Monday, 2 January 2017

विशेष दाण्डिक प्रकरण छत्तीसगढ शासन विरूद्ध डी.के.दीवान

प्रकरण की परिस्थितियों के अनुसार आरोपी द्वारा वरिष्ठ शासकीय अधिकारी होते हुए करोडों रूपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किया है, इसलिए आरोपी के लिये नरमी बरता जाना उचित नहीं है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं छ0ग0 उच्च न्यायालय ने अपने अनेकों न्याय-सिद्धांतों में आरोपी द्वारा किये गये अपराध के आधार पर उसका दंड निर्धारित किये जाने की व्यवस्था दी है, धारा-16 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय द्वारा अर्थदण्ड की राशि निर्धारित करते समय अनुपातहीन संपत्ति की राशि का ध्यान रखेगा, प्रकरण की उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी दिलीप कुमार दीवान को निम्नलिखित दंडादेश दिया जाता है । भारतीय दण्ड विधान की धारा 467, 468, 471, 420, 200, 201 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 1301)(ई) सहपठित 130) के तहत....  



प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रायपुर (छ0ग0) 
(पीठासीन न्यायाधीश -- जितेन्द्र कुमार जैन)
विशेष दाण्डिक प्रकरण कमांक- 812 /2015
सी.आई.एस. नंबर करप्शन केस / 08 /2015
संस्थित दिनांक-02.07.2015

छत्तीसगढ शासन,
द्वारा-आरक्षी केन्द्र, एंटी करप्शन ब्यूरो, रायपुर (छ0ग0)                         --- अभियोजन
/ /  वि रू द्ध / /
डी.के.दीवान उर्फ दिलीप कुमार दीवान, उम्र 50 वर्ष,
पिता स्व. श्री बी0एएस0दीवान,
निवासी- बी,/17, ड्रीम होम्स,
चौहान हाउसिंग प्रा0लिमि0 जुनवानी,
भिलाई, जिला दुर्ग छ0ग0                                                                            -- आरोपी
शासन द्वारा श्री योगेन्द्र ताम्रकार विशेष लोक अभियोजक उपस्थित ।
आरोपी द्वारा श्री संजय शर्मा अधिवक्ता उपस्थित ।

 / / निर्णय / /
(आज दिनांक 22 नवंबर 2016 को घोषित किया गया) 
1. आरोपी के विरूद्ध भारतीय दण्ड विधान की धारा 467, 468, 471, 420, 200, 201 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 1301)(ई) सहपठित 130) के तहत आरोप है कि आरोपी ने शासकीय नियोजन मेंछ0ग0 गृह निर्माण मंडल मुख्यालय शंकर नगर रायपुर (जिसे आगे मंडल कहा गया है) में बतौर लोकसेवक उपायुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए आलोच्य अवधि 1 अप्रेल 2004 से 15.11.2014 के दौरान स्वयं, अपनी पत्नी तथा नाबालिक पुत्र-पुत्री के नाम पर कृषि भूमि एवं मकान आदि संपत्तियां कय की परंतु सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत इसकी सम्यक सूचना अपने विभाग को नहीं दी तथा बाद में उक्त चूक का आभास होने पर अपने कार्यालय के 2आवक-जावक लिपिक श्रीराम चौहान को अपने प्रभाव में लेकर कयशुदा संपत्तियों की सूचना अपने विभाग को कय अवधि में दिये जाने संबंधी दस्तावेज तैयार कर कूटरचना की और यह जानते हुए कि उक्त दस्तावेजों का उपयोग असल के रूप में किया जायेगा कूटरचित दस्तावेज तैयार किया एवं उनका उपयोग असल दस्तावेज के रूप में किया, कयशुदा अवधि के कूटरचित दस्तावेज लिपिक श्रीराम चौहान को देकर उनकी पावती प्राप्त कर छल किया तथा मिथ्या दस्तावेज विभाग में प्रस्तुत कर साक्ष्य का विलोपन किया तथा उसने शासकीय नियोजन में छ0ग0हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय शंकर नगर रायपुर में बतौर लोकसेवक उपायुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए आलोच्य अवधि 1 अप्रेल 2004 से 15. 11.2014 के दौरान स्वयं एवं अपने परिवार की आय के ज्ञात स्रोतों से उपार्जित आय से अधिक रूपये 7,73,51,876/- मूल्य की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की तथा उक्त संपत्ति अपने आधिपत्य में रखकर पद का दुरूपयोग कर आपराधिक कदाचरण किया । 
2. प्रकरण में यह अविवादित है कि आलोच्य अवधि में आरोपी छ0ग0 राज्य गृह निर्माण मंडल के रायपुर स्थित मुख्य कार्यालय में उपायुक्त के पद पर पदस्थ था, श्रीराम चौहान एवं छबलू ठाकुर छ0ग0 गृह निर्माण मण्डल, कार्यालय शंकर नगर रायपुर में भृत्य के पद पर पदस्थ हैं, आरोपी के घर में दिनांक 15.11.2014 को एसीबी द्वारा तलाशी ली गयी थी, आरोपी द्वारा एचआईजी 1,135 सेक्टर 1 कबीर नगर रायपुर स्थित मकान को अपने पुत्र करण के पक्ष में दान पत्र3 प्र०पी029 द्वारा दान किया गया था, आरोपी द्वारा मंडल दुर्ग से विकय पत्र प्र०पी031 द्वारा एचआईजी 2358 इंडस्ट्रियल स्टेट भिलाई को कय किया गया था, आरोपी के पिता द्वारा विभिन्न योजनाओं में पैसा जमा किया जाता था तथा कृषि आय भी होती थी, कृषिभूमि दो फसली थी एवं उसे संयुक्त रूप से रखते थे, ढारत सिंह दीवान से ऋण पुस्तिका आर्टिकल ए--11 से ए--16 जब्ती पत्र प्र०पी03 के माध्यम से जब्त की गयी थी, नोमलता एवं करण का आयकर विवरण रतन भट्टर सीए द्वारा भरा जाता था । 
3. अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि आरोपी की प्रथम नियुक्ति छ0ग0 राज्य हाउसिंग बोर्ड के सहायक यंत्री (सिविल) के पद पर दिनांक 23.04.1990 को इंदौर के संभाग क04 में हुई थी, फिर आरोपी जगदलपुर, सागर, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर में पदस्थ रहा, रायपुर मुख्यालय में दिनांक 01.12.2012 से दिनांक 30.11.2014 तक पदस्थ रहा, आरोपी छ0ग0 राज्य हाउसिंग बोर्ड के रायपुर कार्यालय में उपायुक्त के पद पर पदस्थ था, तब आरोपी के संबंध में एसीबी को सूचना प्राप्त हुई कि म0प्र0 तथा छ0ग0 में अपनी पदस्थापना के दौरान आरोपी ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक चल-अचल संपत्ति अपने नाम से, अपनी पत्नी, नाबालिक पुत्री तथा नाबालिग पुत्र के नाम से अर्जित की गयी है, उक्त सूचना की तसदीक बाद पाया गया कि आरोपी एवं उसके परिवार के सदस्यों के नाम से कई करोड की अनुपातहीन संपत्ति होना पाया गया, तत्पश्चात दिनांक 14.11.2014 को उप पुलिस अधीक्षक4डी0एस0नेगी द्वारा बिना नंबरी प्रथम सूचना पत्र दर्ज कर और आरोपी के निवासी फ्लैट नंबर बी /17, चौहान हाउसिंग लिमिटेड जुनवानी भिलाई की तलाशी के लिए उप पुलिस अधीक्षक डी0एस0नेगी, आरोपी के पैतृक ग्राम लहरौद तहसील पिथौरा, जिला महासमुंद की तलाशी के लिए उप पुलिस अधीक्षक लोचन पांडे ईओडब्लू रायपुर, छ0ग0हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय शंकर नगर रायपुर की तलाशी के लिए उप पुलिस अधीक्षक डी0एस0॰पैकरा के नाम पर इस विशेष न्यायालय से तलाशी वांरट प्राप्त किया । 


