Monday, 24 October 2016

मानव अधिकार

मानव अधिकार:- ऐसे सभी अधिकार जो व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं, भारतीय संविधान के भाग-3 में मूलभूत अधिकारों के रूप में वर्णित है। इसके अतिरिक्त ऐसे अधिकार जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मान्यता प्रदान की गई है, उन्हें मानव अधिकार कहा गया है।
आयोग की स्थापना एवं उद्देश्य:- भारतीय संसद द्वारा पारित मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत 16 अप्रेैल 2001 को छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग का गठन किया गया है, जिसका मुख्यालय रायपुर में स्थित है। आयोग को मुख्यतः मानव अधिकारों के संरक्षण, प्रशासन व्यवस्था में सुधार आदि की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीड़ित व्यक्ति आयोग के माध्यम से अपने अधिकारों का संरक्षण कर सकता है।
आयोग में आवेदन की प्रकिया:- पीड़ित व्यक्ति निःशुल्क आवेदन, आयोग को संबोधित करते हुिए अपना हस्ताक्षर एवं पूर्ण पता लिखकर प्रेषित कर सकता है। आवेदक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर, डाक द्वारा अथवा इलेक्ट्रांनिक माध्यम से भी भेजा जा सकता है।
आयोग में आवेदन की सीमाएॅं:- सामान्यतः एक वर्ष से अधिक पुरानी घटना, न्यायालय में लंबित प्रकरणों, अस्पष्ट व ओछी शिकायत एवं आयोग के क्षेत्राधिकार के बाहर की शिकायतों पर विचार नही किया जायेगा।
आयोग के कार्य एवं गतिविधियॉं सामान्य प्रकरण, जिन पर आयोग द्वारा सुनवायई की जाती है:-
1. शासकीय सेवक द्वारा मानव अधिकार के हनन से 2. पुलिस अभिरक्षा में मृत्यु से संबंधित। 3. जेल अभिरक्षा में मृत्यु से संबंधित। 4. पुलिस/जेल अभिरक्षा में बलात्कार से संबंधित। 5. पुलिस प्रताड़ना की शिकायत से संबंधित। 6. पुलिस द्वारा कार्यवाही न करने से संबंधित। 7. अवैध रूप से रोके जाने से संबंधित। 8. रैगिंग से संबंधित। 9. नक्सलवादी घटनाओं की शिकायत से संबंधित। 10. टोनही प्रताड़ना से संबंधित। 11.बच्चों को प्रताड़ित करने से संबंधित। 12. बाल विवाह से संबंधित। 13. मानव अधिकारों के हनन से संबंधित प्रकरणों में स्वास्थ, शिक्षा, प्रदूषण, राजस्व, वन एवं शासन के अन्य विभागों से प्रतिवेदन आहुत करना एवं आवश्यक अनुशंसा तथा निर्देश जारी करना। 14. मानव का अवैध व्यापार (ट्रैफिकिंग) से संबंधित। 15. शैक्षणिक संस्थाओं में मानव अधिकार हनन के प्रकरण। 16. मानव अधिकारों से संबंधित अन्य शिकायतें।

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