Friday, 31 March 2017

एन्टी करप्शन ब्‍यूरो विरूद्ध माधव सिंह चन्देल

प्रकरण में उपलब्ध साक्ष्य एवं दस्तावेजां से यह स्पष्ट होता है कि अभियुक्त का, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 एवं धारा-13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) के तहत् आपराधिक अवचार का अपराध कारित करने का आपराधिक आशय था । विवेचना एवं विचारण की कार्यवाही में कुछ विसंगतियां दर्शित हुई हैं, किन्तु उक्त विसंगतियां तात्विक नहीं हैं । अभियोजन द्वारा आरोपित अपराध के आवश्यक तत्वों की पूर्ति किया गया है । इस प्रकार अभियोजन द्वारा आरोपित अपराध को सन्देह से परे प्रमाणित किया गया है । अतएव विचारणीय बिंदु क्रमांक-1 से 3 का निष्कर्ष ’’प्रमाणित’’ में दिया जाता है, अतः अभियुक्त को आरोपित अपराध, अंतर्गत धारा-7 एवं धारा-13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, में दोष-सिद्ध पाया जाता है । 


न्यायालय : विशेष न्यायाधीश (भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम), दुर्ग (छ.ग.) 
(पीठासीन अधिकारी : सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू) 
विशेष प्रकरण क्रमांक-03/2005 
संस्थित दिनांक : 24-09-2005 (सी.आई.एस.नं.102000000212005) 
छत्तीसगढ़ शासन, द्वारा : पुलिस अधीक्षक,
एन्टी करप्शन ब्‍यूरो, रायपुर (छ.ग.)                                                     ..... अभियोजन
।। विरूद्ध ।। 
माधव सिंह चन्देल आत्मज स्व0 नेपाल सिंह चन्देल,
वर्तमान उम्र करीब 49 वर्ष, तत्कालीन पटवारी,
प.ह.नं. 43, ग्राम सुरडुंग, रा.नि.मं.अहिवारा,
तहसील धमधा, जिला दुर्ग
वर्तमान पता : कैलाशनगर, कुम्हारी, जिला दुर्ग (छ.ग.)                               ..... अभियुक्त
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एन्टी करप्शन ब्यूरो, रायपुर द्वारा पंजीबद्ध अपराध क्रमांक-11/2003 से उद्भुत विशेष प्रकरण । 
------------------------------------------------ 
राज्य की ओर से सुश्री फरिहा अमीन, विशेष लोक अभियोजक । अभियुक्त की ओर से श्री विवेक शर्मा एवं श्री उपेन्द्र सिंह, अधिवक्तागण 
------------------------------------------------ 
।। निणर्य ।। 
(आज दिनांक 30-03-2017 का घोषित किया गया) 

Friday, 10 March 2017

भारत संघ द्वारा सी.बी.आई. विरूद्ध त्रिनाथ गौड

न्यायालय- स्पेशल जज ऑफ स्पेशल कोर्ट फॅार ट्रायल ऑफ सी.बी.आई केसेज) रायपुर (छ0ग0) 
(पीठासीन न्यायाधीश  - पंकज कुमार जैन) 

प्रकरण क्रमांक- CBI/70/2013 
अपराध क्र.- RC1242013A0001 
भारत संघ, द्वारा : सी.बी.आई.,
ए.सी.बी. ब्रांच भिलाई, जिला दुर्ग(छ0ग0)                     .............................. अभियोजन

// वि रू द्ध // 

त्रिनाथ गौड, पिता-स्व. मंगला गौड,उम्र-लगभग 64वर्ष, क्लर्क(ग्रेड-1)
कार्यालय- सबएरिया मैनेजर, 1 एस.ई.सी.एलडोमन हिल कॅालेरी चिरमिरी।
पता- औल्ड माइनर्स क्वार्टर, ओरिया स्कूल के पास, पोस्ट- गुडरीपारास,
जिला-कोरिया, छ.ग.
स्थाई पता- द्वारा श्री रामचंद्र गौड, ग्राम/पोस्ट/थाना- पुरूषोत्तमपुर,
अमाडिया साही, जिला-गुंजाम, उडीसा।                          ............................. अभियुक्त
----------------------------------------- 
एफ.आई.आर.की तारीख : 28.01.2013 अभियोग पत्र प्रस्तुति तारीख : 29.05.2013 
----------------------------------------- 
उपस्थिति
सी.बी.आई द्वारा लोक अभियोजक श्री अनिल पिल्लई । 
अभियुक्त की ओर से श्री प्रशान्त बाजपेयी अधिवक्ता । 
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नि र्ण य 
(आज दिनांक 31/01/2017 को घोषित) 


