Monday, 29 August 2016

छत्तीसगढ़ राज्य विरूद्ध रमेश शर्मा पिता रामस्वरूप शर्मा

न्यायालयः- विशेष  अपर सत्र न्यायाधीष, फास्‍ट ट्रेक कोर्ट,
दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा  (छ.ग.)
(पीठासीन अधिकारी - श्रीमती धनेश्‍वरी सिदार)
विशेष  सत्र प्रकरण- 07/2015
(CGDA010001052015)

थाना- बचेली , अप. क्र.-13/15
संस्थित दिनांक -24.06.2015
छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से
आरक्षी केन्‍द्र बचेली , जिला-द.ब. दंतेवाड़ा  (छ.ग.) ----------- अभियोजन
 // विरूद्ध //
रमेश शर्मा  पिता रामस्वरूप शर्मा
उम्र- 25 वर्ष , साकिन- छन्‍नूपारा,
बचेली , थाना- बचेली , जिला- दंतेवाड़ा  (छ.ग.)
स्थायी पता- ग्राम लखनपट्टी,
पोस्ट- कासोर, जिला- समस्तीपुर,
थाना- वालिस नगर (बिहार) ------------------------------ आरोपी
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अभियोजन द्वारा श्रीमती नीलिमा वर्मा, अतिरिक्त लोक अभियोजक।
आरोपी की ओर से श्री आनंद विश्वकर्मा अधिवक्ता।
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निर्णय
( आज दिनांक - 22 अगस्त 2016 को घोषित )
(1) आरोपी के विरूद्ध धारा- 363, 366-क, 376 भा.द.सं. एवं धारा- 3, 4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत् आरोप है कि उसने दिनांक 17.03.2015 की रात्रि से 18.03.2015 के समय सुबह 07.00 बजे के मध्य अंधेरी चौक वार्ड क्र. 02 बचेली, प्रार्थी शिवनारायण शर्मा का मकान, थाना- बचेली में 18 वर्ष से कम आयु की पीड़िता, जो कि एक महिला है को, उसके विधिपूर्ण संरक्षक के संरक्षकता से संरक्षक की सम्मति के बिना ले गया और पीड़िता को शादी करने का प्रलोभन देकर बीजापुर आंधप्रदेश के बार्डर के पास, गांव जाने के लिए विवश कर उसका व्यपहरण/अपहरण यह संभाव्य जानते हुये किया कि वह अयुक्त संभोग करने के लिए विवश की जायेगी एवं उक्त घटना दिनांक के बाद दिनांक 18.03.2015 से दिनांक 25.03.2015 के मध्य बीजापुर आंध्रप्रदेश बार्डर के पास गांव में पीड़िता के साथ शारीरिक संभोग कर बलात्कार/प्रवेशन लैंगिक हमला किया।
(2) अभियोजन वृतांत संक्षेप में इस प्रकार है, कि दिनांक 17.03.2015 की रात्रि में प्रार्थी शिवनारायण शर्मा, पूरे परिवार के साथ खाना खाकर सोया था कि सुबह 18.03.2015 के सुबह 07.00 बजे देखा कि उसकी पुत्री पीड़िता घर पर नहीं थी, तब परिवार वालों के साथ आसपास एवं रिश्तेदारों के यहां पतासाजी किये, किन्तु पीड़िता का कहीं पता नहीं चला, पतासाजी के दौरान आरोपी के घर भी जाकर पीड़िता का पता किये वहां भी आरोपी नहीं था। उसके बाद दंतेवाड़ा, गीदम, भैरमगढ़, बीजापुर में पता तलाश किये, तब किसी ने पीड़िता और आरोपी को बीजापुर देखना बताया, तब पीड़िता के पिता शिवनारायण शर्मा के द्वारा अपनी नाबालिग पुत्री को आरोपी रमेश शर्मा के द्वारा बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने के जाने के संबंध में थाना बचेली में रिपोर्ट दर्ज कराया, जिस पर प्रथम सूचना पत्र (प्र.पी.4) दर्ज किया जाकर प्रकरण विवेचना में लिया गया।