4. प्रकरण की विवेचना के लिए उक्त तीनों अधिकारियों को अति0पु0महानिदेशक ईओडब्लू / एसीबी रायपुर द्वारा अधिकृत कर आदेश पत्र दिया गया, उक्त तीनों स्थानों पर उपरोक्त तीनों अधिकारियों के द्वारा तलाशी एवं जब्ती कार्यवाही की गई, जिसमें प्रथमदृष्ट्या 05 करोड से अधिक की चल-अचल संपत्ति होना पाया गया,विभिन्न अचल संपत्ति कय करने के दस्तावेज, बैंक एवं बीमा के दस्तावेज प्राप्त हुए, जिसके संबंध में इन्वेंटी, जब्ती पत्र बनाया गया, ज्वेलर को बुलाकर आभूषणों की जांच करवायी गयी, विभिन्न बैंकों के लाकरों की चाबी मिली एवं अन्य दस्तावेज तैयार किये गये। 
5. उप पुलिस अधीक्षक डी0एस0नेगी द्वारा आरोपी के मोवा स्थित देना बैक लाकर से 05 लाख भारतीय रूपयों के अलावा विदेशी नोट 62 नग, जिसमें 100 यूएस डालर के 11 नोट, यूरो के चार नोट तथा अन्य देशों की मुद्रा एवं सिक्के भी बरामद क्स5 जब्त किये गये, बैंक आफ बडोदा शाखा पंडरी रायपुर के लाकर में रजिस्टी बयनामा की प्रतियां, केनरा बैंक भिलाई के लोकर को खोलने पर उसमें पासबुक, सोने चांदी के जेवरात मिले, जिन्हें गवाहों के समक्ष जब्त किया गया, ज्वेलर को बुलाकर जेवरात की जांच करायी गयी, विभिन्न बेंकों एवं बीमा कंपनी से आरोपी एवं उसके परिवार के खातों एवं पालिसी के निवेश के संबंध में जानकारी प्राप्त की गयी, आरोपी के घरों में प्राप्त वाहन, अचल संपत्ति के दस्तावेज के संबंध में संबंधित व्यक्तियों एवं विभाग से जानकारी प्राप्त की गयी। 
6. विवेचक डीएस नेगी के द्वारा दिनांक 17.11.14 को बिना नंबरी नालिशी पर से अपराध कमांक 50/2014 धारा 130)(ई), 1302) भ्रष्टा0निवा0अधि0 1988 के तहत कायम कर प्रकरण में विवेचना में लिया गया तथा सेवा पुस्तिका एवं चल-अचल संपत्ति के कय-विकय के संबंध में विभाग को दी गयी सूचना, इनकम टैक्स आदि की जानकारी प्राप्त की गयी, आरोपी के यहां छापा पडने के बाद उसके द्वारा अपने द्वारा कय की गयी संपत्ति की जानकारी पिछली तिथि का अवैध दस्तावेज की कूट रचना की उसे अपने अधीनस्थ मंडल के भृत्य छबलू को मंडल कार्यालय में भेजकर अन्य आवक-जांवक के भृत्य श्रीराम चौहान से पिछली तिथि में पावती एक प्रति देकर छल किया, आरोपी से आय-व्यय विवरण पत्रक प्राप्त किया गया, जिसमें भी आरोपी द्वारा अवैध रूप से तैयार किये गये उक्त दस्तावेजों की प्रतियां प्रस्तुत की गयी । 
7. अन्वेषण में गवाहों, आरोपी के बयान लिये गये, आरोपी के आधिपत्य में पायी गयी संपूर्ण संपत्ति, आय एवं व्यय के संबंध में आरोपी समाधानप्रद स्पष्टीकरण देने में असमर्थ रहा, आय-व्यय की संपूर्ण गणना पश्चात पाया गया कि आरोपी के द्वारा आलोच्य अवधि में आय की तुलना में 479% व्यय किया गया और उसके आधिपत्य में 379% अनुपातहीन संपत्ति पायी गयी, आरोपी को गिरफ्तार किया गया, आयुक्त छ0ग0 गृह निर्माण मण्डल मुख्यालय रायपुर से आरोपी के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर अन्य अन्वेषण की कार्यवाहियां पूर्ण कर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। 
8. आरोपी को धारा 13(1)(ई) सहपठित 1302) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं धारा 467, 468, 471, 420, 200, 201 भा0द0वि0 के तहत आरोप विरचित कर पढकर सुनाये, समझाये जाने पर उसने अपराध करना अस्वीकार किया तथा विचारण का दावा किया, अभियोजन की ओर से कुल 43 साक्षियों का कथन करवाया गया है, विचारण उपरांत धारा-313 दण्ड प्रकिया संहिता के तहत अभिलिखित किये गये अभियुक्त कथन में आरापी ने स्वयं को निर्दोष होना तथा झूठा फंसाया जाना बताते हुए कथन किया है कि उसने फार्म 1,2,3, आयकर विवरणी अपने एफ0डी0 से आय, बचत खाता से ब्याज, शेयर से आय, निजी ऋण, नकद उधार पालिसी आय का संपूर्ण विवरण दिया था परंतु उसे एसीबी ने उसकी आय में नहीं जोडा और उसके आय-व्यय की गलत गणना की है, आरोपी की ओर से अपने बचाव के समर्थन में 05 बचाव साक्षियों का परीक्षण7 करवाया गया है । 9. इस प्रकरण में अवधारणीय प्रश्न निम्नानुसार है :- 
 (1) क्या आरोपी ने शासकीय नियोजन में छ0ग0हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय शंकर नगर रायपुर में बतौर लोकसेवक उपायुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए आलोच्य अवधि 1 अप्रेल 2004 से 15.11.2014 के दौरान स्वयं एवं अपने परिवार की आय के ज्ञात स्रोतों से उपार्जित आय से अधिक रूपये 773,51,876 / - मूल्य की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की तथा उक्त संपत्ति अपने आधिपत्य में रखकर पद का दुरूपयोग कर आपराधिक कदाचरण किया? 
(2) क्या आरोपी ने शासकीय नियोजन मेंछ0ग0हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय शंकर नगर रायपुर में बतौर लोकसेवक उपायुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए आलोच्य अवधि 1 अप्रेल 2004 से 15. 11.2014 के दौरान स्वयं, अपनी पत्नी तथा नाबालिक पुत्र-पुत्री के नाम पर कृषि भूमि एवं मकान आदि संपत्तियां कय की परंतु सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत इसकी सम्यक सूचना अपने विभाग को नहीं दी तथा बाद में उक्त चूक का आभास होने पर अपने कार्यालय के आवक-जावक लिपिक श्रीराम चौहान को अपने प्रभाव में लेकर कयशुदा संपत्तियों की सूचना अपने विभाग को कय अवधि में दिये जाने संबंधी दस्तावेज तैयार कर कूटक्च8ना की? 
(3) क्या आरोपी ने यह जानते हुए कि उक्त दस्तावेजों का उपयोग असल के रूप में किया जायेगा कूटरचित दस्तावेज तैयार किया, उक्त कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग असल दस्तावेज के रूप में किया, आरोपी ने कयशुदा अवधि के कूटरचित दस्तावेज लिपिक श्रीराम चौहान को देकर उनकी पावती प्राप्त कर छल किया तथा उसने मिथ्या दस्तावेज विभाग में प्रस्तुत कर साक्ष्य का विलोपन किया? 
 / / अवधारणीय प्रश्नों पर निष्कर्ष एवं निष्कर्ष के कारण / / 
10. अवधारणीय प्रश्न कमांक-(1) पर निष्कर्ष एवं निष्कर्ष के कारण :- डी0एस0नेगी अ0सा041 का कथन है कि वह जून-2010 से जून-2015 तक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ था, आरोपी घटना के समय छ0ग0हाउसिंग बोर्ड में उपायुक्त के पद पर पदस्थ थे और शासकीय सेवा में नियुक्त होने के पश्चात विभिन्न स्थानो पर पदस्थ रहे, विशेष सूत्रों से ज्ञात हुआ कि, अपने पदस्थापना के दौरान आरोपी अपनी आय से ज्ञात श्रोतो से अधिक अनुपातहीन चल-अचल संपत्ति अर्जित की है, जिसके संबंध में तस्दीक किये जाने के पश्चात उसने दिनांक 14.11.2014 को आरोपी के विरूद्ध बिना नम्बरी प्रथम सूचना प्रतिवेदन प्र०पी0234 दर्ज किया था, दिनांक 14.11.2014 को एडीजी एन्टी करप्शन ब्यूरो द्वारा उसे आरोपी के विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु आदेश प्र०पी0-235 दिया था, उप पुलिस9 अधीक्षक बी0एस॰पैकरा का आदेश प्र०पी0-236, उप पुलिस अधीक्षक लोचन पाण्डेय का आदेश प्र०पी0-237 है |
11. विशेष न्यायाधीश (एसीबी) रायपुर से दिनांक 20.04.2014 को आरोपी के जुनवानी स्थित मकान, कार्यालय, ग्राम लहरौद तहसील पिथौरा जिला महासमुंद के मकान की तलाशी के लिये सर्च वारण्ट प्र०पी0-238 से 240 विशेष न्यायाधीश (एसीबी) रायपुर से प्राप्त किया था, एडीजी द्वारा आरोपी के मकान की तलाशी लिये जाने हेतु पंच साक्षी को बुलाये जाने हेतु पत्र जिलाधीश एवं जिलादण्डाधिकारी कार्यालय, रायपुर को पत्र लिखा था, तब कार्यालय में पंच साक्षी डी0के0राठौर सहायक आबकारी अधिकारी रायपुर, जे0आर0मण्डावी सहायक जिला आबकारी अधिकारी, महेन्द्र पाल सिंह, अनिल कुमार लोनारे सहायक अभियंता लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, रायपुर, के0के0एस0ठाकुर उप वन संरक्षक, बी0एस0वर्मा अनुविभागीय अधिकारी, जल संसाधन विभाग, रायपुर कार्यालय में उपस्थित हुये, जिन्हे अलग-अलग स्थानो में पंच साक्षी नियुक्त किया गया। 
12. डीएस नेगी ने अपने प्रतिपरीक्षण में इस कथन से इंकार किया है कि आरोपी के विरूद्ध एंटी करप्शन ब्यूरो को कार्यवाही करनी थी इसलिए विश्वस्त सूत्र उपलब्ध न होने पर विश्वस्त सूत्र का उल्लेख किया गया तथा इस कथन से भी इंकार किया है कि देहाती नालिशी उसने नहीं लिखी है, उसके पेजों की लिखावट में अंतर है तथा इंकार किया है कि जिन पंच साक्षियों को बुलावाये थे उन्हें आश्वस्त किये थे कि उनके कहने पर कोरे क्शाजपरस्साक्षाक्सदं'तो श्नर्काविरस्ख0 कोई कार्यवाही नहीं होगी, इस तरह डीएस नेगी द्वारा किये गये उक्त कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी के विरूद्ध अनुपातहीन संपत्ति के संबंध में जानकारी विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त होने पर बिना नंबरी प्रथम सूचना पत्र प्र०पी234 दर्ज किया गया एवं कार्यवाही हेतु आदेश दिया गया, आरोपी के जुनवानी भिलाई स्थित मकान एवं कार्यालय, लहरौद महासमुंद स्थित मकान की तलाशी हेतु न्यायालय से सर्च वारंट प्र०पी0238 से 240 प्राप्त किये गये और जिला दंडाधिकारी को पत्र भेजकर पंच साक्षी आहूत किये गये जिस पर छह पंच साक्षी एसीबी में उपस्थित हुए। 

