Wednesday, 12 October 2016

लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012

लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने एवं ऐसे अपराधों की जांच एवं विचारण के लिए ’’लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012’’ बनाया गया है।
उद्देश्य:- इस कानून का उद्देश्य 18 वर्ष से कम आयु के बालक अथवा बालिका के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों की रोकथाम करना है।
प्रवेशन लैंगिक हमला - यदि कोई पुरूष अपना लिंग या शरीर का कोई अन्य अंग, जो लिंग नहीं है, किसी बालिका या बालक के योनि, गुदा या मुख में प्रवेश कराता है या किसी अन्य व्यक्ति को बालक अथवा बालिका के साथ ऐसा कृत्य करवाता है तो यह कार्य प्रवेशन लैंगिक हमला है।
दंड - प्रवेशन लैंगिक हमले हेतु न्यूनतम 7 वर्ष एवं अधिकतम आजीवन कारावास के एवं जुर्माने के दंड का प्रावधान है।
लैंगिक हमला - कोई व्यक्ति किसी बालिका या बालक के योनि, लिंग, स्तन को छूता है या छुने के लिए तैयार करता है या लैंगिक आशय से कोई ऐसा कार्य करता है, जिसमें प्रवेशन के बिना शारीरिक संपर्क होता है तो ऐसा कार्य लैंगिक हमला माना जाएगा ।
दंड - लैंगिक हमला हेतु कम से कम 3 वर्ष एवं अधिकतम 5 वर्ष की अवधि एवं जुर्माने के दंड का प्रावधान है।
गुरूतर प्रवेशन लैंगिक हमला एवं गुरूतर लैंगिक हमला - किसी बच्चे के साथ पुलिस अधिकारी, सशस्त्र बल का सदस्य, जेल, रिमाण्ड होम, संरक्षण गृह, संप्रेक्षण गृह, प्राइवेट या सरकारी अस्पताल, शैक्षणिक संस्था, धार्मिक संस्था या बच्चों की देखरेख और संरक्षण हेतु जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी, बच्चे के माता-पिता से जुड़े रिश्तेदार उपरोक्त वर्णित अपराधों को करता है तो वह गुरूतर (गंभीर) अपराध होगा, साथ ही 12 वर्ष से कम उम्र के बालक के साथ किया गया हो तथा लैंगिक अपराध जिससे बालक मानसिक रूप से/शारीरिक रूप से अशक्त हो गया हो, गर्भधारण कर लिया हो, उक्त अपराध गुरूतर/गंभीर श्रेणी का होगा, जिसके लिए निम्नानुसार दंड दिया जा सकता हैः-
01- गुरूतर प्रवेशन लैंगिक हमला के लिए दंड - के लिए न्यूनतम 10 वर्ष तक का कठोर कारावास जो कि आजीवन कारावास तक का हो सकेगा तथा जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
02- गुरूतर लैंगिक हमला के लिए दंड के लिए न्यूनतम 05 वर्ष के कठोर कारावास जो कि 07 वर्ष तक का हो सकेगा एवं जुर्माने के दंड का प्रावधान है।
लैंगिक उत्पीड़न - जब कोई किसी बालक या बालिका को लैंगिक आशय से कोई ध्वनि सुनाता है या अंग दिखाता है या उसे अपने शरीर का कोई भाग दिखाने के लिए कहता है या अश्लील फोटो, कार्टून, लेख या मीडिया की कोई वस्तु दिखाता है या सीधे या इलेक्ट्रानिक या किसी अन्य माध्यम से बार-बार या बालक या बालिका का निरंतर पीछा करता है या देखता है या संपर्क बनाता है या उसके शरीर के किसी भाग या लैंगिक कृत्य से संबंधित इलेक्ट्रानिक फिल्म या अन्य किसी माध्यम से वास्तविक या बनावटी तस्वीर खींचकर मीडिया के किसी भी रूप में उपयोग करने की धमकी देता है या अश्लील प्रयोजनों के लिए प्रलोभन देता है उसके लिए परितोषण देता है, तो यह लैंगिक उत्पीड़न का अपराध है।
दंड - लैंगिक उत्पीड़न हेतु न्यूनतम 03 वर्ष तक के कठोर कारावास एवं जुर्माने के दंड का प्रावधान है।
अश्लील साहित्य के प्रयोजनों हेतु बालक का उपयोग
जब कोई व्यक्ति टेलीविजन चैनलों या विज्ञापन या इंटरनेट या अन्य कोई इलेक्ट्रानिक या मुद्रित प्ररूप द्वारा किसी बालक या बालिका के योनि/लिंग का प्रदर्शन या वास्तविक या नकली लैंगिक कार्यों में उपयोग या अशोभनीय अश्लीलतापूर्ण कार्यक्रम को प्रसारित करता है, तब यह माना जावेगा कि वह अश्लील साहित्य प्रदर्शन का अपराध किया है।
दंड - अश्लील साहित्य प्रदर्शन के उपरोक्त अपराध के लिए अवधि पांच वर्ष तक कारावास की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दुबारा किए गए अपराध की दशा में, सात वर्ष तक की कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