(3) विवेचना के दौरान घटनास्थल का नजरी नक्शा (प्र.पी.5) तैयार किया गया। पीड़िता को बरामद कर बरामदगी पंचनामा (प्र.पी.16) तैयार किया गया। पीड़िता से पूछताछ कर उसका कथन लिया गया, जिसने अपने कथन में दिनांक 17.03.2015 की रात्रि 03-04ः00 बजे आरोपी के द्वारा उसे घर के बाहर बुलाकर जबरदस्ती धमकी देकर दंतेवाड़ा होते हुये बीजापुर, आंध्रप्रदेश बार्डर के पास, किसी गांव में ले जाना एवं शारीरिक संबंध स्थापित करना बतायी। जिस पर उसका चिकित्सीय परीक्षण हेतु उससे एवं उसके पिता से (प्र.पी.8 एवं 12) सहमति लिया जाकर जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा को तहरीर (प्र.पी.10 ए) लिखा गया तत्पश्चात पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण रिपोर्ट (प्र.पी.10) प्राप्त किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर उसका भी मुलाहिजा करवाया गया। विवेचना के दौरान पीड़िता की हाईस्कूल की अंकसूची (आर्टिकल 6ए) जप्त कर जप्ती पत्रक (प्र.पी.6) तैयार किया गया। गवाहों के कथन लेखबद्ध किये गये। संपूर्ण विवेचना उपरांत यह अभियोग पत्र विचारण हेतु इस न्यायालय में पेश किया गया।
(4) आरोपी के विरूद्ध धारा- 363, 366-क, 376 भा.द.सं. एवं धारा- 3, 4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत आरोप विरचित किया गया। आरोपी ने आरोपों को अस्वीकार कर विचारण चाहा। धारा 313 द.प्र.सं के तहत आरोपी के कथन लेखबद्ध किये गये, आरोपी ने अभियोजन साक्ष्य में आये तथ्यों को इंकार किया, स्वयं को निर्दोष एवं झूठा फंसाया जाना कहा। आरोपी ने अपने बचाव में साक्ष्य देना कहा किन्तु उसके द्वारा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया है।
(5) प्रकरण में विचारणीय प्रश्न यह है कि-
1. क्या आरोपी ने दिनांक 17.03.2015 की रात्रि से 18.03.2015 के समय सुबह 07.00 बजे के मध्य अंधेरी चौक वार्ड क्र. 02 बचेली प्रार्थी शिवनारायण शर्मा का मकान, थाना- बचेली में 18 वर्ष से कम आयु की पीड़िता, जो कि एक महिला है को, उसके विधिपूर्ण संरक्षक के संरक्षकता से संरक्षक की सम्मति के बिना ले गया ?
2. क्या आरोपी ने उक्त दिनांक, समय व स्थान पर पीड़िता को शादी करने का प्रलोभन देकर बीजापुर आंधप्रदेश बार्डर के पास, गांव जाने के लिए विवश कर उसका व्यपहरण/अपहरण यह संभाव्य जानते हुये किया कि वह अयुक्त संभोग करने के लिए विवश की जायेगी ?
3. क्या आरोपी ने उक्त घटना दिनांक के बाद दिनांक 18.03.2015 से दिनांक 25.03.2015 के मध्य बीजापुर आंध्रप्रदेश बार्डर के पास गांव में पीड़िता के साथ शारीरिक संभोग कर बलात्कार किया ?
4. क्या आरोपी ने उक्त घटना दिनांक के बाद दिनांक 18.03.2015 से दिनांक 25.03.2015 के मध्य बीजापुर आंध्रप्रदेश बार्डर के पास गांव में पीड़िता के साथ शारीरिक संभोग कर प्रवेशन लैंगिक हमला किया ?