Sunday, 19 February 2017

छत्तीसगढ़ राज्य विरूद्ध प्रकाश साहू


धारा 306 भारतीय दंड संहिता के आरोप को सिद्ध करने के लिये यह प्रमाणित किया जाना आवश्यक है कि अभियुक्तगण व्दारा मृतिका के साथ इस सीमा तक क्रूरता एवं प्रताड़ना की गयी कि उसके पास जान देने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं था और ऐसी क्रूरता एवं मृत्यु के बीच अधिक अंतराल नहीं होना चाहिये।


न्यायालय- सत्र न्यायाधीश, दुर्ग, जिला-दुर्ग (छ.ग.) 
(पीठासीन न्यायाधीश- नीलम चंद सांखला) 
सत्र प्रकरण क्रमांक 72/2015 
संस्थित दिनांक 17.07.2015 
सी.आई.एस.नंबर 15000722015 
अभियोजन --------- छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से आरक्षी केन्द्र-सुपेला, जिला-दुर्ग विरूद्ध
अभियुक्तगण --------- (1) प्रकाश साहू आ. सुंदरलाल साहू, आयु-43 वर्ष, साकिन-मकान नंबर- 169, सुंदरनगर, भिलाई, थाना- सुपेला, जिला-दुर्ग (छ.ग.) (2) पूर्णानंद साहू आ. कृषलाल साहू, आयु-29 वर्ष,
साकिन-मोखला, थाना- लालबाग, जिला- राजनांदगॉंव (छ.ग.)
आरक्षी केन्द्र सुपेला, जिला-दुर्ग
अपराध क्रमांक 52/2015
अंतर्गत धारा धारा-306, धारा 304(ख) एवं 498(क) भारतीय दंड संहिता, 1860
गिरफ्तारी दिनांक 14.05.2015 एवं 20.05.2015
निर्णय दिनांक 10 फरवरी 2017
अधिनस्थ न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभियोग पत्र अभियोग पत्र प्रस्तुति दिनांक 25.06.2015 आपराधिक प्रकरण क्रमांक 4323/2015 उपार्पण आदेश दिनांक 10.07.2015
पैरवीकर्ता अधिवक्तागण : अभियोजन के लिये ............. श्री सुदर्शन महलवार, लोक अभियोजक। अभियुक्तगण के लिये ........ श्री पी. रविन्दर बाबू, अधिवक्ता। प्रार्थीगण के लिये ............. श्री एम.के. खान, अधिवक्ता
।। निर्णय ।। 
( आज दिनांक 10 फरवरी 2017 को घोषित)

Wednesday, 8 February 2017

छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ध शिवप्रसाद धृतलहरे (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)


अभियोजन यह संदेह से प्रमाणित करने में असफल रहा है कि आरोपी शिवप्रसाद धृतलहरे ने दिनांक 03.09.2008 को तथा उसके पूर्व छात्रावास अधीक्षक, अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, सिद्धार्थ चौक, टिकरापारा रायपुर में लोक सेवक के पद पर पदस्थ रहते है, प्रार्थी संजय कुमार बांधे से उसका छात्रावास में चयन करवाने हेतु उससे रूपये 1500/- रिश्वत की मांग की और 600/- रूपये प्राप्त किया, जो वैध पारिश्रमिक से भिन्न था और ऐसा करके आरोपी ने अपने पद का दुरूपयोग कर अपराधिक अवचार/कदाचार किया, इसलिए आरोपी शिवप्रसाद धृतलहरे को धारा 7 एवं 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध से दोषमुक्त किया जाता है।
न्यायालय :- विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) 
एवं प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रायपुर (छ0ग0) 
(पीठासीन न्यायाधीश - जितेन्द्र कुमार जैन) 
विशेष दाण्डिक प्रकरण क्रमांक- 07/2010 
सी.आई.एस. नंबर करप्शन केस/89/2010 
संस्थित दिनांक-06.09.2010 
छत्तीसगढ़ शासन,
द्वारा-आरक्षी केन्द्र, एंटी करप्‍शन ब्यूरो, रायपुर (छ0ग0)                                   -- अभियोजन
 // वि रू द्ध // 
शिवप्रसाद धृतलहरे उम्र 61 वर्ष
पिता स्व0 श्री जुड़ावन धृतलहरे
पेशा छात्रावास अधीक्षक, मूल पद शिक्षक
 साकिन-ग्राम व पोस्ट अमेरा, थाना पलारी,
जिला बलौदाबाजार (छ0ग0)                                                                               -- आरोपी
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अभियोजन व्दारा श्री योगेन्द्र ताम्रकार विशेष लोक अभियोजक। 
आरोपी व्दारा श्री एस0के0फरहान अधिवक्ता ।
 ----------------------------------------------- 
// निर्णय // 
( आज दिनांक-31, माह-जनवरी, सन् 2017 ई0 को घोषित )

