Friday, 14 October 2016

भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान के तृतीय भाग में नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किया गया है, जिसे राज्य कदापि वापस नहीं ले सकता। ये अधिकार नागरिकों की स्वतंत्रता के रूप में हैं, जो निम्न प्रकार के हैं:-
विधि के समक्ष समानता (अनुच्छेद 14):
इस अनुच्छेद के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को विधि के समक्ष समान माना गया है तथा किसी भी व्यक्ति के प्रति विभेद नहीं रखा गया है।
धर्म, जाति, लिंग या जन्म के आधार पर भेदभाव का अंत (अनुच्छेद 15): 
इस अनुच्छेद द्वारा राज्य के किसी नागरिक को केवल उसके धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी प्रकार से किसी दुकान, सार्वजनिक भोजनालयों, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थान पर प्रवेश करने से या कुआं, तालाबों, स्नान घाटों, सड़कों पर प्रवेश करने या जाने से नहीं रोकेगा।
लोक नियोजन में समान अवसर (अनुच्छेद 16)
राज्य के अंतर्गत किसी भी पद पर नियुक्ति या नियोजन के संदर्भ में सभी नागरिकों को समान अवसर देने की गारंटी दी गई है। नियुक्ति के संदर्भ में किसी भी नागरिक के साथ धर्म, लिंग, संप्रदाय, स्थानीयता, जाति या जन्म स्थान को लेकर अंतर नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसके होते हुए भी राज्य पिछड़े हुए नागरिकों के किसी वर्ग के पक्ष में, जिनका प्रतिनिधित्व राज्य की राय में राज्य के अंतर्गत सेवाओं के लिए पर्याप्त नहीं है, नियुक्तियों या पदों के आरक्षण के लिए उपबंध कर सकती है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा (अनुच्छेद 19):
इसके अंतर्गत नागरिक को निम्नलिखित 6 प्रकार के स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है, लेकिन यह स्वतंत्रता स्वच्छंद या अनियंत्रित नहीं है तथा इनमें संविधान द्वारा दिए गए प्रावधान के अनुसार कानून बनाकर कटौती की जा सकती है, जो आम आदमी के हित तथा राज्य की सुरक्षा के लिए हो -
बोलने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
बिना अस्त्र के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने की स्वतंत्रता।
संघ या संगठन बनाने की स्वतंत्रता।
भारत के क्षेत्र में स्वतंत्रता पूर्वक घूमने की स्वतंत्रता।
भारत के किसी भी भाग में रहने या बसने की स्वतंत्रता।
किसी भी पेशा को अपनाने या कोई भी काम, व्यवसाय या व्यापार करने की स्वतंत्रता।
प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण (अनुच्छेद 21):
इस अनुच्छेद के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को मानवीय सम्मान तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ जीने का अधिकार प्रदान किया गया है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ किसी व्यक्ति के बिना किसी अवरोध के स्वतंत्रतापूर्वक घूमना या किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत जीवन के प्रति किसी भी प्रकार का अतिक्रमण नहीं करना, लेकिन इस अधिकार में भी कानून बनाकर कमी की जा सकती है।
शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21-क):
इस अनुच्छेद के द्वारा 6 वर्ष से 14 वर्ष की उम्र के प्रत्येक बच्चे को सरकार द्वारा निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार 6 वर्ष से 16 वर्ष की उम्र तक के बच्चे को शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार के रूप में प्रदान किया गया है।
बालकों को कारखाने में नियोजन का निषेध (अनुच्छेद-24)
इस अनुच्छेद के द्वारा 14 वर्ष से कम उम्र के बालक को कोई भी कठिन काम या कारखानों में नियोजित करने पर पाबंदी लगायी गई है।
धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से 28):
इन अनुच्छेदों के द्वारा किसी भी व्यक्ति अपने मनचाहे धर्म को मानने, पालन करने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता है तथा उसे धर्म के मामले में व्यवस्था करने की भी स्वतंत्रता है।
अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण (अनुच्छेद 29 से 30):
29. (1) नागरिकों को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।
(2) राज्य द्वारा पोषित या सहायता पाने वाली किसी शिक्षा संस्था में प्रवेश से किसी भी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, भाषा या इनमें से किसी के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा।
30. (1) धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रूचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।
(1क) खण्ड (1) में निर्दिष्ट किसी अल्पसंख्यक वर्ग द्वारा स्थापित और प्रशासित शिक्षा संस्था की संपत्ति के अनिवार्य अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधि बनाते समय, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसी संपत्ति के अर्जन के लिए ऐसी विधि द्वारा नियत या उसके अधीन अवधारित रकम इतनी हो कि उस खण्ड के अधीन प्रत्याभूत अधिकार निबंधित या निवारित न हो जाए।
(2) शिक्षा संस्थाओं को सहायता देने में राज्य इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि वह धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंध में है।
संवैधानिक प्रतिकार का अधिकार (अनुच्छेद 32 और 226)
इस अनुच्छेद के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों को लागू करवाने का प्रावधान किया गया है तथा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय को लागू करवाने का अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेरण आदेश संबंधी उचित रिट जारी करने का अधिकार उक्त न्यायालयों को दिया गया है।

No comments:
Write comments

Category

149 IPC 295 (a) IPC 302 IPC 304 IPC 354 (3) IPC 376 भा.द.सं. 399 IPC. 201 IPC 402 IPC 428 IPC 437 IPC 498 (a) IPC 66 IT Act Abhishek Vaishnav Ajay Sahu Arun Thakur Bail CGPSC Chaman Lal Sinha Civil Appeal D.K.Vaidya Dallirajhara H.K.Tiwari HIGH COURT OF CHHATTISGARH POCSO Ravi Sharma Ravindra Singh Ravishankar Singh Shayara Bano Temporary injunction Varsha Dongre अनिल पिल्लई आदेश-41 नियम-01 आनंद प्रकाश दीक्षित आयुध अधिनियम ऋषि कुमार बर्मन एस.के.फरहान एस.के.शर्मा कु.संघपुष्पा भतपहरी छ.ग.टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम छत्‍तीसगढ़ राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण जितेन्द्र कुमार जैन डी.एस.राजपूत दंतेवाड़ा दुर्ग न्‍यायालय नीलम चंद सांखला पंकज कुमार जैन पी. रविन्दर बाबू प्रशान्त बाजपेयी बृजेन्द्र कुमार शास्त्री भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मुकेश गुप्ता मोटर दुर्घटना दावा राजेश श्रीवास्तव रायपुर लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम श्री एम.के. खान संतोष वर्मा संतोष शर्मा सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू सरल कानूनी शिक्षा सुदर्शन महलवार स्थायी निषेधाज्ञा हरे कृष्ण तिवारी