(6) अभियोजन ने अपने समर्थन में बृजलाल ताती (अ.सा.1), डॉं, जी.जे. राव (अ.सा.2), शिवनारायण शर्मा (अ.सा.3), रामचन्द्र शर्मा (अ.सा.4), डॉ. श्रीमती अनिता गंगेश (अ.सा.5) श्रीमती निर्मला शर्मा (अ.सा.6), कृष्णा शर्मा (अ.सा.7), पीड़िता (अ.सा.8), श्रीमती अनिता चौधरी (अ.सा.9), दयाशंकर यादव (अ.सा.10), हंसराज गौतम (अ.सा.11) का कथन कराया है।
विचारणीय प्रश्न 1 से 4 की विवेचना एवं निष्कर्ष:-
(7) उपरोक्त सभी विचारणीय प्रश्न एक ही साक्ष्यक्रम पर आधारित है। अतः साक्ष्य की पुनरावृत्ति से बचने के लिए इनका निराकरण एक साथ किया जा रहा है।
(8) आरोपी पर भा.द.सं. की धारा 363, 366-क, 376 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा- 3, 4 एवं भा.द.सं. के तहत विचारण किया जा रहा है। दिनांक  14.11.2012 को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 प्रभावशील हुआ तथा घटना दिनांक 17-18. 03.2015 की है। लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा- 2(घ) के अनुसार ‘‘बालक’’ से एैसा कोई  व्यक्ति, जिसकी आयु 18 वर्ष  से कम है अभिप्रेत है। इसी प्रकार दिनांक 13.02.2015 को हुये संशोधन के अनुसार सम्मति की उम्र 18 वर्ष  मानी गयी है। इन परिस्थितियों में घटना दिनांक 17-18.03.2015 को पीडि़ता की उम्र का निर्धारण सर्व प्रथम किया जाना आवश्यक है।
(9) किशोर न्याय नियम 2007 की नियम 12 के अनुसार एवं माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा न्याय दृष्टांत जनरैल सिंह वि0 हरियाणा राज्य क्रिमिनल अपील नंबर 1209 वर्ष  2010 के परिपेक्ष्य में पीडि़ता के उम्र निर्धारण हेतु निम्नलिखित दस्तावेजी साक्ष्य की आवश्यकता होती है -
प्रथम- मेट्रिकुलेशन या समतुल्य प्रमाण पत्र, यदि हो एवं उसके अभाव में।
द्वितीय- प्ले स्कूल को छोड़कर एैसे स्कूल द्वारा प्रदत्त जन्म प्रमाण पत्र जिसमें सर्वप्रथम भाग लिया गया है या जन्मतिथि के प्रविष्टि के संबंध में संधारित प्रवेश पंजी, एवं उसके अभाव में।
तृतीय- नगर पालिका या प्राधिकरण या पंचायत द्वारा जारी किये गये जन्म प्रमाण पत्र एवं उसके अभाव में।
चतुर्थ- उक्त वर्णित किसी भी प्रकार के साक्ष्य के अभाव में चिकित्सीय साक्ष्य के आधार पर संबंधित बालक की आयु के अवधारण विहित करता है।
(10) प्रकरण में देखना यह है कि क्या घटना दिनांक को पीडि़ता की उम्र-18 वर्ष  से कम थी ?- इस संबंध में देखा जाये तो जप्ती पत्रक (प्र.पी.6) के अनुसार पीड़िता के पिता शिवनारायण शर्मा (अ.सा.3) जिससे पीड़िता की 10वीं कक्षा की अंकसूची (आर्टिकल 6ए) जप्त की गयी है, जिसे विवेचक हंसराम गौतम (अ.सा.11) ने जप्त करना कहा है, जिसके अनुसार पीड़िता की जन्मतिथि 03.08.1997 है। पीड़िता की मां श्रीमती निर्मला शर्मा (अ.सा.6) ने पीड़िता की जन्मवर्ष 1997 होना एवं घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम होना बतायी है। पीड़िता (अ.सा.8) ने भी धारा 164 द.प्र.सं. के तहत लिये गये कलमबंद बयान (प्र.पी.13) में भी अपनी उम्र- 17 वर्ष होना बतायी है। प्रकरण में घटना दिनांक 17.03.2015 से 25.03.2015 के मध्य की होना बतायी गयी है तथा पीड़िता की जन्मतिथि 03.08.1997 है, जिसके अनुसार पीड़िता की उम्र घटना दिनांक 17.03.2015 को 17 वर्ष  07 माह 15 दिन होती है। जिससे प्रमाणित होता है कि पीडि़ता की उम्र घटना दिनांक  को 18 वर्ष  से कम थी।