13. सहा०जिला आब0अधिकारी दिनेश कुमार राठौर अ0सा०1 का कथन है कि उसे दिनांक 14.11.2014 को एसीबी कार्यालय से सूचना मिली थी कि दिनांक 15.11.2014 को सुबह चार बजे एसीबी कार्यालय में उपस्थित होना है, वह उपस्थित हुआ तो डीएसपी नेगी और मातहत कर्मचारियों से मुलाकात हुई, उसके साथ सहा०जिला आब0अधि0 श्री मंडावी भी उपस्थित हुए थे, उक्त संबंध में उक्त साक्षी के कथन अखंडित हैं, दिनेश राठौर एवं डीएस नेगी का यह भी कथन है कि दिनांक 15.11.2014 को वे, पंच साक्षी जे0आर0मण्डावी के साथ आरोपी के निवास हाउसिंग बोर्ड मकान नंबर बी /17, ड्रीम होम्स, जुनवानी, भिलाई के मकान की तलाशी लिये जाने हेतु आरोपी की उपस्थिति में तलाशी पंचनामा प्र०पी0-01 तैयार किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर है। 
14. आरोपी के निवास की तलाशी लिये जाने पर वहां हुई प्राप्त संपत्तियों का इन्वेन्ट्री प्र०पी0-02 तैयार किया था और पंच साक्षियों की मदद से मिली संपत्तियों का मूल्यांकन किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर है, उक्त साक्षियों का यह भी कथन है कि आरोपी के निवास में मिले बीमा पॉलिसी, रजिस्ट्री बैनामा, बैंको के पासबुक, वाहनो के दस्तावेज एवं इनकम टैक्स रिटर्न फाईल के दस्तावेजो को पंच साक्षियों के समक्ष जप्त कर जप्ती पत्र प्र०पी0-03 तैयार किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर हैं आरोपी के निवास में मिले सोने, चांदी के आभूषणों एवं अन्य सामाग्रियों को जप्त कर जप्ती पत्र प्र०पी0-04 तैयार किया था, जिस पर भी आरोपी के हस्ताक्षर है, आरोपी के निवास में मिली नगद रकम को पंच साक्षियों के समक्ष जप्त कर जप्ती पत्र प्र०पी0-05 तैयार किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर हैं। 


15. दिनेश राठौर ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि दिनांक 15.11.14 को सुबह सात बजे भिलाई पहुंचे थे, वे लोग अपने साथ लेपटाप, प्रिंटर एवं उसके आपरेटर को साथ ले गये थे, दस्तावेज प्र०पी01 से 16 को किसने लिखा उसे याद नहीं है तथा इस कथन से इंकार किया है कि दस्तावेज प्र०पी01 से पी04 एसीबी कार्यालय में लिखा गया था तथा बताया है कि आरोपी का मकान चौथे माले में है, इस कथन से इंकार किया है कि आरोपी के घर नहीं गये थे एसीबी के कहने पर दस्तावेजों में हस्ताक्षर कर दिया, आरोपी के घर में एक हाल, दो12 कमरा, किचन, आरोपी की बिटिया का एक अन्य कमरा भी है, वह इन्वेंट्री प्र०पी02, जब्ती पत्र प्र०पी03 को देखकर ही उसकी वर्णित संपत्ति बाबत बता सकता है, नकद संपत्ति पांच लाख रूपये मिली थी, जिसमें छोटे-बडे नोट थे, नेगी ने प्रतिपरीक्षण में इस कथन से इंकार किया है कि दस्तावेज प्र०पी01 से 04 को अपने आफिस में लिखा है एवं स्वीकार किया है कि इन्वेंट्री प्र०पी02 में सभी सामान किस-किस कंपनी के हैं इसका उल्लेख नहीं है यह भी स्वीकार किया है कि नोमलता, करण एवं देवयानी ने अपने आयकर के दस्तावेज उन्हें दिये थे, परंतु इस कथन से इंकार किया है कि उसकी जांच नहीं की तथा स्वीकार किया है कि इन्वेंट्री प्र०पी02 के सीरियल कमांक 1 से 157 तक के सामानों का मूल्यांकन किया गया है तथा कमांक 158 से 224 का मूल्यांकन नहीं किया क्योंकि वे कागजात थे । 
16. उक्त साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में इस कथन से इंकार किया है कि उसके द्वारा गलत मूल्यांकन किया गया है, जब्ती पत्र प्र०पी03 के सीरियल कमांक 1 से 72 का मूल्यांकन इसलिए नहीं किया, क्योंकि वे दस्तावेज हैं यह भी इंकार किया है कि जब्ती पत्र प्र०पी04 में उल्लेखित आभूषणों का मूल्यांकन उसने अपने मन से कर लिया तथा इस कथन से भी इंकार किया है कि आरोपी के घर मिली नकद राशि आरोपी की नहीं है तथा इंकार किया है कि उसने जब्ती पत्र प्र०पी05 कोरे कागज पर साक्षी एवं आरोपी के हस्ताक्षर करवा लिये इस तरह तलाशी पंचनामा प्र०पी01, इन्वेंट्री प्र0पी02, जब्ती पत्र प्र०पी03 से 5 के स'ब'ध1 3में उक्त साक्षियों के कथन उनके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं उनमें आरोपी के हस्ताक्षर हैं तथा उसकी उपस्थिति में ही उक्त कार्यवाही की गयी है, इसलिए ऐसी कार्यवाही पर अविश्वास नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त कई अभियोजन साक्षियों से दस्तावेजों में विभिन्न कमांक डालने एवं विभिन्न रंग से चिन्हित करने के संबंध में पूछा गया है परंतु उसका कोई प्रभाव दस्तावेजों की ग्राह्यता पर नहींपडता इसलिए उसका कोई लाभ आरोपी को प्राप्त नहीं होता । 


17. उक्त कारणवश प्रमाणित पाया जाता है कि तलाशी वारंट प्र०पी01 के माध्यम से आरोपी के ड्रीम होम जुनवानी भिलाई स्थित मकान में आरोपी की उपस्थिति में मकान की तलाशी ली गयी, आरोपी के घर में मिले सामानों के संबंध में इन्वेंट्री प्र०पी02 बनायी गयी जो बारह पन्नों में हैं, जिसमें आरोपी के घर में मिले संपूर्ण सामानों का विवरण होना दर्शित होता है तथा उसमें आरोपी के पास से केनरा बैंक नंदनी रोड भिलाई के लाकर कमांक बी232437 / 02511374 चाबी नं065, एकसिस बैंक भिलाई का लाकर कमांक 2020, चांबी नंबर 76, बैंक आफ बडोदा शाखा पंडरी रायपुर की चाबी नंबर 097245 /0201738, देना बैंक शाखा शंकर नगर रायपुर की लाकर चाबी नंबर 32347,/02511374 भी मिले थे जिसका विवरण उसमें दिया गया है, जब्ती पत्र प्र०पी03 के माध्यम से आरोपी के घर में प्राप्त विभिन्न कंपनियों की बीमा पालिसी, विभिन्न व्यक्तियों के नाम से कय की गयी संपत्तियों का विकय पत्र, भूमि से संबंधित दस्तावेज, विभिन्न बैंकों के पास बुक, रसीद, बैंक के दस्तावेज, वाहनौ के दस्तावेज और विभिन्न बैंकों के सावधि जमा, आभूषण कय की रसीद, स्कूल एवं कालेज की फीस की रसीदें, आयकर रिटर्न की फाइलें एवं धान खरीदी की रसीदें जब्त की गयी तथा जब्ती पत्र प्र०पी04 के माध्यम से आरोपी के घर में मिले सोने एवं चांदी के आभूषणों को जब्त किया गया एवं जब्ती पत्र प्र०पी05 के माध्यम से आरोपी के घर में मिले नकद 5,01,150/-को जब्त किया गया। 
18. इन्वेंटी प्र०पी02 के अवलोकन से दर्शित होता है कि आरोपी के घर में अन्य सामानों के अतिरिक्त एसी 03 नग, एलसीडी टीवी 02 नग, लेपटाप 02 नग, फिश एक्योरियम 02 नग, सागौन लकडी के फर्नीचर, जगदलपुर के नक्काशी किये हुए विभिन्न फर्नीचर, सागौन लकडी के बेड, झूमर, गलीचा, एप्पल एवं सेमसंग कंपनी के अनेक मोबाइल विडियो केमरा कई गीजर कई ओवन टाटा नैनो कार होंडा एक्टिवा दुपहिया वाहन आदि प्राप्त हुए थे जो आरोपी द्वारा अपने मकान में उपयोग किये जाने एवं विलासितापूर्ण ढंग से रहने को दर्शित करता है, कार एवं एक्टिवा वाहन को छोडकर ही आरोपी के घर में लगभग 16 से 17 लाख के विभिन्न सामान मिले हैं। 
19. पंच साक्षी दिनेश राठौर एवं एएसपी नेगी का यह भी कथन है कि नेगी ने आरोपी के निवास पर मिले सोने, चांदी की जेवरातों का प्रकाश ज्वेलर्स के संचालक कमल जैन से वजन कराकर उसकी अनुमानित कीमत लिखवाया था, जिसके संबंध में प्रमाण पत्र प्र०पी0-06 एवं 07 तैयार किया विर्शषप्र०क०-812/2015 था,कमलजैनअ0सा04काकथन हैँ15 कि प्रकाश ज्वेलर्स के नाम से शाप नंबर 109 आकाश गंगा सुपेला भिलाई में उसकी दुकान है, काइम ब्रांच वाले उसे स्मृति नगर भिलाई के सामने चौहान टाउन में बुलाये थे जहां पर फ्लेट में दीवान जी का मकान है, तब वहां जाकर उसने सोने एवं चांदी के जेवर का वजन कर उसका मूल्य निकालकर दिया था मूल्यांकन प्र०पी06 एवं पी07 है । 
20. दिनेश राठौर एवं कमल जैन ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि वह प्रमाण प्रत्र देखे बगैर नहीं बता सकता कि प्र०पी06 एवं 7 में किस संपत्ति का वर्णन है एवं दिनेश राठौर ने स्वीकार किया है कि कमल जैन ने उसके सामनों सामानों को तौला था एवं इंकार किया है कि उक्त प्रमाण पत्र की कार्यवाही उसके समक्ष नहीं हुई थी, कमल जैन ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि वह आरोपी के घर जाकर सामानों का वजन कर उनका मूल्य लिखा था तथा स्वीकार किया है कि प्रमाण पत्र प्र०पी-6 एवं 07 में उसकी दुकान की सील नहीं है और वह प्रकाश ज्वेलर्स का स्वामी होने बाबत कोई दस्तावेज नहीं दिया है इस कथन से भी इंकार किया है कि उसे काइम ब्रांच वाले बुलाकर हस्ताक्षर करवा लिये, नेगी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि प्रमाण पत्र प्रपी06 एवं 7 की संस्था के स्वामी के संबंध में प्रमाण पत्र नहीं लिया लेकिन इंकार किया है कि कमल जैन नामक व्यक्ति नहीं है उसने काल्पनिक नाम के व्यक्ति से प्रमाण पत्र ले लिया, प्रमाण पत्र प्रपी06 एवं 7 के संबंध में कमल जैन, दिनेश राठौर एवं नेगी के कथन अखंडित रहे हैं, उनमें आरोपी के स्सा16क्षर हैं, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी के घर से मिले आभूषणों को कमल जैन ने आरोपी के घर में जांच एवं तौल कर प्रमाण पत्र प्र0वी06 सोने के आभूषण की कीमती 4,63,430/--रूपये का है एवं प्रमाण पत्र प्र०पी07 चांदी के आभूषणों कीमती रूपये 85,450 /-का दिया था, जो आरोपी के घर में मिले थे । 
21. एएसपी नेगी का यह भी कथन है कि आरोपी के घर से जप्त सोने की रिंग खरीदने का इस्टीमेट प्र0पी0-252, अनोपचंद तिलोकचंद से कय की गयी जेवरात की रसीद प्र०पी0-253, सांई राम आटो मोबाईल एण्ड सर्विस प्रा०लि0 से दिनांक 29.04.2014 का कैश रसीद प्र०पी0-254, सांई राम आटो मोबाईल एण्ड सर्विस प्रा0लि0 की टैक्स इन्वाईस रसीद प्र०पी0-255 है, जो दो पन्नो में है, करण दीवान के द्वारा इंडिगो में यात्रा की रसीद प्र०पी0-256 है, आरोपी द्वारा अपने विभाग से भविष्य निधि की अग्रिम राशि प्राप्त करने का आदेश पत्र प्र०पी0-257 है। 
22. उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि आरोपी द्वारा बैटरी हाउस से बैटरी कय करने की रसीद प्र०पी0-258, आरोपी के नाम पर दि न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमि0 की बीमा पॉलिसी की रसीद प्र0पी0-259, मनीष इंटरप्राईजेस से कय की गयी गीजर की रसीद प्र0०पी0-260, मेसर्स विवेकानंद सर्विस युरेका लिमि0 की रसीद प्र0०पी0-261, करण दीवान के नाम पर ट्रैक्टर सीजी-06-ई-2616 का आरसी बुक प्र०पी0-262, आरोपी द्वारा दिनांक 01.04.2004 से 31.03.2014 तक अपने विभाग को दिये गये विर्शषप्र०क०-812/2015 स्टेटनंबर-2प्र0पी०-265,युरेका फां17र्क्स लिमि0 से वॉटर फिल्टर खरीदे जाने का बिल प्र०पी0-266 एवं 267, आपके द्वारा चैन कय किये जाने का इस्टीमेट प्र0०पी0-268, मेसर्स विवेकानंद इंटरप्राई जेस से वॉटर फिल्टर कय किये जाने की रसीद प्र0०पी0-269, राम ट्रेडर्स से मोबाईल कय करने की रसीद प्र०पी0-270 है, एएसपी नेगी का यह भी कथन है कि आरोपी द्वारा कृषि भूमि से प्राप्त धान ग्रामीण सेवा सहकारी समिति तुमगांव में भेजे जाने की पावती रसीद प्र०पी0-248 से 251 तक है, तनिष्क से सोने का बेंगल खरीदने का रसीद प्र०पी0-263, करण दीवान के नाम पर बिल दिनांक 03. 12.2011 प्र०पी0-264 है, उक्त साक्षी के कथन उक्त संबंध में अखंडित रहे हैं जो आरोपी के घर से उक्त दस्तावेज मिलना एवं उसमें घरेलू सामान, रसीदों प्र०पी0254 से 261, 266, 267, 269, 270 एवं अन्य सामान खरीदने को प्रमाणित करता है । 
23. एएसपी नेगी का यह भी कथन है कि दिनांक 15.11.2014 को आरोपी के केनरा बैंक नंदनी रोड, भिलाई के लॉकर को सील किये जाने के संबंध में लॉकर तलाशी पंचनामा प्र०पी0-241 एवं एक्सीस बैंक प्रियदर्शनीय परिसर ग्रेड प्लाजा नेहरू नगर, भिलाई स्थित लॉकर नंबर 2020 को खोले जाने संबंधी लॉकर तलाशी पंचनामा जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर हैं नेगी ने स्वीकार किया है कि उक्त पंचनामा उसके हस्तलेख में नहीं है तथा इस कथन से इंकार किया है कि उसने उक्त कार्यवाही नहीं की, उक्त साक्षी के द्वारा उक्त तलाशी पंचनामा की कार्यवाही किये जाने संबंधी कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अख'18डित रहे हैं। 

