीगण पर भा0दं0सं0 की धारा 212, 216 के तहत यह आरोप है कि उन्होंने महादेव की हत्या के उपरान्त उक्त आरोपियों को बचाने के लिये उनकी सहायता की।
2- इस प्रकरण में विवादित नही है कि प्रकरण के लम्बन के दौरान आरोपी गोविन्द विश्वकर्मा की मृत्यु हो गयी, एवं शेष आरोपी शहजाद, पी0 प्रीतिश एवं गया उड़िया उर्फ जयचंद प्रधान अभी भी फरार है। इस प्रकरण में कुल 82 साक्षियों का साक्ष्य कुल 400 पृष्ठों में प्रस्तुत किया गया है, कुल 256 दस्तावेज में प्रदर्श अंकित हुआ है, इसी प्रकार आरोपीगण से दं0प्र0सं0 की धारा 313 के तहत 747 प्रश्न पुछे गये हैं। जबकि उभयपक्ष की ओर से कुल 144 पेज का लिखित तर्क प्रस्तुत किये गये हैं।
3- संक्षेप में अभियोजन का मामला इस प्रकार है कि- 
(i) घटना दिनांक 11/2/2005 को प्रातः मृतक महादेव महार सुभाष चौक स्थित अपने निवास से सुभाष चौक आया था और अपने साथियों से बातचीत करते हुये खड़ा था। उस समय अ0सा07 चंदन साव, अ0सा08 प्रशांत उर्फ गुड्डा व अ0सा09 गिरवर साहू वही पर खड़े थे एवं मृत साक्षी संतोष के पिता अ0सा01 तारकेश्वर सिंह से बातचीत कर रहे थे। उसी समय मिनीडोर क्रमांक सी.जी.07 टी-0736 एवं दो बिना नम्बर की बाइक में आरोपीगण आये एवं उन्होंने मृतक महादेव को गाली देते हुये मारने के लिये दौड़े। तब मृत आरोपी गोविन्द विश्वकर्मा ने आरोपी महादेव के सिर में खुखरी से मारा, जिससे महादेव गिर गया। उसी समय आरोपी तपन, मंगल, प्रभाष, सत्येन माधवन ने अपने-अपने कट्टे व पिस्टल से आरोपी के उपर फायर किये, जिससे मृतक महादेव के सिर में चोट आयी। उस समय आरोपीगण ने कड़े भोथरे और धारदार हथियार से मृतक महादेव के साथ मारपीट की। उक्त मारपीट से महादेव के शरीर में कुल 21 चोटें आयी। उसके बाद आरोपीगण अपने-अपने वाहनों से भाग गये, जो चार माह से दो साल तक फरार रहे। विवेचना में यह पाया गया कि आरोपीगण एवं मृतक एवं उसके साथियों के मध्य आपराधिक गतिविधि एवं शराब के व्यावसायिक ठेके को लेकर आपसी प्रतिस्पर्धा थी, जिससे परिणति मृतक महादेव की हत्या से हुई।
(ii) उक्त घटना के तुरन्त बाद अ0सा08 प्रशांत उर्फ गुड्डा उर्फ संतोष शर्मा नामक व्यक्ति ने घटना दिनांक 11/2/2005 की सूचना टेलीफोन से थाना सुपेला में यह कहकर दी कि महादेव महार की हत्या आरोपी तपन एवं उसके साथियों ने कर दी गयी है, जिसे थाना सुपेला के प्रधान आरक्षक अ0सा060 सुभाष सिंह मण्डावी ने रोजनामचा सान्हा क्रमांक 874 में तत्काल दर्ज किया, जिसकी मूल सान्हा प्रदर्श पी 128 है, जिसकी छाया प्रति प्रदर्श पी 128 सी है। सान्हा दर्ज करते ही थाना सुपेला में पदस्थ नाईट आफिसर तात्कालीन उपनिरीक्षक अ0सा069 अनिता सागर घटनास्थल सुभाष चौक गयी। अ0सा069 अनिता सागर ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर सूचनाकर्ता प्रशान्त उर्फ गुड्डा उर्फ संतोष शर्मा की सूचना के आधार पर मर्ग सूचना प्रदर्श पी 138 दर्ज की। उन्होंने प्रार्थी प्रशांत उर्फ गुड्डा उर्फ संतोष शर्मा के बताये अनुसार घटनास्थल पर ही प्रातः 7.05 बजे आरोपी तपन सरकार, मंगल सिंह, सत्येन माधवन, जयदीप, प्रभाषसिंह, गोविन्द विश्वकर्मा, बच्चा, अनिल शुक्ला, राजू खंजर, गुल्लू उर्फ अरविंद श्रीवास्तव, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी एवं अन्य लोग एवं विनोद बिहारी के विरूद्ध शून्य पर नालिशी दर्ज की है, जो प्रदर्श पी 15 है। अ0सा069 अनिता सागर को सूचनाकर्ता प्रशांत उर्फ गुड्डा उर्फ संतोष शर्मा ने शून्य की नालिशी में यह भी बताया कि घटनास्थल पर अभियोजन साक्षी गिरवर, चंदन, लिंगा राजू आदि भी उपस्थित थे। शून्य की नालिशी को आरक्षक परमजीत सिंह क्रमांक 498 ने देहाती नालिशी थाना सुपेला में लाकर प्रस्तुत किया जिसे थाना सुपेला के सहायक उपनिरीक्षक अ0सा066 जे0पी0चन्द्राकर ने अपराध क्रमांक 141/05 में प्रथम सूचना पत्र दर्ज किया जो प्रदर्श पी 76 है। उन्होंने आरक्षक परमजीत सिंह द्वारा प्रस्तुत करने पर शून्य पर दर्ज मर्ग इन्टीमेशन के आधार पर असल मर्ग क्रमांक 09/2005 दर्ज किया जो प्रदर्श पी 139 है। इसी दौरान घटनास्थल पर थाना प्रभारी सुपेला अ0सा077 राकेश भट्ठ आये।