(11) बचाव पक्ष की ओर से उम्र के संबंध में न्याय दृष्टांत 2015 2 JLJ 318; 2015 0 Supreme (MP) 136 Raghuveer Prasad Vs. State of M.P., 2015 4 CGLJ 296; 2015 0 Supreme (Chh) 172 Gudda @ Nabi Ullah Vs. State of C.G., 2015 4 EastCrC (SC) 238; 2015 3JLJ (SC) 366; 2015 4 RCR (Cri) 412; 2016 1 SCC 696; 2015 6 Supreme 705; 2015 0 Supreme (SC) 863; State of M.P. Vs. Munna @ Shamboo nath, 2003 (1) C.G.L.J. 138 Jinish lal Sah Vs. State of Bihar, 2006 (1) C.G.L.J. 453 Kanhaiya Vs. State of C.G.,  प्रस्तुत किया गया है, उक्त न्याय दृष्टांत का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया, उक्त न्याय दृष्टांत के तथ्य इस प्रकरण के तथ्य से भिन्न है तथा उक्त न्याय दृष्टांत लैंगिक अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम 2012 लागू होने के पूर्व के हैं, और लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा- 2(घ) के  अनुसार ‘‘बालक’’ से एैसा व्यक्ति जिसकी आयु 18 वर्ष  से कम है, अभिप्रेत है, परिभाषित किया गया है और उक्त प्रकरण में बालक (पीड़िता) की उम्र 18 वर्ष से कम होना पायी गयी है। अतः उक्त न्याय दृष्टांत का लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता।
(12) पीड़िता (अ.सा.8) का कथन है कि घटना दिनांक 17 मार्च 2015 को रात्रि में वह अपने परिवार के साथ सोयी थी, कि लगभग 03-04ः00 बजे रात्रि में आरोपी का फोन आया कि कुछ जरूरी बात करना है, घर से बाहर आओ, तब वह घर से बाहर आयी तो देखी कि आरोपी बाहर खड़ा इंतजार कर रहा था, तब वह उससे बोला कि बहुत प्यार करता है, उसके बगैर नहीं रह सकता, उससे शादी करना चाहता है, तब वह बोली कि वह एैसा नहीं कर सकती, तभी आरोपी उसे जबरदस्ती मोटर सायकल में बिठाया और आगे चलकर बात करेंगे कहकर धीरे-धीरे बचेली की ओर से दंतेवाड़ा की तरफ ले गया और कुछ दूर, कुछ दूर कहते हुये, बीजापुर ले गया और वहां से बहला-फुसलाकर आंधप्रदेश बार्डर पर एक छोटे से गांव के एक मकान में ले जाकर रखा और उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाया।
(13) पीड़िता का यह भी कथन है कि आरोपी उसके साथ दिनांक 18.03.15 से दिनांक 25.03.15 तक लगातार जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाता रहा और फिर दिनांक 26.03.2015 को दंतेवाड़ा लाकर छोड़ दिया और खुद भाग गया। तब वह दंतेवाड़ा से बस पकड़कर बचेली अपने घर चली गयी और अपने साथ हुये घटना के बारें में माता-पिता को बतायी। उसके बाद माता-पिता उसे बचेली थाना लेकर गये, वहां भी उसने आरोपी के द्वारा उसे जबरदस्ती बहला-फुसलाकर ले जाना और शारीरिक संबंध बनाना बतायी थी। पुलिस ने उसका डाक्टरी मुलाहिजा हेतु उससे सहमति लिया था, पुलिस ने उसका न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, दंतेवाड़ा के समक्ष 164 द.प्र.सं. के तहत कथन भी दर्ज कराया था। पीड़िता ने प्रतिपरीक्षण में यह कहा है कि आरोपी आंधप्रदेश के एक घर में रूम लेकर रूकवाया था, जहां एक ही कमरा था, वहां एक सप्ताह तक रूके, आरोपी उसे घर में छोड़ देता था और खुद आते-जाते रहता था, उसे बाहर से लाकर खाना खिलाता था और उसके साथ गलत काम करता था, तब वह मना करती थी, मना करने पर आरोपी मार दूंगा या मर जाऊंगा कहता था। पीड़िता ने यह भी स्वीकार किया है कि आरोपी उसे घरवालों से बात करने के लिए मना कर रखा था, आरोपी और उसकी फोटो (प्रदर्श डी.1 एवं डी.2) शादी की है। उसका न्यायालय में बयान हुआ था, जहां जज साहब ने जैसा उसने बोली थी, वैसा ही बयान लिखे थे। पीड़िता ने इस बात को गलत होना कहा है कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया है। इस प्रकार पीड़िता ने आरोपी के द्वारा बहला-फुसलाकर घर से ले जाना एवं शारीरिक संबंध स्थापित करना बतायी है।