Saturday, 4 February 2017

Mukesh Gupta Versus State Of Chhattisgarh


लगातार अपमानजनक खबरों के संदर्भ में आईपीएस अधिकारी मुकेश गुप्ता की याचिका पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला दिया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एकलपीठ ने जारी अपने आदेश में कहा है कि ऐसे किसी समाचार का प्रकाशन नहीं करें, जिसमें याचिकाकर्ता की निजता का हनन होता है। प्रदेश के एण्टी करप्शन ब्यूराे के एडीजी मुकेश गुप्ता बनाम छत्तीसगढ़ शासन व अन्य के परिवाद पर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया है कि एक पत्रिका में उनकी निजता संबंधी समाचार का लगातार प्रकाशन किया जा रहा है। साथ ही पत्रिका के मालिक व रिपोर्टर उन्हें इससे भी ज्यादा भद्दे समाचार के प्रकाशन की धमकी दे रहे हैं। इससे उनकी निजता के 8शेष पेज 07 पर अधिकार का हनन हो रहा है। इस मामले में श्री गुप्ता की ओर से पत्रिका के प्रकाशक को नोटिस भी दिया गया था, लेकिन 5 दिसंबर को मियाद समाप्त होने के बाद भी जवाब नहीं दिया गया। तब उन्होंने अदालत का सहारा लिया। एक घंटे से ज्यादा चली सुनवाई के दौरान श्री गुप्ता की ओर से देश के ख्याति प्राप्त वकील महेश जेठमलानी, राजीव श्रीवास्तव, मलय श्रीवास्तव व चित्रया पवार ने पक्ष रखा। वहीं सरकार की आेर से आशुतोष कछवाहा ने पक्ष रखा। अदालत में बताया गया कि निजता के हनन के कुछ मामले में दिल्ली हाईकोर्ट भी रोक लगा चुका है। इसके बाद जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता मुकेश गुप्ता की निजता संबंधी समाचार के प्रकाशन पर आगामी आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। साथ ही नोटिस जारी कर पत्रिका के स्वामी से 8 सप्ताह के भीतर जवाब-तलब किया है।



HIGH COURT OF CHHATTISGARH, BILASPUR

WPC No.252 of 2017
Mukesh Gupta Versus State Of Chhattisgarh 
03/02/2017

Shri Mahesh Jethmalani, Senior counsel with Shri Rajeev Shrivastava, Shri Malay Shrivastava, Shri Gagan Tiwari, Shri Amin Khan and Ms. Chaitra Pawar, counsel for the petitioner.
Shri A. S. Kachhawaha, Addl. AG for the State.
Heard.
Petitioner is a senior officer in the Department of Home, Government of Chhattisgarh. This writ petition has been preferred for a direction to restrain the respondents, particularly the respondent Nos.2 & 3 from publishing any article offending the petitioner by making personal allegations invading his right to privacy guaranteed under Article 21 of the Constitution of India and the right of privacy of his daughter, aged about 16 years, as well. Referring to the judgment of the Supreme Court in the matter of Binny Limited and Another Vs. V. Sadasivan and Others {(2005) 6 SCC 657} and the judgment of Delhi High Court in the matter of ABC vs Commissioner of Police and others {WPC No.12730/2005, decided on 5.2.2013} and that of the judgment of the Supreme Court of United Kingdom in the matter of PJS vs News Group Newspapers Limited, [2016] UKSC 26, Shri Jethmalani, learned Senior counsel would argue that respondent No.3 receives financial assistance from the Government to carry out her media operations by publishing monthly magazine 'Jagat Vision', therefore, she owes a public duty to publish truthful or correct publication to discharge the public function. If a publisher like the respondent Nos.2 & 3 publishes any scurrilous or defamatory article invading any individual's private life, it can no longer be provided financial assistance.