(iii) अ0सा077 राकेश भट्ठ ने गवाहों को प्रदर्श पी 1 की सूचना देकर मृतक महादेव महार के शव का पंचनामा किया। पंचनामा की कार्यवाही प्रदर्श पी 2 है। उन्होंने पोस्टमार्टम फार्म प्रदर्श पी 35 भरकर मृतक महादेव महार के शव को पोस्टमार्टम के लिये जिला अस्पताल दुर्ग प्रेषित करवाया, जिसे प्रधान आरक्षक अ0सा015 होलसिंह भुवाल जिला अस्पताल लेकर गये। तब महादेव महार के शव का परीक्षण जिला चिकित्सालय दुर्ग के मेडिकल आफिसर अ0सा010 डॉ0 जे0पी0मेश्राम ने किया। अ0सा010 डॉ0 जे0पी0मेश्राम ने मृतक महादेव महार के शरीर में कुल 21 घाव पाये। उन्होंने मृतक के शरीर में पाये गये कपड़ों का भी परीक्षण किया और उसके पश्चात अ0सा010 जे0पी0मेश्राम ने मृतक की मृत्यु शॉक और हेमरेज के कारण होना बताया और यह भी पाया कि सभी चोटें एन्टीमार्टम थी, जिसके संबंध में उनकी रिपोर्ट प्रदर्श पी 34 है। उन्होंने अपने सहयोगी चिकित्सक डॉ0 एम.सी. महनोत के साथ मृतक के शव का परीक्षण किया था। अ0सा010 जे0पी0मेश्राम ने मृतक के टी.शर्ट में एक बुलेट भी पायी। उन्होंने मृतक के कपड़ों का परीक्षण किया। उन्होंने मृतक के कपड़ों को सील पैक करके रासायनिक परीक्षण हेतु अ0सा015 आरक्षक होलसिंह के सुपुर्द किया। उन्होंने मृतक के विसरा को संग्रहित कर उसे भी आरक्षक होलसिंह के सुपुर्द किया।
(iv) अ0सा015 होल सिंह ने अ0सा010 जे0पी0मेश्राम द्वारा दिये गये पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृतक के कपड़े व मृतक के विसरा को थाने में लाकर प्रस्तुत किया, जिसे तात्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक अ0सा076 आर0के0राय ने गवाह आनंद पनिका एवं शिव के समक्ष जप्त किया, जिसकी जप्ती पत्रक प्रदर्श पी 9 है। अ0सा077 राकेश भट्ठ ने घटनास्थल पर पहुंचकर दिनांक 11/2/2005 को ही संतोष शर्मा उर्फ प्रशांत उर्फ गुड्डा की निशानदेही पर घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया, जो प्रदर्श पी 225 है। उन्होंने दिनांक 11/2/2005 को ही खुन आलुदा मिट्टी और सादी मिट्टी प्रदर्श पी 5 के अनुसार जप्त की। तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक अ0सा076 आर.के.राय ने मृतक के भाई सदवन महार के प्रस्तुत करने पर मृतक का जाति प्रमाण पत्र जप्त किया।
(v) प्रकरण की शेष विवेचना अ0सा076 आर.के.राय एवं अ0सा077 राकेश भट्ठ द्वारा की गयी है। अ0सा076 आर.के.राय ने प्रदर्श पी 58 के जप्ती पत्रक के अनुसार प्रेमचंद श्रीवास्तव नामक व्यक्ति से एक मोबाइल फोन की जप्ती किये। उन्होंने आरोपी नरेन्द्र कुमार दुबे, आरोपी बिहारी उर्फ विनोद बिहारी सिंह, आरोपी शैलेन्द्र ठाकुर, राजू खंजर, आरोपी मजीबुद्दीन, आरोपी प्रभाष कुमार सिंह, आरोपी तपन सरकार, आरोपी पंकज सिंह, आरोपी एस.सैथिल्य, आरोपी चुम्मन लाल देशमुख, आरोपी सुशील कुमार राठी, आरोपी विद्युत चौधरी, आरोपी मंगल सिंह, आरोपी बिज्जू उर्फ महेश, आरोपी बच्चा उर्फ अब्दुल जायद, आरोपी संजय सिंह राजपूत का बयान मेमोरेण्डम धारा 27 साक्ष्य अधिनियम लेखबद्ध किया और उक्त बयान मेमोरेण्डम के आधार पर उक्त आरोपीगण द्वारा बताये गये स्थान से मोबाइल फोन, सिम, क्वालिस गाड़ी क्रमांक सी.जी.07/2393, चाकू, कट्टा, कारतूस, खोखा, 303 बोर का कट्टा, 303 बोर का नौ कारतुस, बटनदार चाकू, नारियल कांटने का दांव, मोबाइल फोन, मोबाइल फोन की सिम, हीरोहोण्डा मोटर सायकल, इंडिका कार, हीरोहोण्डा पैशन, लोहे का कट्टा, 315 बोर के कारतूस का खाली खोखा आदि की जप्ती किये। उन्होंने उक्त आरोपीगण को गिरफ्तार किये। अ0सा076 आर0के0राय ने दिनांक 17/8/2005 को केन्द्रीय न्यायालयीक विज्ञान प्रयोगशाला, चण्डीगढ़ प्रदर्श पी 134 ए का प्रतिवेदन सहित खाली कारतुस, मृतक महादेव महार की शरीर से निकली बुलेट, महादेव की त्वचा, तीन देशी कट्टा 315 बोर के, एक खाली खोखा परीक्षण के लिये प्रेषित किया।
(vi) अ0सा076 आर.के.राय ने दिनांक 27/9/2005 को प्रदर्श पी 135 ए/सी के जरिये 9 एमएम पिस्टल व एक 9 एमएम कारतूस का खोखा, दो 315 बोर का कट्टा और 315 बोर के नौ नग जिंदा कारतुस, 315 बोर का कारतुस का खोखा परीक्षण हेतु केन्द्रीय न्यायालयीक विज्ञान प्रयोगशाला, चण्डीगढ़ प्रेषित किया। अ0सा076 आर. के.राय ने जिला दण्डाधिकारी, दुर्ग को प्रदर्श पी 96 का पत्र अभिलिखित कर आरोपी तपन सरकार, प्रभाष सिंह और सत्येन माधवन को आयुध अधिनियम के तहत अभियोजित करने की स्वीकृति मांगी। यह पत्र प्रदर्श पी 96 है। इसी प्रकार उन्होंने जिला दण्डाधिकारी दुर्ग से आरोपी शैलेन्द्र ठाकुर और मंगल सिंह के विरूद्ध आयुध अधिनियम के तहत अभियोजन हेतु प्रदर्श पी 119 का पत्र लिखकर अनुमति मांगी, जो उन्हें प्रदर्श पी 120 के माध्यम से प्राप्त हुई। अ0सा076 आर.के.