(14) पीड़िता ने घटना के बारे में अपने माता-पिता एवं परिवारवालों को बताना कहा है। जिसका समर्थन करते हुये पीड़िता के माता एवं पिता श्रीमती निर्मला शर्मा (अ.सा.6) एवं शिवनारायण शर्मा (अ.सा.3) ने अपने कथन में बताये हैं कि घटना दिनांक की सुबह 06.00 बजे उठे तो देखे कि उनकी पुत्री पीड़िता घर में नहीं थी, आसपास पतासाजी किये, किन्तु कहीं पता नहीं चला, लगातार तीन दिन तक ढूंढते रहे। आरोपी के घर जाकर भी देखे तो आरोपी भी घर में नहीं था, घर में ताला लगा था, तब थाना जाकर आरोपी के विरूद्ध प्रथम सूचना पत्र (प्र.पी.4) दर्ज करवाये। आरोपी पहले उनके दुकान में काम करता था, उस बीच कभी-कभी पीड़िता से उसकी बातचीत भी होती थी, तब पता चला था कि आरोपी लड़की के साथ गलत हरकत कर रहा है, जिसके कारण उन्होंने आरोपी को दुकान से निकाल दिया था। उनकी पुत्री पीड़िता गुम होने के 09 दिन बाद घर वापस आयी, तब उन्होंने उससे पूछताछ किया, तब पुत्री ने बतायी कि आरोपी उसे घर के बाहर बुलाया और आगे चलकर बात करते हैं कहकर मोटर सायकल में बैठाकर दंतेवाड़ा होते हुये बीजापुर ले जाकर किसी घर में रखा और उसके साथ गलत काम किया।
(15) साक्षियों का आगे कथन है कि पुत्री के वापस आने पर वे पुत्री को थाना लेकर गये थे, जहां उसका चिकित्सीय परीक्षण हुआ था, जिसके लिए उन्होंने सहमति दी थी। साक्षी श्रीमती निर्मला (अ.सा.6) का यह भी कथन है कि आरोपी ने उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था, उसकी पुत्री ने उसे घटना के बारे में सारी बातें बतायी थी। साक्षियों ने प्रतिपरीक्षण में इस बात को गलत होना कहा है कि लड़की ने आरोपी द्वारा गलत काम करने की बात उन्हें नहीं बतायी थी। इस प्रकार उपरोक्त साक्षियों ने पीड़िता के कथन का पूर्णतः समर्थन किया है।
(16) अभियोजन साक्षी रामचन्द्र शर्मा (अ.सा.4) जो पीड़िता के बड़े पिताजी हैं, का कथन है कि घटना 17 मार्च 2015 की है, उसके दूसरे दिन सुबह करीब 08.00-9.00 बजे जब वह अपनी दुकान पर गया, तो देखा कि उसके छोटे भाई शिवनारायण शर्मा की दुकान बंद थी, पूछने पर संजय शर्मा ने बताया कि शिवनारायण की पुत्री कहीं चली गयी है, तब वह अपने भाई शिवनारायण के घर गया, और पुत्री को ढूंढने में मदद किया, पर कोई पता नहीं चला, तब बाद में आरोपी के घर गये, तो देखे कि आरोपी भी घर में नहीं था, तब थाना जाकर रिपोर्ट दर्ज कराये। इसके बाद लड़की 26 तारीख को अकेले घर आयी, पूछने पर बतायी कि आरोपी उसे रात में फोन करके बुलाया कि जरूरी बात करना है, और मोटर सायकल में बैठाकर दंतेवाड़ा होते हुये बीजापुर ले गया और वहां कोई गांव में रखा और उसके साथ गलत काम किया। उसी प्रकार पीड़िता का भाई कृष्णा शर्मा (अ.सा.7) का कथन है कि घटना के दूसरे दिन 18.03.2015 को आरोपी के घर जाकर देखे, आरोपी के घर में उसके दीदी-जीजा थे, उन्होंने बताया कि आरोपी रात से नहीं है। तब वे लोग पीड़िता की फोटो लेकर पतासाजी करने लगे, तब बीजापुर में होने का पता चला किन्तु बीजापुर जाने पर पता चला कि आरोपी उसे और कहीं दूसरे गांव लेकर चला गया है, तब जाकर थाना में रिपोर्ट दर्ज कराये थे। उसके बाद पीड़िता 26 मार्च 2015 को घर बचेली पहुंची और बतायी कि दिनांक 17.03.2015 को आरोपी उसे रात में फोन करके बुलाया कि जरूरी बात करना है, और मोटर सायकल में बैठाकर दंतेवाड़ा होते हुये बीजापुर के किसी गांव में रखा और उसके साथ गलत काम बलात्कार किया। इस प्रकार इन साक्षियों ने भी पीड़िता के कथन का समर्थन किया है।