24. एएसपी नेगी, साक्षी डी0के0राठौर एवं एमएस परमार का यह भी कथन है कि उसने दिनांक 17.11.2014 को देना बैंक मोवा शाखा, रायपुर के लॉकर की तलाशी किये जाने हेतु बैंक लॉकर तलाशी पंचनामा प्र०पी0-08 तैयार किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर है, बैंक लॉ कर खोले जाने के पश्चात जप्तशुदा नगदी राशि को गवाहो के समक्ष जप्त कर जप्ती पत्र प्र०पी0-09-ए तैयार किया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर हैं आरोपी के देना बैंक लाकर को खोलने पर करेंसी नोट एवं विदेशी नोट बरामद हुए जिसे जिसे जब्ती पत्र प्र०पी09ए के माध्यम से जब्त किये थे, इस संबंध में उक्त साक्षियों के कथन उनके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि उक्त तलाशी में आरोपी के देना बैंक के लाकर से पांच लाख रूपये नगद भारतीय मुद्रा एवं विभिन्न देशों की करेंसी प्राप्त हुई थी । 
25. एएसपी नेगी, साक्षी डी0के0राठौर एवं एमएस परमार का यह भी कथन है कि दिनांक 17.11.14 को बैंक आफ बडोदा पंडरी शाखा में आरोपी के बैंक लाकर की तलाशी लेकर पंचनामा प्र0०पी09 बनाये थे आरोपी के बैंक लाकर से जब्त कागजात जब्ती पत्र प्र०पी010 के माध्यम से जब्त किये थे, उक्त संबध में उक्त साक्षियों कथन अखंडित रहे हैं इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि जब्ती पत्र प्र०पी010 के माध्यम से देना बैंक के लाकर से एक दान पत्र, छह लीज डीड, एक एग्रीमेंट, 16 विकय पत्र मिले थे । दिनेश राठौर का यह भी विर्शषप्र०क०-812/2015 कथन है कि दिनांक 20.11.2014 को19 डीएसपी नेगी के बुलाने पर उनके साथ केनरा बैंक भिलाई गया, एएसपी नेगी एवं दिनेश राठौर का यह भी कथन है कि केनरा बैंक भिलाई में आरोपी के बैंक लाकर खोलने का तलाशी पंचनामा प्र0०पी011 बनाये, उक्त बैंक के लॉकर से सोने-चांदी के जेवरात, नकद राशि, कागजात मिले थे, कागजात को जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी012 बनाये, नगद राशि तेरह हजार रूपये को जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी014 बनाये थे, उक्त संबंध में उक्त साक्षियों के कथन उनके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं जिससे यह प्रमाणित होता है कि जब्ती पत्र प्रपी-12 के माध्यम से केनरा बैंक के लोकर से जब्त आभूषण सोने के कीमती रूपये 10,32,500/-, चांदी के रूपये 61,160/-, नकद जब्ती पत्र प्र०पी013 के द्वारा रूपये तेरह हजार, जब्ती पत्र प्र०पी014 के द्वारा तीन पासबुक एवं एक आभूषण खरीदी की रसीद जब्त की गयी थी, एएसपी नेगी एवं साक्षी दिनेश राठौर का यह भी कथन बैंक लॉकरो से मिले सोने, चांदी के जेवरातों को नीलेश शाह को बुलाकर उसका वजन कराकर उसका अनुमानित मूल्य का मूल्यांकन कराया था, जिसके संबंध में प्रमाण पत्र प्र०पी0-15 एवं 16 तैयार किया गया था, जिस पर आरोपी के हस्ताक्षर है। 
26. नीलेश शाह अ0सा०08 का कथन है कि शाह जेठालाल जाधव जी ज्वेलर्स के नाम से दुकान है, एक वर्ष पूर्व उसे उसके एसोसिएशन के माध्यम से बताया गया कि ज्वेलरी के मूल्यांकन हेतु जाना है, जिस पर वह एसीबी कार्यालय गया था जहां उसे सोने, चांदी एवं हीरे की ज्वेलरी दिखायी गयी जिसका विवरण ख्सने20 दर्ज किया और उन जेवरात का मूल्यांकन किया था, उसके द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र प्र0पी015 में सोने की ज्वेलरी एवं प्र०पी016 में चांदी की ज्वेलरी का मूल्यांकन है, नेगी ने स्वीकार किया है कि उसने नीलेश शाह का बयान नहीं लिया था तथा मूल्यांकन प्रमाण पत्र में नीलेश शाह की दुकान की सील नहीं लगी है, तथा नीलेश शाह द्वारा सोने-चांदी के आभूषणों को जांच कर उसमें प्रमाण पत्र दिया जाना प्रमाणित हुआ है। 