राय ने दिनांक 10/4/2005 को कॉमर्शियल मैनेजर रिलायंस को पत्र लिखकर ग्यारह मोबाइल नम्बरों के लिये जमा कराये गये आवेदन पत्र एवं दस्तावेजों की प्रति मांगी, जिसके संबंध में उनका पत्र प्रदर्श पी 161 है। तब टेलीकॉम कम्पनी से आरोपियों से जप्त मोबाइल की कॉल डिटेल्स की जो जानकारी प्राप्त हुई वह 45 पन्नों में हैं, जो प्रदर्श पी 162 से 206, प्रदर्श पी 129 से प्रदर्श पी 132 (ए से आई) प्रदर्श पी 207 से 211 है। उन्होंने आइडिया कम्पनी से आरोपी के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स की जानकारी चाही, जिसके संबंध में उनका पत्र प्रदर्श पी 78 है। तब आइडिया कम्पनी से जो जानकारी प्राप्त हुई वह प्रदर्श पी 79 से प्रदर्श पी 88 है। अ0सा076 आर.के.राय ने प्रकरण में जप्तशुदा सम्पत्ति को परीक्षण हेतु राज्य न्यायालयीक विज्ञान प्रयोगशाला प्रदर्श पी 212 का पत्र अभिलिखित कर प्रेषित किया। उन्होंने केन्द्रीय न्यायालयीक विज्ञान प्रयोगशाला भी सामग्री परीक्षण हेतु भेजी। एफएसएल रायपुर से जो परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त हुई वह प्रदर्श पी 218 है जो तीन पन्नों मे हैं। कलकत्ता स्थित प्रयोगशाला से सिरोलॉजिस्ट की रिपोर्ट प्राप्त हुई जो प्रदर्श पी 220 है। एफएसएल रायपुर से प्राप्त परीक्षण रिपोर्ट प्रदर्श पी 221 है।
(vii) अ0सा076 आर.के.राय ने विवेचना के दौरान साक्षी प्रशांत उर्फ गुड्डू उर्फ संतोष, साक्षी तारकेश्वर सिंह एवं साक्षी धनजी उर्फ संतोष, साक्षी गिरवर साहू, साक्षी लिंगा राजू, साक्षी पी. राजकुमार, साक्षी राजेन्द्र सिंह भदोरिया, साक्षी हनुमान सिंह, साक्षी केशव चौधरी, साक्षी मुरली, साक्षी अतुल बोरकर एवं साक्षी मनोज थॉमस का पूरक बयान लेखबद्ध किया।
(viii) अ0सा077 राकेश भट्ठ ने दिनांक 25/5/2005 को न्यायिक मजिस्टेंट प्रथम श्रेणी, बलौदा बाजार को प्रदर्श पी 226 का आवेदन प्रस्तुत कर जेल में बंद आरोपी पिताम्बर तथा छोटू उर्फ कृष्णा की पहचान की कार्यवाही हेतु अनुमति प्राप्त की। तब नायब तहसीलदार अ0सा057 शिवकुमार तिवारी ने आरोपी पिताम्बर एवं आरोपी छोटू उर्फ कृष्णा की पहचान की कार्यवाही निष्पादित किया, जिससे संबंधित दस्तावेज प्रदर्श पी 16, प्रदर्श पी 28 व प्रदर्श पी 123 है। अ0सा052 यामिनी पाण्डे गुप्ता ने आरोपी शैलेन्द्र ठाकुर की पहचान की कार्यवाही प्रदर्श पी 17 निष्पादित करवायी। अ0सा077 राकेश भट्ठ ने आरोपी बिहारी उर्फ विनोद बिहारी से एक सफेद लाइनिंग की शर्ट और एक बटन वाला चाकू जप्ती पत्रक प्रदर्श पी 41 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी सत्येन्द्र माधवन का बयान मेमोरेण्डम प्रदर्श पी 71 गवाहों के समक्ष लेखबद्ध किया। उन्होंने आरोपी सत्येन माधवन के बयान मेमोरेण्डम के आधार पर एक देशी कटटा 315 बोर का जिसके अंदर बैरल में एक कारतूस खोखा फंसा हुआ, खोखे के पेन्दे में 8 एमएमकेएफ लिखा हुआ, जमीन के गढढे से निकालकर पेश करने पर जप्ती पत्रक प्रदर्श पी 72 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी सत्येन्द्र माधवन से एक हीरोहोण्डा प्लेजर एवं सेम्संग कंपनी का मोबाइल सेट व सिम व चार्जर की जप्ती प्रदर्श पी 73 के अनुसार किया। उन्होंने आरोपी छोटू उर्फ कृष्णा, आरोपी पिताम्बर साहू, आरोपी रंजीत सिंह, आरोपी मंगल सिंह, आरोपी तोरई पांडियन का बयान मेमोरेण्डम क्रमशः प्रदर्श पी 100, प्रदर्श पी 101, प्रदर्श पी 102 एवं प्रदर्श पी 11 लेखबद्ध किया। उन्होंने उक्त आरोपियों के बयान मेमोरेण्डम के आधार पर तीन लोहे का दांव, एक लोहे का नाईन एमएम का पिस्टल, नौ एमएम कारतूस का खोखा जिसके पीतल के पेन्दे में केएफ 95 एमएमटूएल लिखा है, को जप्त किया। उन्होने आरोपी सत्येन माधवन, तपन सरकार, विनोद बिहारी, गोविन्द विश्वकर्मा, मंगल सिंह, अरविंद गुल्लू श्रीवास्तव, राजू खंजर, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी, जयदीप सिंह, प्रभाषसिंह, जे.जे.राव का आपराधिक रिकार्ड प्रदर्श पी 244 से प्रदर्श पी 254 संकलित किया।