(17) पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षणकर्ता चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीमती अनिता गंगेश (अ.सा.5) ने पीड़िता का गुप्तांग परीक्षण किया है, जिसने पीड़िता का परीक्षण करने पर पीड़िता को संभोग के लिए सक्षम होना बतायी है तथा पीड़िता का परीक्षण कर वेजाईनल स्लाईड एवं स्वाब तैयार रासायनिक परीक्षण हेतु सीलबंद कर संबंधित आरक्षक को सौंपना अपनी रिपोर्ट (प्र.पी.9) में बताया है। उसी प्रकार चिकित्साधिकारी डॉ. जी. जे. राव (अ.सा.2) ने आरोपी का मुलाहिजा कर आरोपी को संभोग के लिए सक्षम होना एवं आरोपी के सीमेन को रासायनिक परीक्षण हेतु संबंधित आरक्षक को वापस किया जाना अपनी रिपोर्ट (प्रपी.3) में बताया है।
(18) साक्षी दयाशंकर यादव (अ.सा.10) का कथन है कि वह प्रार्थी शिवनारायण, पीड़िता और आरोपी को जानता है। प्रार्थी शिवनारायण की पुत्री पीड़िता कहीं चली गयी थी, तीन-चार दिन बाद जब वह वापस आयी तब उसके घर वाले उसे थाना लेकर गये, तब वह भी थाना गया, तब जानकारी हुई कि पीडि़ता, आरोपी के साथ गयी थी। तब थाना वालों ने पीड़िता का बरामदगी पंचनामा (प्र.पी.16) तैयार कर उसके परिवारवालों को सौंप दिये।
(19) साक्षी बृजलाल ताती पटवारी (अ.सा.1) का कथन है कि उसने दिनांक 15.04.2015 को थाना बचेली के अपराध क्रमांक 13/15 में घटनास्थल प्रार्थी शिवनारायण शर्मा के मकान का निरीक्षण कर नजरी नक्शा (प्र.पी.1) तैयार किया था।
(20) साक्षी श्रीमती अनिता चौधरी, प्रधान आरक्षक (अ.सा.10) एवं हंसराज गौतम (अ.सा.11) जो प्रकरण के विवेचक हैं। साक्षी श्रीमती अनिता चौधरी (अ.सा.10) का कथन है कि उसने प्रकरण के विवेचना के दौरान घटनास्थल का निरीक्षण कर घटनास्थल का नजरी नक्शा (प्र.पी.5) तैयार किया था तथा पीड़िता का बरामदगी पंचनामा (प्र.पी.16) गवाहों के समक्ष तैयार किया था। अनुविभागीय दंडाधिकारी से पीड़िता के डाक्टरी परीक्षण की अनुमति बाबत तहरीर (प्र.पी.14) लिखा था, पीड़िता के चिकित्सीय परीक्षण हेतु तहरीर (प्र.पी.10ए) तैयार किया था। पीड़िता का वेजाईनल स्लाईड एवं स्वाब जप्त कर जप्ती पत्रक (प्र.पी.15) तैयार किया था। विवेचना के दौरान गवाहों के कथन उनके बताये अनुसार लेखबद्ध किया था। उसी प्रकार साक्षी हंसराज गौतम (अ.सा.11) का कथन है कि विवेचना के दौरान दिनांक 23.03.2015 को आरोपी के मुलाहिजा हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बचेली को तहरीर (प्र.पी.19) लिखा था तथा दिनांक 29.03.2015 को थाना परिसर बचेली में आरोपी के द्वारा पेश करने पर गवाहों के समक्ष एक काला रंग का होण्डा मोटर सायकल जप्त कर जप्ती पत्रक (प्र.पी.7) तैयार किया था। आरक्षक क्रमांक 187 अरविंद साहू द्वारा पेश करने पर सीलबंद डिब्बा में आरोपी का सीमेन, जप्त कर जप्ती पत्रक (प्र.पी.20) तैयार किया था। विवेचना के दौरान गवाहों के कथन उनके बताये अनुसार लेखबद्ध किया था। आरोपी के विरूद्ध पर्याप्त अपराध सबूत पाये जाने पर उसे गिरफ्तार किया था। इस प्रकार उपरोक्त दोनों विवेचकों ने अपने द्वारा की गयी कार्यवाही को पूर्णतः प्रमाणित किया है।