Shri Jethmalani would further argue that under the United Nations Convention to the rights of child, the paramount object of all public action should be to protect the right of children, therefore, any future publication by the magazine, of which the respondent No.3 is the publisher, will offend the petitioner's right under Article 21 of the Constitution of India as well as the right of privacy of his daughter.
Having heard Shri Jethmalani at length and upon perusal of papers and the judgments, I am convinced that respondent Nos.2 & 3 are discharging the public function, therefore, they owe a public duty to publish only true and correct facts in any news or article in relation to any individual or organization, but not to publish any scurrilous or defamatory article.
Issue notice to the respondents.
Shri Kachhawaha, learned Additional Advocate General would accept notice for respondent No.1.
Process fee for service of notice be paid for respondent Nos.2 & 3 only.
Notices be made returnable within 8 weeks.
In the meanwhile, respondent Nos.2 & 3 are restrained from publishing any unsubstantiated, scurrilous or defamatory article in printed or electronic form concerning the petitioner, which may tend to invade his right to privacy or the privacy of his daughter.
Certified copy today.
 Sd/-
Judge
Prashant Kumar Mishra

Tuesday, 31 January 2017

छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ध गणेशलाल मेश्राम (भ्रष्‍ट्राचार निवारण अधिनियम)

उभय-पक्ष के निवेदन पर विचार करते हुये धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अपराध में अभियुक्त का एक वर्ष के कठोर कारावास और 1,000/-(एक हजार) रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है। अर्थदण्ड नहीं पटाने की दशा में एक माह का कठोर कारावास की सजा पृथक् से भुगताया जावे। अभियुक्त को धारा-13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत् दो वर्ष के कठोर कारावास और 2,000/-(दो हजार) रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है एवं अर्थदण्ड नहीं पटाने की दशा में दो माह का कठोर कारावास की सजा पृथक् से भुगतायी जावे। अभियुक्त को दी गई दोनां सश्रम कारावास की सजाएं साथ-साथ भुगतायी जावे।

न्यायालय : विशेष न्यायाधीश (भ्रष्‍ट्राचार निवारण अधिनियम), दुर्ग 
(पीठासीन अधिकारी : सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू)  
विशेष प्रकरण क्रमांक-04/2006
संस्थित दिनांक : 08-05-2006 
छत्तीसगढ़ शासन, 
द्वारा : पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन व्‍यूरो, रायपुर (छ0ग0)           ..... अभियोजन 
।। विरूद्ध।। 
गणेशलाल मेश्राम पिता स्‍व.मोहनलाल मेश्राम उम्र 35 साल, 
निवासी : गजानन नगर, दुर्ग थाना मोहन नगर, दुर्ग, 
तहसील व जिला दुर्ग 
हाल- सहायक ग्रेड-2, खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, 
दुर्ग, जिला दुर्ग (छ0ग0)                                                                   ..... अभियुक्त 
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एन्टी करप्शन ब्यूरो, रायपुर द्वारा पंजीबद्ध अपराध क्रमांक-22/2005 से उद्भुत विशेष प्रकरण। 
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राज्य की ओर से सुश्री फरिहा अमीन, विशेष लाक अभियोजक। अभियुक्त की ओर से श्री एस.के.फरहान, अधिवक्ता। 
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।। निणर्य।। 
(आज दिनांक 28-01-2017 का घोषित किया गया) 
1- अभियुक्त के विरूद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-7, 13(1)(डी) सहपठित धारा-13(2) के अंतर्गत यह आरोप है कि उसने दिनांक 25-05-2005 के पूर्व छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, दुर्ग, जिला दुर्ग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर, जो कि लोक-सेवक का पद है, पदस्थ रहते हुए प्रार्थी राजू राजपूत, जो कि जवाहर नगर, दुर्ग में ब्राईट 2  मंदबुद्धि विद्यालय का संचालन करता है और जहां के अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रा को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, दुर्ग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृत्ति के लिये 6,750/-रुपये का चेक जारी किया गया था, जिसे प्रार्थी को देने में लाक-सेवक की पदीय हैसियत में शासकीय कार्य के सम्पादन हेतु वैध पारिश्रमिक से भिन्न 2,000/-रुपये रिश्वत की मांग किया तथा दिनांक 25-05-2005 का प्रातः 8. 00 बजे 2,000/-रुपये रिश्वत के रूप में प्राप्त किया। 