(ix) थाना सुपेला के तात्कालीन उपनिरीक्षक अ0सा075 जे0एल0साहू ने दिनांक 11/8/2005 को व्ही.लक्ष्मणराव से एक टीवीएस सुजुकी क्रमांक सीजी.07जेड.आर./0193 जप्ती पत्र प्रदर्श पी 146 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी राजू खंजर के बयान मेमोरेण्डम प्रदर्श पी 44 के आधार पर उनके द्वारा निकाल कर पेश करने पर एक नीले रंग की बनियान, एक लोहे का दांव जप्ती पत्र प्रदर्श पी 45 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी मुजीबुद्दीन के बयान मेमोरेण्डम प्रदर्श पी 48 में उल्लेखित स्थान से उनके द्वारा निकालकर पेश करने पर एक बांस की लाठी और दो सिम जप्ती पत्र प्रदर्श पी 49 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी चुम्मन के पेश करने पर जप्ती पत्र प्रदर्श पी 90 के अनुसार एक पल्सर मोटर सायकल बिना नम्बर की जप्ती पत्रक प्रदर्श पी 90 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी चुम्मन से ही एक नोकिया कम्पनी का मोबाइल सेट तथा युटीआई बैंक में जमा रकम की तीन परची तथा आईसीआईसीआई बैंक मे जमा करने की परची को जप्ती पत्रक प्रदर्श पी 91 के अनुसार जप्त किया। उन्होंने आरोपी छोटू उर्फ कृष्णा से एक नारियल कांटने का दांव, आरोपी पिताम्बर से एक नारियल कांटने का लोहे का दांव, आरोपी रंजीत सिंह से यामाहा मोटर सायकल, आरोपी सुशील कुमार से इण्डिका कार क्र0 सी.जी.04 बी.0216, एक नोकिया मोबाइल फोन, आरोपी बच्चा उर्फ अब्दुल जायद से बटनदार लोहे का चाकू, एक सैमसंग रिलायंस कम्पनी का सफेद रंग का मोबाइल फोन, आरोपी संजय सिंह से सिल्वर रंग का मोबाइल फोन, आरोपी तोरई पांडियन से एक टोयेटा क्वालिस क्रमांक सीजी07 जेड0डी.9900 एवं उसके दस्तावेज जप्त किये।
(x) थाना सुपेला के तात्कालीन सहायक उपनिरीक्षक अ0सा074 महादेव तिवारी ने आरोपी नरेन्द्र दुबे से एक नोकिया मोबाइल फोन मॉडल नं0 3310 एवं आरोपी एस. सैथिल्य से एक स्कार्पियों गाड़ी क्रमांक सी.जी.12 डी/0189 को जप्त किया। दुर्ग क्राइम ब्रांच के अ0सा071 राजीव शर्मा ने दिनांक 24/7/2005 को देवरी थाने में आरोपी तपन सरकार के आधिपत्य से एक टोयटा क्वालिस वाहन क्र0पी.बी.46 सी/4318 एवं उसके दस्तावेज जप्त किये। थाना सुपेला के तात्कालीन प्रधान आरक्षक अ0सा068 हृदयलाल बंजारे ने साक्षी रामदास का बयान प्रदर्श पी 119 लेखबद्ध किया। थाना सुपेला के तात्कालीन उपनिरीक्षक अ0सा067 प्रकाश सोनी ने दिनाक 10/5/2005 को आरोपी विद्युत चौधरी से एक लोहे की खुखरी एवं नोकिया कम्पनी के दो मोबाइल फोन जप्ती पत्र प्रदर्श पी 139 के अनुसार जप्त किया। थाना सुपेला के तात्कालीन सहायक उपनिरीक्षक अ0सा066 जे0पी. चन्द्राकर ने प्रदर्श पी 76 का प्रथम सूचना पत्र एवं प्रदर्श पी 139 का मर्ग इन्टीमेशन लेखबद्ध किया।
(xi) थाना सुपेला के तात्कालीन आरक्षक अ0सा062 नेमन साहू ने अपराध क्रमांक 141/05 के प्रथम सूचना पत्र की कार्बन प्रति को दिनांक 12/2/2005 को न्यायालय में लाकर प्रस्तुत किया, जिसकी पावती प्रदर्श पी 131 है।
(xii ) इस प्रकरण में साक्षी संतोष उर्फ गुडडा उर्फ प्रशांत शर्मा, साक्षी चंदन साव, गिरवर साहू, साक्षी लिंगा एवं साक्षी संतोष उर्फ धनजी ने तात्कालीन न्यायिक मजिस्टेंट प्रथम श्रेणी, दुर्ग अ0सा059 रामजीवन देवांगन के समक्ष उपस्थित होकर दं0प्र0सं0 की धारा 164 के तहत स्वयं का कथन लेखबद्ध किये जाने का निवेदन किया। तब अ0सा059 श्री रामजीवन देवांगन ने उक्त साक्षियों का दं0प्र0सं0 की धारा 164 के तहत क्रमशः प्रदर्श पी 18, प्रदर्श पी 22, प्रदर्श पी 23, प्रदर्श पी 26, प्रदर्श पी 126 का कथन लेखबद्ध किया है।
(xiii) आरोपियों से जप्त फायर्ड रायफल के खाली खोखा, पिस्टल के कारतूस, रायफल का बुलेट, मृतक की चमड़ी के टूकड़े, देशी कट्टा आदि का रासायनिक परीक्षण केन्द्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला, चण्डीगढ़ के कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी अ0सा063 डॉ0 पी0 सिद्दम्बरी ने किया, जिन्होंने परीक्षण उपरान्त प्रदर्श पी 134, प्रदर्श पी 135 का परीक्षण प्रतिवेदन प्रेषित किया।
(xiv) उक्त अनुसार विवेचना कर नगर पुलिस अधीक्षक अ0सा076 आर0के0राय ने सर्वप्रथम प्रथम आठ आरोपी के विरूद्ध अभियोग पत्र क्रमांक 269/2005 दिनांक 9/5/2005 को प्रस्तुत किया, जो इस न्यायालय में विशेष सत्र प्रकरण 25/2005 के रूप में पंजीबद्ध किया गया। उसके पश्चात आरोपी क्रमांक 9 से 19 के विरूद्ध अभियोग पत्र दिनांक 2/8/2005 को प्रस्तुत किया गया। उस समय अभियोग पत्र में 17 आरोपियों को फरार दर्शाया गया। उसके पश्चात 6 आरोपियों ने विशेष न्यायालय के समक्ष आत्मसमपर्ण किया गया जिन्हें विधिवत गिरफ्तारी की अनुमति लेकर आरोपी के रूप में संयोजित किया गया। अन्य चार आरोपी मंगलसिंह, महेश उर्फ बिज्जू यदू, शैलेन्द्र ठाकुर, बच्चा उर्फ अब्दुल जायद को गिरफ्तार कर आरोपी के रूप में संयोजित किया गया। इस प्रकरण के विवेचकगणों ने आरोपीगण के आपराधिक षडयंत्र को प्रमाणित करने के लिये आरोपीगण के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स प्रदर्श पी 162 से प्रदर्श पी 206 एवं प्रदर्श पी 129 से प्रदर्श पी 132 ए से आई संकलित किया। अभियोजन के अनुसार आरोपीगण घटना दिनांक 11/2/2005 के एक दिन पहले अर्थात् 10/2/2005 से 11/2/2005 की सुबह तक आपस में मोबाइल टेलीफोन से बात कर मृतक की हत्या का आपराधिक षडयंत्र किये। विवेचना के दौरान ही आरोपी गोविन्द विश्वकर्मा पुलिस एनकाउण्टर में मारा गया। अतः स्पष्ट है कि वर्तमान में शहजाद, पी. प्रीतिश एवं गया उड़िया उर्फ जयचंद प्रधान अभी भी फरार है।