(21) विवेचकों के द्वारा जप्तशुदा वस्तुओं पीड़िता का वेजाईनल स्लाईड एवं स्वाब तथा आरोपी के सीमेन को रासायनिक परीक्षण हेतु विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है, विधि विज्ञान प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट (प्र.पी.22) के अनुसार पीड़िता के वेजाईनल स्लाईड (प्रदर्श ए1) तथा आरोपी का सीमेन (प्रदर्श सी) में मानव शुक्राणु पाये गये हैं। जिससे पुष्टि होती है कि पीडि़ता के साथ प्रवेशन लैंगिक हमला हुआ है तथा पीड़िता ने भी स्पष्ट कथन किया है कि आरोपी नें उसके साथ बलात्कार/प्रवेशन लैंगिक हमला किया है, जिसका समर्थन अन्य अभियोजन साक्षियों ने किया है।
(22) उपरोक्तानुसार साक्ष्य विवेचन से आरोपी जैसा कि लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा- 29 के अनुसार, कतिपय अपराधों में बारे में उपधारणा- धारा-3, धारा 5, धारा 7 और धारा 9 के अधीन किसी अपराध को करने, करने का दुष्प्रेरण करने या करने का प्रयत्न करने के लिए अभियोजित किया जा रहा है। वहां विशेष न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसे व्यक्ति ने वह अपराध किया है जब तक कि इसके विरूद्ध साबित नहीं हो जाता। यहां आरोपी ने एैसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया है, जिससे कि उसके पक्ष में उपधारणा किया जा सके कि उसे प्रकरण में झूठा फंसाया गया है। बचाव में मात्र यह कह देना कि निर्दोष हॅू, झूठा फंसाया गया है, पर्याप्त नहीं है। बल्कि अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य एवं विवेचन से प्रमाणित हो चुका है कि आरोपी द्वारा एक नाबालिग पीड़िता को उसके विधिपूर्ण संरक्षक के संरक्षकता में से संरक्षक की सम्मति के बिना ले गया जबकि पीड़िता की उम्र उस समय 18 वर्ष से कम थी। पीड़िता के पिता शिवनारायण शर्मा (अ.सा.3) के द्वारा आरोपी के विरूद्ध पीड़िता को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाने के संबंध में नामजद रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है। जिससे स्पष्ट है कि इसमें संरक्षक की सम्मति नहीं थी और आरोपी सम्मति के बगैर पीड़िता को ले गया है।
(23) उपरोक्त साक्षियों के कथन, एफ.एफ.एल. रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि होती है कि आरोपी ने दिनांक 17.03.2015 की रात्रि से 18.03.2015 के समय सुबह 07.00 बजे के मध्य अंधेरी चौक वार्ड क्र. 02 बचेली, प्रार्थी शिवनारायण शर्मा का मकान, थाना- बचेली में 18 वर्ष से कम आयु की पीड़िता, जो कि एक महिला है को, उसके विधिपूर्ण संरक्षक के संरक्षकता से संरक्षक की सम्मति के बिना ले गया और पीड़िता को शादी करने का प्रलोभन देकर बीजापुर आंधप्रदेश बार्डर के पास, गांव जाने के लिए विवश कर उसका  व्यपहरण/अपहरण यह संभाव्य जानते हुये किया कि वह अयुक्त संभोग करने के लिए विवश की जायेगी एवं उक्त घटना दिनांक के बाद दिनांक 18.03.2015 से दिनांक 25.03.2015 के मध्य बीजापुर आंध्रप्रदेश बार्डर के पास गांव में पीड़िता के साथ शारीरिक संभोग कर बलात्कार/प्रवेशन लैंगिक हमला किया।
(24) एैसे में आरोपी रमेश शर्मा  को आरोपित अपराध धारा- 363, 366-क, 376 भा.द.सं. एवं धारा- 3, 4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत दोषसिद्ध ठहराया जाता है तथा दंड के प्रश्न पर सुने जाते हेतु निर्णय थोड़ी देर के लिए स्थगित किया जाता है।
-सही-
 (श्रीमती धनेश्‍वरी सिदार)
 विशेष  अपर सत्र न्यायाधीष
फास्‍ट ट्रेक कोर्ट   देतेवाडा (छ.ग.)