Thursday, 26 January 2017

रमेश कुमार गुप्ता विरूद्ध कैलाश गुप्ता

वादी को स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होना होता है। वह दूसरे की कमजोरी का लाभ नहीं उठा सकता। विधि का यह सुस्थापित सिद्धांत है कि-‘‘जो दस्तावेज जिसके आधिपत्य में है, उसी से उसको प्रस्तुत किये जाने या उसे प्रस्तुत करवाने की अपेक्षा की जाती है।’’ मूल दस्तावेज के प्रगटीकरण कराये जाने के संबंध में व्यवहार प्रक्रिया संहिता में दिये गये प्रावधान का बिना अवलम्ब लेकर और मात्र फोटोकॉपी दस्तावेज के आधार पर वादी वसीयतनामा को शून्य व अवैध घोषित करा पाने का अधिकारी नहीं है।

न्यायालय षष्ठम अपर जिला न्यायाधीश, दुर्ग, जिला दुर्ग (छ.ग.) 
(पीठासीन अधिकारी-कु. संघपुष्पा भतपहरी) 
CIS No.-00030/2016 
व्यवहार अपील क्र.-30ए/2016 
संस्थापित दिनांक-13/06/2016 
01.. रमेश कुमार गुप्ता पिता स्व. हरीप्रसाद गुप्ता, उम्र-61 वर्ष,
निवासी-बैगापारा, गोवर्धन चौक के पास, दुर्ग (छ.ग.)
02.. महेश कुमार गुप्ता आ. स्व. हरीप्रसाद गुप्ता, उम्र-59 वर्ष,
निवासी-गयानगर, दुर्ग (छ.ग.)
03.. ओंकार प्रसाद गुप्ता पिता स्व. हरीप्रसाद गुप्ता, 56 वर्ष,
04.. गोविन्द्र प्रसाद गुप्ता आ. स्व. हरीप्रसाद गुप्ता, उम्र-52 वर्ष,
हाउसिंग बोर्ड, ढांचा भवन, कुरूद, भिलाई, थाना-जामुल,
तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.)                                    ............................अपीलार्थीगण/वादीगण
।। विरूद्ध ।। 
01.. कैलाश गुप्ता पिता स्व. हरीप्रसाद गुप्ता उम्र-48 वर्ष,
निवासी-कांग्रेस भवन के पास, गवली पारा, दुर्ग, तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.)
02.. श्रीमती विमला गुप्ता पत्नि श्री घनश्याम गुप्ता, उम्र-58 साल,
निवासी-बर्तन व्यापारी, पुराना बस स्टेण्ड के पास, अर्जुन्दा
थाना-अर्जुन्दा, तहसील-गुण्डरदेही, जिला-बालोद (छ.ग.)
03.. त्रियुगीनारायण गुप्ता पिता नामालूम, उम्र-65 वर्ष,
निवासी-कांग्रेस भवन के सामने, गवली पारा, दुर्ग,
तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.)
04.. श्रीमती गीता गुप्ता ध.प.मूलचंंद गुप्ता, उम्र-57 वर्ष,
निवासी-किराना व्यापारी, नवेगांव बांध, तहसील-साकोली,
जिला-गांदिया, महाराष्ट्र
05.. श्रीमती शैल कुमारी ध.प.कैलाश चंद्र गुप्ता, उम्र-54 वर्ष,
निवासी-श्रीराम किराना स्टोर्स, गांधी चौक के पास, अहेरी,
जिला-चिरौली, महाराष्ट्र                                   ..................................उत्तरवादीगण /प्रतिवादीगण