यदि अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करने वाला व्यक्ति प्रवेशन लैंगिक हमला संबंधी किसी अपराध को, अश्लील कार्यों में स्वयं प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर, करता है, वह न्यूनतम दस वर्ष तक के कारावास जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।
यदि अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करने वाला व्यक्ति गुरूतर प्रवेशन लैंगिक हमला संबंधी किसी अपराध को, अश्लील कार्यों में स्वयं प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर, करता है, वह कठोर आजीवन कारावास से और जुर्माने से भी दंडित किए जाने का भागी होगा।
यदि अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करने वाला व्यक्ति लैंगिक हमले संबंधी किसी अपराध को, अश्लील कार्यों में स्वयं प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर करता है, वह न्यूनतम छह वर्ष के कारावास, जो आठ वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किया जाएगा।
यदि अश्लील प्रयोजनों के लिए बालक का उपयोग करने वाला व्यक्ति गुरूतर लैंगिक हमले संबंधी किसी अपराध को, अश्लील कार्यों में स्वयं प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर, करता है, वह न्यूनतम आठ वर्ष की कारावास जो दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडित किये जाने का भागी होगा।
मीडिया/होटल/लॉज/अस्पताल/क्लब/स्टूडियो द्वारा अपराध के संबंध में सूचना देना जरूरी
मीडिया/होटल/लॉज/अस्पताल/क्लब/स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधी सुविधाओं से संबंधित संस्था का कोई कर्मचारी, किसी बालक के लैंगिक शोषण से संबंधित सामग्री या वस्तु के किसी भी तरह के उपयोग के संबंध में विशेष किशोर पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस को ऐसी जानकारी उपलब्ध कराएगा। यदि ऐसी जानकारी/रिपोर्ट उपलब्ध कराने में विफल रहता है तो उसे कारावास से जो छह मास तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से, दंडनीय होगा।
किसी कंपनी या किसी संस्था का प्रभारी व्यक्ति अपने कर्मचारी के द्वारा किए गए किसी अपराध की रिपोर्ट करने में असमर्थ रहता है, उसे एक वर्ष तक की सजा हो सकेगी और जुर्माने से दंडनीय होगा।
मामले की रिपोर्ट
अपराध किए जाने की आशंका या अपराध होने के संबंध में पुलिस को जानकारी देना आवश्यक है। रिपोर्ट नहीं करने पर उसे 06 माह तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है। सद्भावनापूर्वक की गई रिपोर्ट के संबंध में रिपोर्टकर्ता के विरूद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी।
पुलिस अधिकारी द्वारा रिपोर्ट नहीं लिख्ेा जाने पर उसे 06 माह तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।
मीडिया द्वारा न्यायालय की अनुमति के बिना पीड़ित की पहचान सार्वजनिक किए जाने पर छह माह से एक वर्ष तक का कारावास हो सकता है।
बालक को किसी भी कारण से रात्रि में पुलिस थाने में नहीं रखा जाएगा।
बालक का कथन यथासंभव उपनिरीक्षक स्तर के महिला पुलिस अधिकारी द्वारा लिखा जाएगा। ऐसा पुलिस अधिकारी पुलिस वर्दी में नहीं रहेगा।
बालक की मेडिकल जांच उसके माता-पिता अथवा बालक के भरोसेमंद व्यक्ति की उपस्थिति में की जाएगी। मेडिकल महिला डाक्टर द्वारा किया जाएगा।
बालक की देखरेख एवं संरक्षण
जहां विशेष किशोर पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस या यह समाधान हो गया है कि वह पीड़ित बालक की देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता है, तब रिपोर्ट होने के चौबीस घंटे के भीतर बालक को निकटतम बाल संरक्षण गृह या अस्पताल में रखने की व्यवस्था की जाएगी।
विशेष किशोर पुलिस यूनिट या स्थानीय पुलिस बिना देरी किए चौबीस घंटे के भीतर मामले के संबंध में बाल कल्याण समिति और विशेष न्यायालय को रिपोर्ट करेगी।
विशेष न्यायालय की स्थापना
क्र बालकों से संबंधित लैंगिक अपराधों का त्वरित विचारण हेतु वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त 16 सिविल जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं।

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