पुनश्चः-
(25) दंड के प्रश्न पर उभयपक्ष को सुना गया। आरोपी की ओर से उसके विद्वान अधिवक्ता ने निवेदन किया कि आरोपी नवयुवक है, उसके विरूद्ध पूर्व दोषसिद्धी का कोई प्रमाण नहीं है। आरोपी निरंतर न्यायिक अभिरक्षा में है। अतः सहानुभूति पूर्वक विचार किया जावे।
(26) यह सही है कि आरोपी के विरूद्ध पूर्व दोषसिद्धी का कोई प्रमाण नहीं है तथा यह भी सही है आरोपी निरंतर न्यायिक अभिरक्षा में है किन्तु आरोपी के द्वारा नाबलिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर भगाकर ले जाया गया है और उसका शारीरिक शोषण किया गया है, जो एक गंभीर अपराध है। जिस पर सहानुभूति अपनाना उचित नहीं होगा। अतः उपरोक्त परिस्थितियों देखते हुये आरोपी रमेश शर्मा  को धारा- 363 भा.द.सं. में सात वर्ष  के कारावास एवं 500/- (अक्षरी पांच सौ) रूपये के अर्थ दण्ड तथा धारा- 366-क भा.द.सं. में सात वर्ष  के कारावास एवं 500/- (अक्षरी पांच सौ) रूपये के अर्थ दण्ड तथा धारा- 376 भा.द.सं. में सात वर्ष  के कारावास एवं 500/- (अक्षरी पांच  सौ) रूपये के अर्थ दण्ड एवं धारा- 3, 4 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में सात वर्ष  के कारावास एवं 500/- अक्षरी पांच  सौ) रूपये के अर्थ दण्ड से दंडित किया जाता है। अर्थ दण्ड की राशि अदा न किये जाने पर आरोपी को क्रमशः दो, दो, दो, दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगताया जावे। आरोपी को दी गयी सभी कारावास की सजायें साथ-साथ भुगतायी जावे।
(27) आरोपी इस प्रकरण में दिनांक 29.03.2015 से आज दिनांक 22.08.2016 तक निरतंर न्यायिक अभिरक्षा में है, आरोपी द्वारा बितायी गयी अवधि को उसको दी गई सजा की अवधि में मुजरा की जावे। इस बाबत् सेटअप प्रमाण पत्र पृथक से तैयार किया जावे, जो निर्णय का एक अंग होगा। आरोपी का धारा- 437(अ) द.प्र.सं. के तहत पेश मुचलका निर्णय से छः माह तक प्रभावशील रहेगा।
(28) प्रकरण में जप्तशुदा संपत्ति पीड़िता की कक्षा 10वीं की मूल अंकसूची (आर्टिकल 6ए), पीड़िता को वापस किया जावे तथा एक काले रंग की होण्डा मोटर सायकल, जिसे आरोपी से जप्त किया गया है, किन्तु उक्त वाहन का कोई भी दस्तावेज प्रकरण में संलग्न नहीं है, अतः उक्त वाहन अपील अवधि पश्चात, अपील न होने की दशा में दस्तावेज पेश करने पर वास्तविक स्वामी को वापस किया जावे, वास्तविक स्वामी के अभाव में वाहन को नीलाम कर राशि राजसात किया जावे एवं वेजाईनल स्लाईड, सीमेन आदि अपील अवधि पश्चात, अपील न होने दशा में नष्ट किया जावे अथवा अपील होने की दशा में माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेशानुसार निराकरण किया जावे।
निर्णय खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित
दिनांकित कर घोषित किया गया। मेरे निर्देषन पर टंकित।
-सही- -सही-
(श्रीमती धनेश्‍वरी सिदार)
विशेष अपर सत्र न्यायाधीष
फास्ट ट्रेक कोर्ट दंतेवाडा (छ.ग.)

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