27. केनरा बैंक भिलाई के लाकर क020 चाबी कमांक 65 का तलाशी पंचनामा प्र०पी011 के द्वारा 02 नग कपडे, 6 नग प्लास्टिक के ज्वेलरी बाक्स में 10 नग सोने के एवं 05 नग चांदी के जेवरात, 13000,/-रूपये नकद जब्त किया गया तथा उक्त बैंक लाकर से जब्ती पत्र प्र0प्र012 द्वारा 10 नग सोने के आभूषण कीमती 10,32,500/-, चांदी के 05 नग आभूषण कीमती 61,860,/--रूपये जब्त किये गये तथा जब्ती पत्र प्र०पी013 में रूपये 13,000/-के नोट का इंद्राज किया गया, जब्ती पत्र प्र०पी014 में उक्त लाकर से आरोपी के नाम की केनरा बैंक भिलाई की 02 पास बुक, आरोपी के नाम से सहारा रजत योजना का सर्टिफिकेट मय पास बुक एवं कु.देवयानी दीवान के नाम से महावीर अशोक की रसीद जब्त की गयी, प्रमाण पत्र प्र0०पी015 में उक्त दस आभूषणों की कीमत 10,32,500/--रूपये एवं प्रमाण पत्र प्र०पी016 में उक्त चांदी के आभूषणों की कीमत 61,860,/--रूपये का विवरण दिया गया है, उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे है' 
28. अत: प्रकरण में आये उक्त साक्ष्य से यह प्रमाणित पाया जाता है कि देना बैंक मोवा रायपुर में आरोपी के नाम से बैंक लाकर कमांक-9, चाबी कंमांक 32437 / 0251374 प्र0०पी08 एवं पी09ए की तलाशी में लाकर से पांच लाख रूपये नकद भारतीय मुद्रा तथा 25 विभिन्न देशों की 62 करेंसी नोट एवं चिल्हर प्राप्त हुए थे, जिसमें अमेरिका, स्वीडन, थाइलेंड, सिंगापूर, चाइना, यूएई, यूरो डालर, इंडोनेशिया प्राप्त हुआ था, बैंक आफ बडोदा पंडरी रायपुर में आरोपी के नाम से बैंक लाकर कमांक-३329, चाबी कंमांक 97245 / 0201738 प्र०पी09 एवं पी010 की तलाशी में लाकर से डी0के0 दीवान एवं नोमलता द्वारा करण दीवान के पक्ष में लिखे गये दान पत्र, एमआर कुरूवंशी के नाम की चार लीज डीड, राकेश दाउ के नाम से दो एग्रीमेंट, चौहान हाउसिंग द्वारा केता नोमलता दीवान के नाम से दो विकय पत्र, केता नाबालिग करण दीवान के नाम से तीन विकय पत्र, केता देवयानी दीवान के नाम से दस विकय पत्र, श्रीमती करूणा सिंह के नाम से एक विकय पत्र का दस्तावेज मिला था, जिसमें कुल कीमती 1,39,96,654/--रूपये बतायी गयी है। 
29. लोचन पांडेय अ0सा05 का कथन है कि वह सितंबर 2013 से राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो कार्यालय रायपुर में डीएसपी के पद पर पदस्थ है, उसे निरीक्षक डीएस नेगी ने इस न्यायालय द्वारा दिया गया सर्च वारंट प्र०पी022 देकर ग्राम लहरोद तहसील पिथौरा जिला महासमुंद में आरोपी के घर जाकर सर्च किये जाने22 का आदेश दिया गया था, जिस पर वह दिनांक 15.11.2014 को दो पंच साक्षी के0के0एस0ठाकुर उप वन सरंक्षक रायपुर एवं बीएस वर्मा अनु0अधि0 जल संसाधन विभाग रायपुर तथा लारेंस खेस के साथ गया था, बी0एस0वर्मा अ0सा०7 का कथन है कि वह अगस्त 2012 से जल संसाधन विभाग उपसंभाग अभनपुर में अनुविभागीय अधिकारी के पद पर पदस्थ है, दिनांक 14.04.2014 को एसीबी से आदेश मिला कि गोपनीय कार्य के लिए बाहर जाना है रात्रि तीन बजे एसीबी कार्यालय पहुंचे, उक्त निर्देश पर वह दिनांक 15.04.2014 को एसीबी कार्यालय पहुंचा वहां के अधिकारी लोचन पांडे, नेगी साहब मिले जिन्होंने उसे पांच बजे तक वहीं रूकने कहा, एसीबी कार्यालय में अन्य पंच साक्षी भी थे, उक्त संबंध में उक्त साक्षियों के कथन अखंडित रहे हैं जो उक्त कार्यवाही किया जाना दर्शित करता है। 
30. लोचन पांडे एवं बी0एस0 वर्मा का यह भी कथन है कि वे लोग आरोपी के भाई योगेन्द्र दीवान की उपस्थिति में लहरोद स्थित आरोपी के मकान की तलाशी लिये एवं पंचनामा प्र०पी023 तैयार किये थे, तलाशी के दौरान उक्त मकान में जो संपत्ति पायी गयी उसका इन्वेंट्री पत्रक प्र०पी024 तैयार किया गया और सामानों को जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी025 तैयार किये, उसने कार्यालय वापस आकर तलाशी पंचनामा प्र०पी026 तैयार कर पुलिस अधीक्षक एसीबी रायपुर को दिया था, वहां से उन्हें पिथौरा ले गये वहां ग्राम लहरोद के संबंध में पता कर वहां पूछकर आरोपी के मकान सुबह सात बजे पहुंचे घर में महिलाएं थी उक्‍त साक्षी का यह भी कथन है कि उन्हें ईओडब्ल्यू का सर्च वारंट प्र०पी022 दिखाये और 7.30 बजे बजे घर की तलाशी चालू कर तलाशी पंचनामा प्र०पी023 बनाये थे, उसके बाद घर की तलाशी लिये, जो भी सामान मिला उसकी सूची इन्वेंट्री प्र०पी024 बनाये, उक्त मकान से मिली पास बुक, जमीन के कागजात एवं अन्य कागजात को जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी025 बनाये थे, उक्त कार्यवाही किये जाने के संबंध में उक्त साक्षियों के कथन अखंडित रहे हैं जो उक्त कार्यवाही किये जाने को प्रमाणित करता है। 
31. बुद्धेश्वर साय पैकरा अ0सा043 का कथन है कि वह 2014 में एसीबी में उप पुलिस अधीक्षक था, पुलिस महानिरीक्षक द्वारा आप आरोपी के छ0ग0 गृह निर्माण मंडल शंकर नगर स्थित कार्यालय में आदेश प्र0०पी0236 के द्वारा छापा मारने के संबंध में दिया था, न्यायालय से सर्च वारंट प्र0०पी0239 प्राप्त किया गया था, महेन्द्रपाल सिंह परमार अ0सा02 का कथन है कि वह वर्ष 2002 से पी0एच0ई0 रायपुर में अनुविभागीय अधिकारी के पद पर पदस्थ है, दिनांक 14.11.2014 को एंटी करप्शन ब्यूरो से सूचना प्राप्त हुई थी गोपनीय कार्य से जाने हेतु दिनांक 15.11.2014 को उपस्थित रहे जिस पर वह कार्यालय में उपस्थित हुआ, उक्त साक्षियों का कथन है कि दिनांक 15.11.14 को सुबह नौ बजे साक्षी महेन्द्र पाल एवं अनिल के साथ आरोपी के छ0ग0 गृह निर्माण मंडल कार्यालय जाकर सहायक अभियंता राजेन्द्र साहू के समक्ष तलाशी पंचनामा प्र०पी017, 18 इन्वेंटरी प्र०पी019 बनम्याथा,बुर्द्धश्वरपेंक्सका यह भी कथन है कि उसने प्रतिवेदन प्र०पी0288 बनाया था, श्री नेगी ने उसे आरोपी को गिरफ्तार करने हेतु पत्र प्र०पी06 भेजा था तब वह आरोपी के ड्रीम होम स्थित घर गया था जहां आरोपी नहीं मिला, इस संबंध में पत्र प्र०पी05 नेगी को भेजा था, उक्त साक्ष्य के संबंध में उक्त साक्षी के कथन अखंडित रहे हैं जो उक्त कार्यवाही को प्रमाणित करता है। 
32. एएसपी नेगी का यह भी कथन है कि जप्तशुदा सोने, चांदी के आभूषण को जिला कोषालय में सुरक्षार्थ रखने बाबत् पत्र प्र०पी0-243 एवं 244 लिखा था, आरोपी के निवास में मिले सोने, चांदी के आभूषणों को सील बंद पेटी में सुरक्षार्थ रखने जिला कोषालय अधिकारी, रायपुर को पुलिस अधीक्षक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के द्वारा पत्र प्र०पी0-245 लिखा गया था, आरोपी के निवास में मिले सोने, चांदी के आभूषणों को सील बंद पेटी में सुरक्षार्थ रखने जिला कोषालय अधिकारी, रायपुर को पुलिस अधीक्षक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के द्वारा पत्र प्र०पी0-246 एवं 247 लिखा गया था, सुरेन्द्र बंसल अ0सा०11 का कथन है कि वह एसीबी कार्यालय रायपुर में मुख्य लिपिक के प्रभार में पदस्थ है, दिनांक 14.11.2014 उप पुलिस अधीक्षक डीएस नेगी एसीबी कार्यालय रायपुर के द्वारा पुलिस अधीक्षक को आरोपी के मुख्यालय शंकर नगर रायपुर से जब्तशुदा नकद राशि को एसीबी कार्यालय रायपुर के बैंक खाते में जमा करने बाबत पत्र प्र०पी034 लिखा क्या2 था5, जिस पर पुलिस अधीक्षक आर.पी. साय द्वारा उसे जमा करने हेतु 18,14,150,/--रूपये दिया गया जिसे उसने ले जाकर एसीबी कार्यालय रायपुर के बैंक खाते एस.बी.आई. कचहरी शाखा में जमा किया था, जिसकी रसीद प्र0०पी035 एवं पी036 है, उक्त संबंध में उक्त साक्षियों के कथन अखंडित रहे हैं जो उक्त कार्यवाही को किया जाना प्रमाणित करता है। 
33. लारेंस खेस अऎसा03 का कथन है कि वह वर्ष 2009 से राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एसीबी कार्यालय रायपुर में थाना प्रभारी के पद पर पदस्थ है, उसे दिनांक 17.11.2014 को पुलिस अधीक्षक राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के पत्र के साथ आरोपी के विरूद्ध बिना नंबरी प्रथम सूचना प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, जिसके आधार पर उसी दिन उसने धारा 13(1)(ई), धारा 1302) पी.सी.एक्ट के तहत अपराध कमांक 50 / 2014 का प्रथम सूचना प्रतिवेदन प्र०पी020 दर्ज कर उसकी सूचना विशेष न्यायाधीश एसीबी रायपुर को दी एवं उक्त प्रथम सूचना पत्र को कवरिंग मेमों प्र०पी021 के जरिये पुलिस अधीक्षक को वापस किया था, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि प्र0०पी020 एवं 21 पर उसके हस्ताक्षर हैं, उक्त साक्षी के द्वारा प्रथम सूचना दर्ज करने संबंधी कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, जो उसके द्वारा प्रथम सूचना पत्र दर्ज करने को प्रमाणित करता है। 
 34. उप पंजीयक महासमुंद 2प्र6मोद कुमार वासनिक अ0सा012 का कथन है कि दिनांक 04.02.2015 को उप पुलिस अधीक्षक एसीबी कार्यालय रायपुर के द्वारा पत्र कमांक 915-पुअ,/एसीबी /डीएसएन /915,/2015 भेजकर आरोपी, श्रीमती लोमलता दीवान, करण दीवान, कु.देवयानी दीवान के नाम धारित भूमि के संबंध में विकय विलेख रजिस्ट्री बयनामा की मांग की गयी थी, उसने दिनांक 25.02.2015 को विकय विलेख की प्रमाणित प्रति कवरिंग मेमो प्र0०पी037 के साथ भेजा था, जिसके अनुसार विकेता धरमसिंह, केता आरोपी बयनामा दिनांक 30.11.2009 की प्रमाणित सत्यप्रति प्र0०पी038 है, विकेता लेखराम केता आरोपी बयनामा दिनांक 27.11.2009 की प्रमाणित सत्यप्रति प्र०पी039 है, विकेता लेखराम पटेल केता आरोपी बयनामा दिनांक 27.11.2009 की प्रमाणित सत्यप्रति प्र०पी040 है, विकेता अशोक कुमार पटेल केता आरोपी बयनामा प्र०पी041 दिनांक 27.11.2009 है, विकेता मुक्ता प्रसाद केता आरोपी बयनामा प्र०पी042 दिनांक 27.11.2009 है विकेता कलीराम केता आरोपी बयनामा प्र0०पी043 दिनांक 16.04.2010 है । 