(xv) अभियोग पत्र प्रस्तुत किये जाने के उपरान्त न्यायिक मजिस्टेंट प्रथम श्रेणी, दुर्ग ने प्रकरण को इस न्यायालय में उपार्पित किया, जो विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 25/2005 के रूप में पंजीबद्ध हुआ। बाद में शेष आरोपीगण के विरूद्ध प्रस्तुत अभियोग पत्र को पूर्व पीठासीन अधिकारी द्वारा विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 47/2005 के रूप में पंजीबद्ध किया। चुंकि दोनों विशेष सत्र प्रकरण एक ही घटना से संबंधित थे, इसलिये पूर्व पीठासीन अधिकारी के दं0प्र0सं0 की धारा 220 के आदेश के अनुसार दोनो विशेष प्रकरणों को एक प्रकरण के रूप में समाहित किया गया, जो विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 47/05 है जिसमें समस्त कार्यवाही की गयी है।
4-  अभियोग पत्र प्रस्तुति के उपरान्त आरोपी बच्चा उर्फ जायद, प्रभाष सिंह, विनोद बिहारी, सत्येन माधवन, मंगल सिंह, तपन सरकार, पिताम्बर साहू, रंजीत सिंह, शैलेन्द्र सिंह ठाकुर, बिज्जु उर्फ महेश, छोटू उर्फ कृष्णा राजपूत, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी, जयदीप सिंह, गुल्लू उर्फ अरविंद श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला, राजू खंजर, मुजीबुद्दीन को भा0दं0सं0 की धारा 120 बी, 148, 302/149, 307/149 एवं अनुसूचित जाति जनजाति (अत्याचार निवारण अधि0) 1989 की धारा 3 (2)(5) व आरोपी प्रभाष सिंह, सत्येन माधवन, मंगल सिंह, तपन सरकार, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी, रंजीत सिंह एवं शैलेन्द्र सिंह ठाकुर को 25-27 आर्म्स एक्ट एवं शेष आरोपीगण को भा0दं0सं0 की धारा 212, 216 से दण्डनीय आरोप विरचित कर सुनाये व समझाया गया, तब आरोपीगण ने अपराध अस्वीकार करते हुये निर्दोष होने का अभिवचन किया है।
5- आरोपीगण को आरोप अधिरोपित करने के उपरान्त अभियोजन द्वारा 77 साक्षियों का साक्ष्य प्रस्तुत किया गया एवं कुल 254 दस्तावेजों में प्रदर्श अंकित किया गया। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्षी अ0सा01 तारकेश्वर सिंग, अ0सा02 केशवप्रसाद चौबे, अ0सा03 प्रशांत कुमार, अ0सा04 शिव साहू, अ0सा05 लिंगाराजू, अ0सा06 मुरली, अ0सा07 चंदन साव, अ0सा08 प्रशांत शर्मा उर्फ गुड्डा उर्फ संतोष शर्मा, अ0सा09 गिरवर साहू, अ0सा010 डॉ0 जे0पी0मेश्राम, अ0सा011 अशोक कुमार, अ0सा012 मोहन निषाद, अ0सा013 सत्यनारायण कौशिक, अ0सा014 मनोज साहू, अ0सा015 होलसिंह भुवाल, अ0सा016 प्रदीप ताम्रकार, अ0सा017 गणेश कुमार देवदास, अ0सा018 राजेश कुमार, अ0सा09 आनंद दास, अ0सा020 पी0राजकुमार, अ0सा021 आनंद साहू, अ0सा022 नूर मोहम्मद, अ0सा023 राजेन्द्र सिंह, अ0सा024 परमजीत सिंह, अ0सा025 दयाशंकर पाण्डेय, अ0सा026 दीपक, अ0सा027 श्यामकुमार साहू, अ0सा028 लवकुमार कौशिक, अ0सा029 छन्नूलाल निर्मलकर, अ0सा030 राजकुमार, अ0सा031 अवतार सिंह, अ0सा032 नरेश वर्मा, अ0सा033 मंगलदास, अ0सा034 तारकेश्वर, अ0सा035 सदवन महार, अ0सा036 गोपी, अ0सा037 अतुल बोरकर, अ0सा038 विद्यापति यादव, अ0सा039 प्रेम, अ0सा040 मनोज थामस, अ0सा041 ईश्वरलाल गेन्डे, अ0सा042 गंगाराम यादव, अ0सा043 अजयसिंह भदौरिया, अ0सा044 डॉ0 राजेश गुप्ता, अ0सा045 धीरज शर्मा, अ0सा046 गुरजीत सिंह, अ0सा047 विमलेश कुमार, अ0सा048 ए0के0शुक्ला, अ0सा049 मो0 फारूख, अ0सा050 शेख हफीज, अ0सा051 मनीष कुमार, अ0सा052 श्रीमती यामिनी पाण्डे गुप्ता, अ0सा053 रामदास, अ0सा054 अरूण कुमार निर्मलकर, अ0सा055 प्रीतम निर्मलकर, अ0सा056 अशोक कुमार निर्मलकर, अ0सा057 शिवकुमार तिवारी, अ0सा058 भार्गव शर्मा, अ0सा059 श्री रामजीवन देवांगन, अ0सा060 सुभाष सिंह मण्डावी, अ0सा061 अनिल वर्मा, अ0सा062 नेमन साहू, अ0सा063 डॉ0 पी0 सिद्दम्बरी, अ0सा064 दलबीर सिंह, अ0सा065 ददनसिंह (प्रधान आरक्षक), अ0सा066 जे0पी0चन्द्राकर (सेवानिवृत्त सहायक उपनिरीक्षक), 20 अ0सा067 प्रकाश सोनी (निरीक्षक), अ0सा068 हृदयलाल बंजारे (सहायक उपनिरीक्षक), अ0सा069 अनिता सागर (निरीक्षक), अ0सा070 हनुमान सिंह यादव, अ0सा071 राजीव शर्मा (निरीक्षक), अ0सा072 शिवकुमार गोड़, अ0सा073 ऐनकसिंह ध्रुव, अ0सा074 महादेव तिवारी (सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक), अ0सा075 जे0एल0साहू (उपनिरीक्षक), अ0सा076 आर0के0राय (रिटायर अति0 पुलिस अधीक्षक), एवं अ0सा077 राकेश भट्ठ (नगर पुलिस अधीक्षक) है।