Sunday, 8 January 2017

गोपाल तुलसी दास राठी विरूद्ध डॉ. श्रीमती अनुपमा अश्विन देशमुख

संविदा पूर्ण करने में यदि वादी अपने दायित्व के निर्वहन में स्वयं ही चूूक करता है व प्रतिवादी की सूचना पर भी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करता। साम्या उसके पक्ष में निर्धारित नहीं हो सकती जो स्वयं चुूूक व विलम्ब के लिये उत्तरदायी हों।
न्यायालय षष्ठम अपर जिला न्यायाधीश, दुर्ग, जिला दुर्ग(छ.ग.) 
(पीठासीन अधिकारी- कु.संघपुष्पा भतपहरी) 
CSA 0000041/2015 
व्यवहार वाद क्र.-41ए/2015 
संस्थापित दिनांक-13/04/2015 
गोपाल तुलसीदास राठी आ. श्री तुलसीदास ताराचंंद राठी, 
उम्र लगभग-51 वर्ष,  पेशा - व्यवसाय, 
पता-नीलगिरी, कैम्प रोड, अमरावती (महाराष्ट्र)                   .................................वादी 
।। विरूद्ध ।। 
01.. डॉ. श्रीमती अनुपमा अश्विन देशमुख, पति श्री अश्विन देशमुख, 
उम्र लगभग-48 वर्ष 
पता-सुधा देशमुख अस्पताल के पास, 
केम्प रोड, अमरावती (महाराष्ट) पिन-444602 
02.. डॉ. अजय अग्रवाल पिता स्व. श्री कपिल नारायण, 
उम्र लगभग-52 वर्ष, 
पता - डॉ अग्रवाल भवन, मेडिकल चौक, 
नागपुर (महाराष्ट्र) 
03.. छ.ग. शासन, 
द्वारा-जिलाधीश, जिला कार्यालय दुर्ग (छ.ग.)                    ...............प्रतिवादीगण 

Tuesday, 3 January 2017

छ.ग.राज्य विरूद्ध मंतराम निषाद

आरोपी के विरूद्घ प्रथम दृष्टया मामला पाये जाने पर अन्तर्गत धारा 07 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं धारा 13(1)(डी)सहपठित धारा 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप विरचित किया गया आरोपी का अभिवाक लिया गया, आरोपी के द्वारा अपराध अस्वीकार किया गया

न्यायालय:-विशेष न्यायाधीश (ए.सी.बी.)एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, बलौदाबाजार,छग. 
(पीठासीन अधिकारी -बृजेन्द्र कुमार शास्त्री) 
विशेष सत्र प्रक्ररण क्रमांक 02/2015 
संस्थित दिनांक-07-05-2015 
छ.ग.राज्य
द्वारा राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर, (छ.ग.) - - - - - अभियोजन
/ वि रू द्ध / 
 मंतराम निषाद पिता स्व० महेत्तर निषाद,  उम्र 48 वर्ष
पटवारी हल्का नम्बर-12,
ग्राम-चंदेरी,तहसील सिमगा
जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)                                          - - -- - - - -- - --अभियुक्त
 राज्य द्वारा श्री अमिय अग्रवाल अतिरिक्त लोक अभियोजक।
 आरोपी की ओर से श्री अनादिशंकर मिश्रा अधिवक्ता उपस्थित।

 / नि र्ण य / 
(आज दिनांक 04 /नवम्बर/2016 को घोषित) 

Monday, 2 January 2017

विशेष दाण्डिक प्रकरण छत्तीसगढ शासन विरूद्ध डी.के.दीवान

प्रकरण की परिस्थितियों के अनुसार आरोपी द्वारा वरिष्ठ शासकीय अधिकारी होते हुए करोडों रूपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किया है, इसलिए आरोपी के लिये नरमी बरता जाना उचित नहीं है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं छ0ग0 उच्च न्यायालय ने अपने अनेकों न्याय-सिद्धांतों में आरोपी द्वारा किये गये अपराध के आधार पर उसका दंड निर्धारित किये जाने की व्यवस्था दी है, धारा-16 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय द्वारा अर्थदण्ड की राशि निर्धारित करते समय अनुपातहीन संपत्ति की राशि का ध्यान रखेगा, प्रकरण की उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी दिलीप कुमार दीवान को निम्नलिखित दंडादेश दिया जाता है । भारतीय दण्ड विधान की धारा 467, 468, 471, 420, 200, 201 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 1301)(ई) सहपठित 130) के तहत....  