35. उपपंजीयक प्रमोद वासनिक का यह भी कथन है कि विकेता नाथूराम व अन्य केता कु0देवयानी दीवान बयनामा प्र०पी044 दिनांक 16.04. 2010 है, विकेता रामभाउ केता कु0देवयानी दीवान बयनामा प्र०पी045 दिनांक 16.04.2010 है, विकेता जीवन केता कु0देवयानी दीवान बयनामा प्र0०पी046 दिनांक 16.04.2010 है, विकेता सुशांत अग्रवाल केता नाबालिग करण दीवान असल बयनामा प्र०पी047 दिनांक 31.03.2011 है, विकेता-विद्य [धर भगत केता नाबालिग करण दीवान27 असल बयनामा दिनांक 15.04.2011 प्र0०पी048 है, विकेता उमेन्द्र राम व अन्य केता नाबालिग करण दीवान असल बयनामा दिनांक 25.05.2011 प्र0पी049 है। 
36. उपं पंजीयक प्रमोद वासनिक का यह भी कथन है कि विकेता हेमन्त कुमार केता कु0देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 22.10.2011 प्र0०पी050 है, विकेता धरम सिंग केता कु०देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 22.10.2011 प्र०पी051 है, विकेता सुरेश कुमार साहू केता कु0देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 22.10.2011 प्र०पी052 है, विकेता कलीराम यादव केता कु0देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 21.12.2011 प्र0०पी053 है, विकेता चमराराम केता कु0देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 08.05.2012 प्र0पी054 है, विकेता कलीराम यादव केता कु0देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 08.05.2012 प्र0पी055 है, विकेता दयालू यादव केता कु०देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 07.07.2012 प्र०पी056 है, विकेता शिव कुंवर केता कु०देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 28.07. 2012 प्र०पी057 है, विकेता शिव कुंवर केता कु०देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 28.07.2012 प्र0पी058 है, विकेता रोशन तथा अन्य केता कु०देवयानी दीवान असल बयनामा दिनांक 16.08.2012 प्र०पी059 है, उक्त साक्षी प्रतिपरीक्षण स्वीकार किया है कि विकय पत्र प्र०पी037 से 59 का पंजीयन उसके सामने नहीं हुआ तथा वे पृथक पृथक वर्ष में निष्पादित हुए हैं, विकय पत्रों में विकय राशि का चेक से भुगतान नहीं हुआ है, विकय पत्रों में स्टांप और विकय राशि का उल्लं28ख है, उप पंजीयक प्रमोद वासनिक के द्वारा उक्त विकय पत्र निष्पादन के संबंध में किये गये कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, जिस पर अविश्वास का कारण दर्शित नहीं होता। 
37. प्रमोद वासनिक के उक्त कथन से प्रमाणित होता है कि उक्त विकय पत्र की राशि का भुगतान नकद में किया गया है, विकय पत्र प्र०पी038 से 42 वर्ष 2009-10 की विकय राशि रूपये 12,05,945,/--, विकय पत्र प्र0पी0 43 से 47 वर्ष 2010-11 की विकय राशि रूपये 5,20,480 /-, विकय पत्र प्र०पी048 से 53 वर्ष 2011-12 की विकय राशि रूपये 15,33,840/-, विकय पत्र प्र०पी054 से 59 वर्ष 2012-13 की विकय राशि रूपये 10,68,855/-- के विकय पत्र निष्पादित होना प्रमाणित होता है, जिनमें कुल विकय राशि रूपये 43,29,120/-का भुगतान किया गया है। 
38. विकय पत्र प्र०पी037 से 42 का केता आरोपी स्वयं है, विकय पत्र 43 से 46, 50 से 59 की केता आरोपी की पुत्री कु०देवयानी है, विकय पत्र प्र०पी047 से 49 का केता आरोपी का नाबालिग पुत्र करण दीवान है, उक्त संपत्ति के संबंध में आरोपी ने कोई विवरण अपने विभाग में नहीं दिया है, उक्त संपत्ति देवयानी एवं करण के द्वारा कहां से कय की गयी, यह भी प्रमाणित नहीं किया गया है, आरोपी ने अपने अभियुक्त कथन में उक्त बाबत कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है तथा इस कथन से इंकार किया है कि उक्त संपत्ति उसकी है, विकय पत्रों से दर्शित होता है कि विर्शषप्र०क०-812/2015 विकय राशि का भुगतान नकद किया29क्या है, आरोपी की ओर से प्रस्तुत स्टेटमेंट क01 में भी उक्त सभी विकय पत्रों का उल्लेख नहीं किया है, आरोपी ने स्टेटमेंट क01 में देवयानी दीवान के नाम की गयी संपत्ति को अर्थात नोमलता द्वारा कय करना बताया है जबकि अपने बैलेंस शीट में देवयानी दीवान के नाम की उक्त अचल संपत्ति का उल्लेख किया है अर्थात आरोपी द्वारा ही उक्त संपत्ति खरीदना उसके द्वारा प्रस्तुत उक्त दस्तावेजों से दर्शित होता है, प्रकरण के उक्त साक्ष्य से यह प्रमाणित होता है कि आरोपी के द्वारा उक्त विकय पत्रों की राशि रूपये 43,29,120/- का भुगतान किया गया है, जो उसके व्यय की राशि है। 


39. तहसीलदार महासमुंद राजेन्द्र प्रसाद तिवारी अ0सा030 का कथन है कि दिनांक 08.06.2015 को पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर द्वारा पत्र लिखकर उनके तहसील क्षेत्र में आरोपी की नाबालिग पुत्री कु देवयानी दीवान एवं नाबा0 पुत्र दीवान की धारित भूमि के संबंध में जानकारी मांगी गयी थी, जिसके आधार पर कव्हरिंग मेमो प्र०पी0-138 के जरिये देवयानी एवं करण द्वारा धारित भूमि के संबंध में जानकारी दिनांक 09.06.2015 को पुलिस अधीक्षक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर भेजी थी, जिसके अनुसार विकेता ब्यासनारायण से केता देवयानी दीवान द्वारा दिनांक 16.04.2010 का विकय पत्र प्र०पी0-139 है, विकेता परसराम से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 16.04.2010 का विकय पत्र प्र०पी0-140 है, विकेता नेहरूलाल से केता देवयानी दीवान के द्व [रा दिनांक 16.04.2010 को विक30य पत्र प्र०पी0-141 है, विकेता रामनिहाल यादव से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 16.04.2010 का विकय पत्र प्र०पी0-142 है, विकेता सारधा यादव तथा अन्य से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 16.04.2010 का विकय पत्र प्र०पी0-143 है, विकेता आसो बाई से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 16.04.2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-144 है । 
40. तहसीलदार राजेन्द्र तिवारी का यह भी कथन है कि विकेता असवंतीन बाई तथा अन्य से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 16.04. 2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-145 है, विकेता सुखदेव सिंग से केता देवयानी दीवान द्वारा दिनांक 02.09.2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-146 है, विकेता सुरेश ठाकुर से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 02.09.2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-147 है, विकेता असवंतीन तथा अन्य से केता देवयानी दीवान के द्व [रा दिनांक 02.09.2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-148 है, विकेता राजाराम तथा अन्य से केता देवयानी दीवान द्वारा दिनांक 11.10. 2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-149 है, विकेता हीरालाल यादव से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 08.05.2012 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-150 है, विकेता गीता बाई से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 30.05.2013 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-151 है, विकेता दुलौरिन व अन्य से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 30.05.2013 को कय की भू31मि का विकय पत्र प्र0०पी0-152 है, विकेता भूपेन्द्र तथा अन्य से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 30.03. 2013 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-153 है, विकेता भोज बाई से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 30.03.2013 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-154 है, विकेता देवलाल तथा अन्य से केता देवयानी दीवान द्वारा दिनांक 30.03.2013 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-155 है । 