6- दं0प्र0सं0 की धारा 313 के तहत आरोपीगण का कथन लिया गया। तब उन्होंने स्वयं को निर्दोष होने एवं झूठा फंसाने का कथन किया है। आरोपी बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी ने यह अभिवाक लिया कि घाटना दिनांक 11/2/2005 को वह विवाह समारोह में शामिल होने बरेली (उत्तरप्रदेश) गया था। इस अभिवाक के समर्थन में आरोपी विद्युत चौधरी ने प्रतिरक्षा साक्षी संजीव बंसल, अर्चना चौधरी का साक्ष्य प्रस्तुत किया। जबकि आरोपी अनिल शुक्ला और रंजीत सिंह की ओर से प्रतिरक्षा साक्ष्य के रूप में कतिपय दस्तावेज प्रस्तुत किये गये हैं, एवं आरोपी विनोद सिंह उर्फ विनोद बिहारी ने घटना के समय जबलपुर शहर में अपने साले की दशगात्र के कार्यक्रम में उपस्थित होने के तथ्य को प्रमाणित करने हेतु प्रतिरक्षा साक्षी के रूप में अपने ससुर धूपनारायण सिंह का साक्ष्य प्रस्तुत किया है। आरोपी तपन सरकार एवं सत्येन माधवन ने प्रतिरक्षा साक्षी क्रमांक 1 जितेन्द्र वर्मा का साक्ष्य प्रस्तुत किया है।
7- उक्त स्थिति में इस न्यायालय के समक्ष प्रमुख रूप से अवधारणीय प्रश्न यह है कि क्या अभियोजन युक्तियुक्त शंका से परे यह प्रमाणित करने में सफल हुआ है कि:-
1- क्या महादेव महार की मृत्यु दिनांक 11/02/2005 मानवघाती या हत्यात्मक प्रकृति की थी ?
2- क्या आरोपी बच्चा उर्फ जायद, प्रभाष सिंह, विनोद बिहारी, सत्येन माधवन, मंगल सिंह, तपन सरकार, पिताम्बर साहू, रंजीत सिंह, शैलेन्द्र सिंह ठाकुर, बिज्जू उर्फ महेश, छोटू उर्फ कृष्णा राजपूत, बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी, जयदीप सिंह, गुल्लू उर्फ अरविंद श्रीवास्तव, अनिल शुक्ला, राजू खंजर, मुजीबुद्दीन ने -
2(1)- दिनांक 11/2/2005 को प्रातः 5 बजे या उसके पूर्व मृतक महादेव महार की हत्या करने के लिये आपस में सहमत होकर योजना तैयार कर आपराधिक षडयंत्र किये?
2(2)- दिनांक 11/2/2005 को 6.20 बजे या उसके लगभग स्थान सुभाष चौक सुपेला में महादेव महार की हत्या करने के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करते हुये पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का अवैध जमाव गठित किये और क्या उक्त अवैध जमाव का सदस्य होते हुये उसके सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने के लिये घातक आयुध कट्टा, पिस्तौल, गंडासा, चाकू, लाठी जिससे मृत्यु कारित किया जाना संभाव्य है, से सुसज्जित होकर बलवा का अपराध कारित किये ?
2(3)- उक्त दिनांक समय व स्थान में मृतक महादेव महार की साशय या यह जानते हुये कि घातक आयुध कट्टा, पिस्तौल, गंडासा, दांव, चाकू, लाठी आदि से उसके साथ मारपीट किये जाने से उसकी मृत्यु हो सकती है, उसे मारपीट कर सिर में गोली चलाकर, उसकी मृत्यु कारित कर उसकी हत्या का अपराध कारित किये ?
विकल्प में उक्त दिनांक समय व स्थान मे विधि विरूद्ध जमाव का सदस्य रहते हुये, जमाव के सामान्य उद्देश्य मृतक महादेव महार की हत्या करने को अग्रसर करते हुये साशय व यह जानते हुये कि घातक आयुध कट्टा, पिस्तौल, गंडासा, दांव, चाकू, लाठी आदि से उसके साथ मारपीट किये जाने से उसकी मृत्यु हो सकती है, उसे मारपीट कर सिर में गोली चलाकर, उसकी मृत्यु कारित कर उसकी हत्या का अपराध कारित किये ?
2(4)- उक्त दिनांक समय व स्थान में आप अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य न होते हुये अनुसूचित जाति के व्यक्ति मृतक महादेव महार की हत्या उसके अनुसूचित जाति होने के आधार पर कारित किये ?
2(5)- उक्त दिनांक समय व स्थान में उक्तानुसार विधि विरूद्ध जमाव, जिसका सामान्य उद्देश्य मृतक महादेव महार की हत्या करना तथा मृतक महादेव महार की हत्या के समय साशय व यह जानते हुये कि ऐसी परिस्थितियों में उक्त संतोष उर्फ गुड्डा, गिरवर, चंदन की ओर कट्टा व पिस्तौल से फायर किये जिससे संतोष, गिरवर या चंदन की मृत्यु हो जाती तो आप हत्या के दोषी होते?