Sunday, 1 January 2017

विशेष दांडिक प्रक्ररण भ्रष्टाचार निवा.अधि. : छ.ग.राज्य विरूद्ध रोहित कुमार देवांगन



अभियोजन का मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि, प्रार्थिया कुमारी परमेश्वरी पैकरा ने ए.सी.बी.कार्यालय रायपुर में उपस्थित होकर पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन ब्युरो रायपुर के समक्ष इस आशय का लिखित आवेदन प्रस्तुत की थी कि उसकी नियुक्ति जनपद पंचायत बिलाईगढ में शिक्षाकर्मी वर्ग 03 के पद पर नियुक्त हुई है,आर०के० देवांगन बी.ई.ओ. बिलाईगढ ने कतर्व्य स्थल एवं वेतन निकालने के लिए 5000/-(पॉच हजार रूपये) रिश्वत की मांग कर रहा है,उक्त शिकायत पर एस॰०पी० के द्वारा कार्यवाही किये जाने हेतु निरीक्षक सहदेव ठाकुर को निर्देशित किया जिस पर निरीक्षक सहदेव ठाकुर के द्वारा प्रार्थिया से चर्चा के पश्चात आरोपी द्वारा लेनदेन की बात रिकार्ड करने हेतु एक वायंस रिकार्डर प्रदान किया उस वायस रिकार्डर में प्रार्थिया ने आरोपी से लेनदेन की बात कर वापस कर निरीक्षक को सूचित किया जिस पर ए०सी०बी० कार्यालय के द्वारा विधिवत ट्रेप दल का गठन कर आरोपी रोहित कुमार देवांगन के विरूद्घ कार्यवाही किये जाने हेतु अग्रसर हुए और दिनांक 19.02.2008 को आरोपी से प्रार्थिया परमेश्वरी पैकरा से रिश्वत लेते रंगे हाथ पकडा उसके पश्चात कार्यवाही पूर्ण कर विधि एवं विधायी कार्य विभाग कार्यालय रायपुर से आरोपी के विरूद्घ अभियोजन की स्वीकृति आदेश प्राप्त कर अभियोगपत्र न्यायायलय के समक्ष प्रस्तुत किया ।

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149 IPC 295 (a) IPC 302 IPC 304 IPC 354 (3) IPC 376 भा.द.सं. 399 IPC. 201 IPC 402 IPC 428 IPC 437 IPC 498 (a) IPC 66 IT Act Abhishek Vaishnav Ajay Sahu Arun Thakur Bail CGPSC Chaman Lal Sinha Civil Appeal D.K.Vaidya Dallirajhara H.K.Tiwari HIGH COURT OF CHHATTISGARH POCSO Ravi Sharma Ravindra Singh Ravishankar Singh Temporary injunction Varsha Dongre अनिल पिल्लई आदेश-41 नियम-01 आनंद प्रकाश दीक्षित आयुध अधिनियम ऋषि कुमार बर्मन एस.के.फरहान एस.के.शर्मा कु.संघपुष्पा भतपहरी छ.ग.टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम छत्‍तीसगढ़ राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण जितेन्द्र कुमार जैन डी.एस.राजपूत दंतेवाड़ा दुर्ग न्‍यायालय नीलम चंद सांखला पंकज कुमार जैन पी. रविन्दर बाबू प्रशान्त बाजपेयी बृजेन्द्र कुमार शास्त्री भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मुकेश गुप्ता मोटर दुर्घटना दावा राजेश श्रीवास्तव रायपुर लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम श्री एम.के. खान संतोष वर्मा संतोष शर्मा सत्‍येन्‍द्र कुमार साहू सरल कानूनी शिक्षा सुदर्शन महलवार स्थायी निषेधाज्ञा हरे कृष्ण तिवारी