41. तहसीलदार राजेन्द्र तिवारी का यह भी कथन है कि विकेता रामबाई तथा अन्य से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 23.09.2013 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-156 है, विकेता लालाराम से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 05.06.2014 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-157 है, विकेता कलीराम यादव से केता देवयानी दीवान के द्व [रा दिनांक 05.06.2014 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-158 है, विकेता दयालू यादव से केता देवयानी दीवान द्वारा दिनांक 05.06.2014 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-159 है, विकेता हीरालाल से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 05.06.2014 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-160 है, विकेता दशरू से केता देवयानी दीवान के द्वारा दिनांक 05.06.2014 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-161 है, विकेता अनिरूद्ध चन्द्राकर से केता करण दीवान के द्वारा दिनांक 27.03.2010 को कय की भूमि का विकय पत्र प्र०पी0-162 है, विकेता जीवन से केता आरोपी के द्वारा दिनांक 07.1०.20०93को2 कय की भूमि अधिक विकय पत्र होने के कारण प्रदर्श नहीं हो पाया था, अत: उस विकय पत्र को प्र०पी0-162क अंकित किया गया। 
42. उक्त साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि विकय पत्र उसके समक्ष निष्पादित नहीं हुआ, उसके द्वारा विकय पत्रों में विकेता एवं केता के पेनकार्ड का उल्लेख नहीं किया गया है, उसे इस बाबत जानकारी नहीं है कि आरोपी ने उक्त विकय पत्र के संबंध में आयकर विभाग को जानकारी दी या नहीं तथा स्वीकार किया है कि विकय पत्रों का सत्यापन उसके द्वारा किया गया है, विकय पत्र प्र०पी0139 से 162क के अवलोकन से दर्शित होता है कि उक्त सभी विकय पत्र आरोपी की पुत्री कु देवयानी दीवान के नाम से है, आरोपी के अपने विभाग में भेजे गये अचल संपत्ति के विवरणमें उक्त संपत्ति का उल्लेख नहीं है, उसके द्वारा विकय राशि कहां से प्राप्त की गयी यह स्पष्ट नहीं किया गया है, जो यही प्रमाणित करता है कि उक्त विकय पत्रों प्र०पी0139 से 162क की विकय राशि एवं अन्य व्यय रूपये 60,45,775/- का भुगतान आरोपी के द्वारा किया गया, जो आरोपी के व्यय की राशि है। 
43. संपदा अधिकारी छ0ग0गृह निर्माण मंडल संभाग-1 कबीर नगर रायपुर चंद्रकुमार ठाकुर अऎसा09 का कथन है कि आरोपी को भवन कमांक एच0आई0जी0-1,/135 सेक्टर-एक आवंटन दिनांक 01.10.2003 को आवंटित किया गया, भवन की रजिस्ट्री दिनांक 01.10.2003 को की गयी, आरोपी के द्वारा पत्र कमांक 10709 दिना33'क 10.10.2011 द्वारा उक्त भवन को गिफ्ट करने की अनुमति बाबत आवेदन दिया गया जिस पर अनुमति पश्चात आरोपी के द्वारा करण दीवान को दिनांक 24.10.2011 को दानपत्र विलेख प्र०पी029 के द्वारा दान कर दिया गया, दानग्रहीता करण दीवान के द्वारा पंजीयत दानपत्र के माध्यम से नामांतरण हेतु आवेदन प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर उक्त भवन का करण दीवान के नाम पर अंतरण आदेश प्र0पी028 दिया गया था इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि दान विलेख में दान दाता के रूप में आरोपी एवं नोमलता दीवान का नाम है, उक्त मकान वर्ष 1997 में कय किया गया था तथा वर्ष 2003 में सेल डीड निष्पादित की गयी थी, आरोपी द्वारा उक्त भवन कय करने हेतु अपने भविष्य निधि में से 1,35,000/-र0 निकाला गया था, उक्त प्रकरण में दिनांक 14.11.2000 को शाखा अधिकारी हाउसिंग बोर्ड द्वारा भविष्य निधि राशि जमा किये जाने का पत्र संलग्न है, भविष्य निधि की राशि अवधि के पूर्व की है, इसलिए गणना में नहीं जोडा जावेगा, उक्त दान पत्र के संबंध में उक्त साक्षी के कथन अखंडित रहे हैं, दान पत्र प्र०पी029 की रजिस्ट्री करवाने में आरोपी को रूपये 2,18,700/-स्टांप शुल्क लगा है, जो आरोपी का व्यय है। 


44. संपदा अधिकारी छ0ग0गृह निर्माण मंडल दुर्ग एस0के0चौहान अ0सा०10 का कथन है कि हाउसिंग बोर्ड के भवन कमांक एच0आई0जी0--2358 इंडस्टियल इस्टेट भिलाई का आरोपी को आवंटन दिनांक 21.12.2004 को किया गया, जिसकी34 रजिस्ट्री दिनांक 21 मार्च 2015 को की गयी, उक्त आवंटन आदेश की प्रति प्र०पी030 एवं विकय पत्र की प्रति प्र०पी031 है, भवन के संबंध में आरोपी द्वारा जमा की गयी रकम की रसीद प्र०पी032 एवं पी033 है, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि लेजर पंजी एवं अन्य चार्जेंस मिलाकर उक्त भवन की कीमत 9,56,598/-थी, उनके अभिलेख के अनुसार आरोपी ने भारतीय स्टेट बैंक से 774,001/-का ऋण लिया था जिसके भुगतान के बाद उक्त भवन आवंटन की प्रकिया उनके विभाग द्वारा चाही की गयी थी, संपूर्ण ऋण के भुगतान के बाद 31 मार्च 2005 को डीके दीवान एवं नोमलता के नाम से मकान का विकय पत्र निष्पादित किया गया, पंजीयन शुल्क 86,000/-आरोपी एवं नोमलता द्वारा मकान पंजीयन के समय हाउसिंग बोर्ड को भुगतान किया गया था, इस तरह उक्त साक्ष्य से यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी द्वारा उक्त मकान को कय करने के लिए 9,56,598/-व्यय किया गया। 
45. उप पंजीयक कार्यालय दुर्ग के रिकार्ड कीपर अब्दुल शकीर अ0सा015 का कथन है कि उप पंजीयक कार्यालय दुर्ग के ग्रंथ कमांक 15524 के विकय पत्र कमांक 1903 दिनांक 12.12.2005 में विकेता चौहान हाउसिंग प्रा0लि0 केता आरोपी एवं आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान के नाम का उल्लेख है, असल रजिस्ट्री बयनामा प्र०पी071 है, इसी प्रकार ग्रंथ कमांक 16810 के विकय पत्र कमांक 5479 दिनांक 30.03.2007 में विकेता विर्शषप्र०क०-812/2015 चोहानहाउसि'गप्रा0लि0र्कता आरोपी35 की पत्नी नोमलता दीवान के नाम का उल्लेख है असल रजिस्ट्री बयनामा प्र०पी072 है, इसी प्रकार ग्रंथ कमांक 24996 के विकय पत्र कमांक 3641 दिनांक 03.07.2012 में विकेता चौहान हाउसिंग प्रा0लि0 केता आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान के नाम का उल्लेख है असल रजिस्ट्री बयनामा प्र०पी073 है तथा ग्रंथ कमांक 23371 के विकय पत्र कमांक 3750 दिनांक 09.08.2011 में विकेता बोधनी बाई पति रघुवीर व अन्य केता आरोपी के पुत्र करण दीवान के नाम का उल्लेख है असल रजिस्ट्री बयनामा प्र०पी074 है, इसी प्रकार ग्रंथ कमांक 25126 के विकय पत्र कमांक 4878 दिनांक 27.07.2012 में विकेता ओकेश्वरी वर्मा पति उत्तम वर्मा केता आरोपी के पुत्र करण दीवान के नाम का उल्लेख है असल रजिस्ट्री बयनामा प्र0पी075 है। 


46. साक्षी अब्दुल शकीर ने प्रतिपरीक्षण स्वीकार किया है कि उक्त सभी विकय पत्र के केता के रूप में आरोपी का नाम नहीं है तथा विकय पत्र प्र०पी071 से 73 में किश्तों के माध्यम से राशि का भुगतान किये जाने का उल्लेख नहीं है, परंतु विकय पत्र प्र०पी071 में केता नोमलता के अलावा आरोपी भी है, केता करण दीवान आरोपी का पुत्र है एवं नोमलता उसकी पत्नी है, उक्त विकय पत्रों प्र०पी071 से 75 के विकय की राशि रूपये 68,00,450/- उनके द्वारा कहां से प्राप्त की गयी यह आरोपी ने एवं उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है, आरोपी ने उक्त दस्तावेजों के पंजीयन से इंकार किया है परंतु दस्तावेज आरोपी के लाकर से ही प्राप्त हुए हैं, उक्त विकय पत्र की राशि का भुगतान नक्व36 से किया गया है, जो यही प्रमाणित करता है कि उक्त विकय पत्रों की विकय राशि रूपये 68,00,450/- का भुगतान आरोपी के द्वारा किया गया जो आरोपी का व्यय है। 
47. उप पंजीयक कार्यालय के लिपिक उत्तम सिंह राठौर अ0ऎसा017 का कथन है कि उप पंजीयक कार्यालय रायपुर के दस्तावेज कमांक 4563 दिनांक 05.02.2013 की विकय पत्र प्र०पी078 है, जिसमें केता आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान हैं, उक्त विकय पत्र के माध्यम से हाउसिंग बोर्ड कालोनी बोरियाकला की भूमि क्षेत्रफल 3620.20 वर्गफिट का विकय पत्र निष्पादित किया गया है, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि विकय पत्र में आरोपी के हस्ताक्षर नहीं हैं, विकय पत्र के अनुसार किश्त का भुगतान मई 2011 मे प्रारंभ हुआ और विकय पत्र का निष्पादन 05.02.13 को हुआ, इस साक्षी ने इस तथ्य से अनभिज्ञता व्यक्त की है कि नोमलता दीवान ने विकय राशि कहां से प्राप्त की, आरोपी द्वारा अपने विकय पत्र में उक्त विकय पत्र से इंकार किया एवं उसकी पत्नी नोमलता ने उक्त विकय पत्र की राशि का भुगतान कहां से एवं कैसे किया इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है, विकय पत्र की राशि का भुगतान नकद किया गया है, प्रकरण की परिस्थितियां यही दर्शित करती हैं कि उक्त विकय पत्र की राशि 14,13,090,/- का भुगतान आरोपी के द्वारा किया गया है, जो आरोपी के व्यय की राशि है। 