आरोपी प्रभाष सिंह, सत्येन माधवन, मंगल सिंह, तपन सरकार, शैलेन्द्र ठाकुर, रंजीत सिंह व बॉबी उर्फ विद्युत चौधरी के संबंध में:-
3- क्या दिनांक 11/2/2005 को 6.25 बजे या उसके लगभग स्थान सुभाष चौक सुपेला में एवं उसके पश्चात अपने अवैध आधिपत्य में बिना किसी वैध अधिकार के आरोपी तपन ने कट्टा, 315 बोर का जिंदा कारतूस, आरोपी शैलेन्द्र ठाकुर ने 303 बोर के दो कट्टे, व 303 बोर का नौ नग जिंदा कारतुस, बटनदार चाकू, आरोपी प्रभाष ने 315 बोर का कट्टा व कारतुस, आरोपी सत्येन्द्र माधवन ने कट्टा, आरोपी मंगल सिंह ने कट्टा व कारतुस, आरोपी विद्युत चौधरी ने कट्टा व  कारतुस तथा आरोपी रंजीत सिंह ने प्रतिबंधित आयुध को रखा था? इस प्रकार आरोपीगण ने आयुध अधिनियम की धारा 27 के तहत दण्डनीय अपराध कारित किया?
4- क्या दिनांक 11/2/2005 को थाना सुपेला के क्षेत्राधिकार में सुभाष चौक में 6 से 6.30 बजे के मध्य प्रातः आरोपी प्रभाष सिंह ने 315 बोर के कट्टे, आरोपी शैलेन्द्र ठाकुर ने 303 बोर के कट्टे, आरोपी तपन सरकार एवं सत्येन माधवन ने देशी कट्टा, आरोपी विद्युत चौधरी ने लोहे की खुखरी, आरोपी मंगल ने एक कट्टा व कारतुस एवं आरोपी रंजीत ने धारा 4 आयुध अधिनियम के उल्लंघन में प्रतिबंधित आयुध को बिना किसी लायसेंस के अपने अवैध आधिपत्य में रखा ? इस प्रकार आरोपीगण ने आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत दण्डनीय अपराध कारित किया?
शेष आरोपीगण के लिये
5- क्या आरोपी जसपाल उर्फ गोल्डी, जे.जे.राव, प्रतापसिंह उर्फ मुन्ना, चुम्मन, संजय सिंह, रवि ठाकुर, फरहान उर्फ इरफान, तोरई पांडियन, रज्जन मियां, सुशील कुमार राठी, बलविंदर सिंह, संतोष साहू, शैलेष सिंह, पंकज सिंह, एस. सैथिल्य व नरेन्द्र दुबे ने दिनांक 11/2/2005 को अथवा उसके पश्चात यह जानते हुये कि आरोपी तपन सरकार, मंगल सिंह, शैलेन्द्र ठाकुर, सत्येन माधवन, जयदीप, प्रभाष सिंह, बच्चा उर्फ जायद, अनिल शुक्ला, गुल्लू श्रीवास्तव, बिहारी उर्फ विनोद बिहारी, मुजीबुद्दीन, राजू खंजर, रंजीत सिंह, छोटू उर्फ कृष्णा, पिताम्बर साहू, गया उड़िया, बिज्जू उर्फ महेश यदू द्वारा हत्या एवं हत्या के प्रयत्न जैसा अपराध कारित किया गया है, उन्हें हत्या एवं हत्या के प्रयत्न के लिये दण्डनीय अपराध के दण्ड से बचाने के आशय से आर्थिक सहायता देकर या अपने घर में संश्रय देकर या वाहन मुहैया कराकर या अन्य रीति से आश्रय देकर भा0दं0सं0 की धारा 212 के दण्डनीय अपराध कारित किये?
6- क्या उक्त दिनांक समय व स्थान पर उक्त आरोपियों को जिन्हें गिरफ्तार किये जाने का आदेश दिया जा चुका था, या जो फरार घोषित किये जा चुके थे, उन्हे गिरफ्तारी से बचाने के आशय से उन्हें संश्रय दिया या छिपाया और क्या ऐसा करके भा0दं0सं0 की धारा 216 के तहत दण्डनीय अपराध कारित किया?
।। अवधारणीय प्रश्न क्रमांक 1 पर सकारण निष्कर्ष ।।
8- इस अवधारणीय प्रश्न के संबंध में आरोपीगण के विद्वान अधिवक्तागण ने अधिक विवाद नही किया है। उन्होने मृतक महादेव महार की हत्या के संबंध में यह प्रतिरक्षा ली है कि मृतक महादेव महार दुर्ग जिले का नामचीन आपराधिक प्रकृति का व्यक्ति था, जिसे उसके दुश्मनों ने घटनास्थल सुभाष चौक के अतिरिक्त कहीं और मारकर उसके शव को सुभाष चौक में लाकर छोड़ दिये हैं। आरोपीगण के उक्त प्रतिरक्षा के संबंध में इस निर्णय में आगे उभयपक्ष के साक्ष्य की विवेचना कर निष्कर्ष दिया जावेगा। जहां तक मृतक महादेव महार की मृत्यु की प्रकृति का प्रश्न है, तो इस संबंध में अ0सा077 राकेश भट्ठ, अ0सा015 होलसिंह भुवाल एवं अ0सा010 डॉ0 जे.पी.मेश्राम का साक्ष्य अवलोकनीय है।
9- अ0सा077 राकेश भट्ठ ने मृतक के शव के पंचनामा की कार्यवाही प्रदर्श पी 2 अभिलिखित किया था, एवं उन्होंने मृतक के शव को पोस्टमार्टम हेतु प्रदर्श पी 33 की तहरीर अभिलिखित कर अ0सा015 होलसिंह भुवाल के माध्यम से जिला चिकित्सालय दुर्ग प्रेषित किया था। तब जिला चिकित्सालय दुर्ग के चिकित्सक अ0सा010 डॉ0 जे.पी.मेश्राम ने मृतक के शव का परीक्षण किया है। अ0सा010 डॉ0 जे.पी.मेश्राम ने मृतक के शव का परीक्षण घटना दिनांक 11/2/2005 को ही एक अन्य चिकित्सक डॉ0 एम0सी0 महनोद के साथ मिलकर किया था। उन्होने मृतक महादेव महार के मृत शरीर में निम्नलिखित चोटें पायी थी:-
फायर आर्म इंजूरी:-
