Thursday, 27 October 2016

अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का उत्पीड़न रोकने संबंधी कानून

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न एवं छुआ-छूत निवारण) अधिनियम 1989
भारत की सामाजिक व्यवस्था में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों द्वारा अक्सर ज्यादतियां की जाती थी। उनके साथ छुआछूत एवं अन्य घिनौने कृत्य के कई उदाहरण देखे जाते थे। अतः भारत के संविधान में इन कृत्यों को अपराध की श्रेणी में लेकर उनके निवारण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (उत्पीड़न एवं छुआछूत निवारण) अधिनियम 1989 का सृजन किया गया है।
इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:-
उत्पीड़न के अपराध क्या हैं ?
धारा-3 के अंतर्गत यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, वह निम्नलिखित में से कोई कृत्य करता है तो वह उत्पीड़न के अपराध के लिए दंड का अधिकार है।
1. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य को किसी अखाद्य अथवा हानिकारक पदार्थ पीने या खाने के लिए बाध्य करता है।
2. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को क्षति पहुंचाने, अपमान करने, परेशान करने के आशय से उसके परिसर अथवा पड़ोस में मैला, कूड़ा, पशुओं की लाशें अथवा अन्य कोई हानिकारक पदार्थ एकत्रित करने का कार्य करता है।
3. अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के शरीर से बलपूर्वक कपड़े उतारता है या उसे नंगा घुमाता है या चेहरे व शरीर पर रंग लगाकर घुमाता है अथवा इसी प्रकार का अन्य कोई कार्य करता है जो प्रतिष्ठा के प्रतिकूल है।
4. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के सदस्य के स्वामित्व की या आबंटित भूमि को अथवा सक्षम अधिकारी द्वारा अधिसूचित भूमि को दोषपूर्ण ढंग से कब्जा कर लेता है या जोत लेता है या उसे आबंटित भूमि का दोषपूर्ण ढंग से हस्तांतरण करता है।
5. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अथवा परिसर से दोषपूर्ण तरीके से बेदखल करता है अथवा किसी भूमि परिसर अथवा पानी के अधिकारों के उपभोग में हस्तक्षेप करता है।
6. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को बेगारी करने के लिए या बंधुआ श्रम करने के लिए बाध्य करता है या फुसलाता है।
7. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरूद्ध झूठी, विद्वेशपूर्ण, उत्पीड़न बाद अथवा फौजदारी की अथवा अन्य कोई विधिक कार्यवाही करता है।
8. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लोगों को मत देने या नहीं देने से रोकता है।
9. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसी लोक सेवक को झूठी सूचना देता है और उसके द्वारा ऐसे लोक सेवक को विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य को क्षति अथवा परेशानी होती हे।
10. अजा एवं अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को लोक दृष्टि के अंतर्गत अपमानित करता है या अपमानित करने के आशय से डराता है।
11. किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिला पर शीलभंग करने या उसका निरादर करने के लिए बल प्रयोग करता है।
12. किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिला का शोषण करता है।
13. किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों द्वारा प्रयोग में लाने वाले जल स्रोतों को दूषित करता है।
14. किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य को लोक भ्रमण के रास्ते या स्थान का प्रयोग करने से रोकता है।
15. किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्य को अपना घर, गांव या निवास स्थान छोड़ने के लिए बाध्य करता है।
उत्पीड़न अपराध के लिए दण्ड की व्यवस्था
किसी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों का उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति को 6 महीने से 5 वर्ष तक की कारावास की सजा एवं जुर्माना हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के विरूद्ध जान-बूझकर कोई झूठा साक्ष्य देता है तो इस कृत्य के लिए भी कड़ी सजा का प्रावधान है। यदि कोई लोक सेवक इस अधिनियम के तहत अपेक्षित कर्तव्यों की जान-बूझकर उपेक्षा करता है तो उसे एक वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति आग या विस्फोटक पदार्थों से उक्त जाति के सदस्यों की संपत्ति की क्षति पहुंचाता है तो ऐसे अपराधियों के लिए कड़े दण्ड की व्यवस्था है।
आरोपी व्यक्तियों की संपत्ति की जप्ती -
यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के तहत दंडित होता है तो उस व्यक्ति की चल या अचल संपत्ति जो इस अपराध में प्रयोग की गई है, सरकार द्वारा उसे जप्त कर ली जाएगी।
निष्कासन:- 16.यदि किसी व्यक्ति के विरूद्ध संविधान के अनुच्छेद 244 के अंतर्गत घोशित अनुसूचित क्षेत्रों में अपराध को अंजाम देने के अपराध की संभावना विशेश न्यायालय में साबित होती है, तो न्यायालय द्वारा उस व्यक्ति को निश्कासित करने का आदेश दिया जा सकता है।
विषेश न्यायालय का गठन - अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के उत्पीड़न के अपराधों की सुनवाई हेतु सरकार द्वारा विशेष सत्र न्यायालय का गठन किया गया है, ऐसे अपराध की शिकायत थाने में या सीधे न्यायालय में की जा सकती है।
उत्पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता:- अजा/अजजा के उत्पीड़ित परिवारों को पुनर्वास एवं मुआवजे के रूप मे राज्य शासन द्वारा आर्थिक सहायता दी जाती है। 

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