1- फायर आर्म इंजूरी की मार्जिन इंवर्टेड ओवल आकार की थी एवं चोर्ड थी, जिसका साइज .1 से.मी. गुणित 3/4 से.मी. जो बोन डीप थी, जो राईट टेम्पोरल रीजन पर अपर पार्ट अप पिन्ना के 3 से.मी. इन्टीरीयर में थी, जो वुंड आफ एन्टरी थी।
2- मल्टीपल पिन हेड साइज के चारिंग मार्क्स, चमड़ी पर थे, जो 15 से 10 से.मी. चेहरे के बांयी तरफ, मेक्सिला में, फ्रन्टल रीजन में जो लेप्ट पिन्ना के सामने थी, जो लेप्ट साइड फेस को कवर कर रहे थे।
3- फायर आर्म इंजूरी - जो इवोर्टेड मार्जिन की, लेप्ट टेम्पोरल रीजन में 1.5 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित बोनडीप थी जिसमें ब्रेन मेटर दिख रहा था, जो 4 से.मी. अपर पार्ट आफ पिन्ना के मार्जिन चार्ज में थी, जो वुंड आफ एक्जिट था।
4- लेसरेटेड वुंड 3 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित थ्रू एण्ड थ्रू लेप्ट उपर ओठ पर।
5- लेसरेटेड वुंड 2 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित थ्रू एण्ड थ्रू, लोवर लिप के मिडिल पार्ट पर।
6- अपर इनसाइजर टूथ मिसिंग था, साकेट में ब्लड क्लाट था।
7- अपर इनसाइजर टूथ ढीला हो गया था।
8- इनसाइज्ड वुंड 15 से.मी. गुणित 2 से.मी. गुणित बोनडीप, वार्टिकली इन्टा पैराइटल रीजन पर।
9- इनसाइज्ड वुंड 10 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित बोनडीप वर्टिकली इन्टापैराइटल रीजन पर।
10- इनसाइज्ड वुंड 10 से.मी. गुणित 1.5 से.मी. गुणित 1 से.मी. टांसवर्सिली आक्सीपीटल रीजन के लोवर पार्ट पर।
11- इनसाइज्ड वुंड 6 से.मी. गुणित 1 से.मी. मसल्स डीप टांसर्विली इंजूरी नम्बर 10 के एकदम नीचे।
12- इनसाइज्ड वुंड 3 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित 1 से.मी., स्केपुला रीजन के लेप्ट अपर पार्ट पर।
13- इनसाइज्ड वुंड 10 से0मी0 गुणित 4 से0मी0 गुणित मसल डीप लेपट लोवर स्केपुला रीजन पर।
14- इनसाइज्ड वुंड 4 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित राईट स्केपुला रीजन पर अपर पार्ट
में मिडलाईन के समीप।
15- इनसाइज्ड वुंड 12 से.मी. गुणित 4 से.मी. गुणित 2 से.मी., वर्टिकली फोरेसिंक स्पाइन के राइट साईड में।
16- इनसाइज्ड वुंड 8 से.मी. गुणित 3 से.मी. गुणित 2 से.मी. राइट स्केपूलर रीजन पर।
17- इनसाइज्ड वुंड 4 से.मी. गुणित 1 से.मी. फोरेंसिक टवेल्व से एल 1 स्पाइन पर वर्टिकली।
18- इनसाइज्ड वुंड 4 से.मी. गुणित 0.5 से.मी. गुणित 0.5 से.मी. आब्लीकली राइट स्केपुलर रीजन के नीचे।
19- इनसाइज्ड वुंड 4 से.मी. गुणित 1 से.मी. गुणित 1 से.मी. इंजुरी नं0 18 के तीन से.मी. राइट साईड में।
20- इनसाइज्ड वुंड 10 से.मी. गुणित 3 से.मी. गुणित 2 से.मी. लंबर स्पाइन एल 3 से एल 5 के राइट साईड में।
21- इन्साइज्ड वुंड 9 से.मी. गुणित 2 से.मी. गुणित 1 से.मी. राइट इलियक रीजन पर।
इस प्रकार अ0सा010 डॉ0 जे0पी0मेश्राम ने मृतक महादेव महार के शरीर में कुल 21 चोटें पायी थी, जिसमें फायर आर्म इंजूरी भी थी।
10- अ0सा010 डॉ0 जे0पी0मेश्राम ने अपने साक्ष्य की कण्डिका 4 में ही आगे यह भी कथन किया है कि:-
1- उक्त सभी चोटों पर ब्लड क्लाट्स मौजुद थे।
2- बहुत सारे इरेगुलर फ्रेक्चर जो टेम्पोरल, पैराइटल और आक्सीपीटल बोन पर थे।
3- इंजुरी नम्बर 1 व 3 एक दूसरे से कम्युनिकेट कर रही थी, जिसमें ब्रेन मेटर का लेसरेशन दिख रहा था।
4- दो ओवल सेप छिद्र 1 से.मी. डायामीटर के, जो इंजुरी नम्बर 1 से 3 के बीच में जोड़ रहे थे। ब्रेन मेटर का लेसरेशन पैराइटल और आक्सीपीटल रीजन पर था।
5- लेप्ट साईड की 10 वी और 11 वी पसलियां टूटी हुई थी। लेफ्ट साईड में हीमोथोरेक्स मौजुद था।
इस साक्षी ने अपने साक्ष्य की कण्डिका 6 में कथन किया है कि मृतक के शरीर में आयी चोट क्रमांक 1, 2, 3 फायर आर्म से, चोट क्रमांक 4,5,6,7 हार्ड एवं ब्लन्ड आब्जेक्ट से, चोट क्रमांक 8 से 21 हार्ड एवं शार्प आब्जेक्ट से आयी थी। सभी चोटें एन्टीमार्टम नेचर की थी। इस साक्षी ने अपने साक्ष्य की कण्डिका 9 में मृतक की मृत्यु के संबंध में यह अभिमत दिया है कि मृतक की मृत्यु का कारण शॉक और हेमरेज था, जो उपरोक्त बतायी गयी एन्टीमार्टम चोटों के कारण हुआ था, जिसके संबंध में उनकी रिपोर्ट प्रदर्श पी 34 है, जिसके अ से अ भाग पर उनके और ब से ब भाग में उसके साथी चिकित्सक एम.सी.महनोद के हस्ताक्षर है।

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