48. शाखा प्रबंधक देना बैंक 3रां7डितास सोना अऎसा013 का कथन है कि एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा दिनांक 26.12.2014 को पत्र भेजकर आरोपी के बचत खाते की जानकारी चाही गयी थी, जिस पर उसने कवरिंग मेमों प्र0पी060 द्वारा दिनांक 26.12.2014 को जानकारी भेजी थी, आरोपी के बचत खाता कमांक 107910008677 की पासबुक प्र0०पी061 है, उक्त खाते का बैंक स्टेटमेंट प्र0पी062 है, पूर्व में उनकी टाटीबंध ब्रांच में आरोपी का खाता था, परंतु हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का खाता वेतन जमा किये जाने के लिए शंकरनगर ब्रांच में स्थानांतरित किया गया था, इसलिए आरोपी का भी खाता अंतरित किया गया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि दिनांक 26.12.2014 को एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा पत्र भेजकर सावधि जमा खाता की जानकारी मांगी गयी थी, जिस पर उसने कवरिंग मेमो प्र०पी063 के माध्यम से दिनांक 08.06.2015 को उक्त जानकारी एसीबी कार्यालय रायपुर भेजी थी, आरोपी के सावधि जमा खाता कमांक 107966002381 का बैंक स्टेटमेंट प्र0०पी064 है। 
49. रोहितास सोना ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि स्टेटमेंट में देना बैंक की सील नही है और उसके हस्ताक्षर नही है तथा इस कथन से इनकार किया है कि उक्त स्टेटमेंट की कम्पयूटर शीट उसने नही निकाली है, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ है कि आरोपी के बचत खाते एवं सावधी जमा के विवरण में उसके द्वारा दिये गये दस्तावेजो पर अविश्वास किया जा सके, इसलिए देना बैंक में आरोपी का उक्त बचत खाता कमांक 107910008677 की पासबुक प्र०पी061 स्टेटमेंट प्र0०पी062 से यह प्रमाणित होता है कि आरोपी के उक्त एकाउंट से उसे बैंक से रूपये 2,42,360,/--रूपये ब्याज मिला जो उसकी आय है तथा उक्त खाते में शेष राशि रूपये 4,75,000 / -रूपये है जो आरोपी का व्यय है, एवं सावधी जमा खाता कमांक 107966002381 का बैंक स्टेटमेंट प्र0०पी064 से यह प्रमाणित होता है कि आरोपी को उक्त सावधि जमा से 7,71,856,/--रूपये ब्याज प्राप्त हुआ जो आरोपी की आय है, तथा उसमें शेष 19,08,798 /--रूपये हैं जो आरोपी का व्यय है । 
50. संयुक्त प्रबंधक बैंक ऑफ बडौदा टेकचंद टेकाम अ0सा014 का कथन है कि उप पुलिस अधीक्षक एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 23.01.2015 भेजकर आप आरोपी के लॉकर सील कर उसके स्टेटमेंट आफ एकाउंट भेजने बाबत कहा गया था, जिसके आधार पर दिनांक 28.01. 2015 को कवरिंग मेमो प्र०पी065 के द्वारा उक्त जानकारी भेजी गयी थी, जो आरोपी तथा नोमलता दीवान के संयुक्त नाम पर उनके बैंक में बचत खाता कमांक 17380100014039 की पासबुक प्र०पी066 है, जिसका स्टेटमेंट आफ एकाउंट की कापी प्र०पी067 एवं आरोपी के सावधि जमा योजना खाता कमांक 17380300014899 का स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र0०पी068 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि देना बैंक में किसी ग्राहक द्वारा लॉकर लेने पर अलग से पावती नहीं दी जाती, बल्कि उसे लॉकर दिया गया है इस बाबत एक पत्र दिया जाता है, ५०'11रां3पी9 तथा नोमलता दीवान के नाम से संयुक्त लॉकर उनके बैंक में था, जिसके संबंध में दिया गया पत्र प्र०पी069 है। 
51. टेकचंद ने अपने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि आरोपी को भेजा गया पत्र प्र०पी0-70 है, इसके अतिरिक्त उक्त दस्तावेजो एवं आरोपी एवं नोमलता के खातों के संबंध में उसके द्वारा दिया गया कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित है, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि बैंक ऑफ बडौदा में आरोपी एवं उसकी पत्नी के नाम से बचत खाता कमांक 17380100014039 की पासबुक प्र०पी066 एवं स्टेटमेंट आफ एकाउंट की कापी प्र०पी067 के अनुसार आरोपी को बैंक से रूपये 3923 /--रूपये ब्याज प्राप्त हुआ जो उसकी आय है तथा उक्त बैंक खाते में रूपये 1,81,021 /--रूपये शेष है जो आरोपी का व्यय है, आरोपी के नाम से सावधी जमा योजना खाता कमांक 17380300014899 का स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र0०पी068 है जिसके अनुसार आरोपी को 2957 /--रूपये ब्याज मिला है जो आरोपी की आय है, जिसमें शेष राशि 1,02,957/-है जो आरोपी का व्यय है । 
52. शाखा प्रबंधक एक्सिस बैंक भिलाई प्रदीप दास अ0सा016 का कथन है कि उप पुलिस अधीक्षक एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा दिनांक 15. 11.2014 को पत्र प्र०पी076 लिखकर आरोपी, नोमलता दीवान, करण दीवान एवं कु०देवयानी दीवान के व्यक्तिगत बचत खाता, संयुक्त बचत खाता, समावर्धी खाता, फिक्स डिपाजिट40 या अन्य किसी प्रकार के खाते या लॉकर हों तो अप-टू-डेट स्टेटमेंट एकाउंट की नकल भेजने तथा उनके नाम के बैंक खाता के संचालन एवं आहरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के लिए कहा गया था, जिस पर उसने उसी दिन आरोपी के खाता कमांक 913010029259690 का स्टेटमेंट आफ एकाउंट की कापी प्र०पी077 एसीबी को भेजी थी तथा खाते के संचालन में रोक लगाते हुए संबंधित इंद्राज किया था, उनके बैंक में नोमलता दीवान, करण दीवान एवं कु०देवयानी दीवान के नाम से किसी प्रकार का खाता नहीं है, इस साक्षी ने अपने प्रतिपरीक्षण में इनकार किया है कि स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र0०पी0-77 कम्प्यूटर सिस्टम से निकाला जा सकता है तथा उसमें लगी सील बैंक की नही है, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के उक्त कथन पर अविश्वास किये जाने का कोई कारण दर्शित नही होता, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि एक्सिस बैंक भिलाई में आरोपी का बचत खाता कमांक 913010029259690 का स्टेटमेंट आफ एकाउंट की कापी प्र०पी077 है जिसके अनुसार आरोपी को बैंक से 1782,/-रूपये ब्याज प्राप्त हुआ जो ओरोपी की आय है तथा बैंक खाते में शेष राशि 3,00,608/--रूपये है, जो आरोपी का व्यय है। 
53. सहायक महाप्रबंधक स्टेट बैंक शाखा कचहरी चौक, रायपुर पी. वी.एस.कुमार अ0सा018 का कथन है कि दिनांक 15.11.2014 को एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा पत्र लिखकर आरोपी के खाता कमांक 32242560050, 10470136757 एवं 32261456990 के 4वै'1क आफ स्टेटमेंट उपलब्ध कराने एवं उक्त खाते का आपरेशन बंद करने का निवेदन किया गया था, जिसके आधार पर उसने उक्त तीनों खातों का बैंक संचालन बंद कर दिया एवं पत्र दिनांक 15.11.2014 को कवरिंग मेमो प्र०पी079 के जरिये उक्त सूचना दी थी, खाता कमांक 10470136757 की पासबुक प्र0०पी080 है, स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र०पी081 है, खाता कमांक ३2242560050 की पासबुक प्र०पी082 तथा स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र0पी083 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि एसीबी कार्यालय रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 19.05.2015 भेजकर आरोपी के एफ.डी. खाता कमांक 30157063865, 30153159315, 10470315103, 30034358816, 10470315136, 10470315125, 10470315147 के एसटीडीआर जारी दिनांक, जमा राशि रूपये, परिपक्वता दिनांक और परिपक्वता पर राशि के भुगतान के संबंध में जानकारी चाही गयी थी, जिस पर बैंक से पत्र प्र०पी084 द्वारा उक्त जानकारी भेजी गयी थी तथा एफडी कमांक 32261456990 का स्टेटमेंट आफ अकाउंट प्र०पी085 भी एसीबी को भेजा गया था। 


54. साक्षी कुमार ने अपने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि एसीबी का पत्र शाखा प्रबंधक को दिया गया था, परंतु वह शाखा में सहायक महाप्रबंधक है बैंक की ओर से एसीबी द्वारा चाही गयी जानकारी उसने बनाया था तथा इस कथन से इनकार किया है कि 15.11.2014 को उनके बैंक द्वारा पत्र दिये जाने की बात सही नही बता रहा है तथा पासबुक प्र०पी0-82 में बैंक अधिकारी के स्सा4क्षर2 व सील नही है तथा इस कथन से इनकार किया है कि एसीबी द्वारा दिये गये पत्र में उन्होंने जो जानकारी भेजी थी वह नहीं मांगी गयी थी, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है, जिससे उपरोक्त कथन पर संदेह किया जा सके, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया कचहरी चौक शाखा रायपुर में बचत खाता खाता कमांक 10470136757 की पासबुक प्र०पी080, स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र०पी081 के अनुसार आरोपी को आलोच्य अवधि में 1,65,037/- व्याज मिला जो उसकी आय है, खाता कमांक 32242560050 की पासबुक प्र०पी082 तथा स्टेटमेंट आफ एकाउंट प्र०पी083 के अनुसार आरोपी को आलोच्य अवधि में रूपये ब्याज मिला जो उसकी आय है तथा खाते में शेष 4,77,918,/--रूपये है जो उसका व्यय है, और उक्त एफ.डी. खाता कमांक 30157063865, 30153159315, के पत्र प्र०पी084 द्वारा उक्त जानकारी भेजी गयी थी तथा एफडी कमांक 32261456990 का स्टेटमेंट आफ अकाउंट प्र०पी085 थी। 


55. साक्षी कुमार के कथन से प्रमाणित हुआ है कि भारतीय स्टेंट बेंक के पत्र प्र0०पी084 के अनुसार एफडी कमांक 10470315103 दिनांक ३.12. 02 रूपये 1,50,000/-परिपक्वता दिनांक 03.04.07, परिपक्ता राशि एफ डी नंबर 30034358816 दिनांक 30.01.06 रूपये 20,00,000/- परिपक्वता दिनांक 03.04.07, परिपक्ता राशि 21,32,342/--,, एफडी नंबर 10470315136 दिनांक 294.305.05 रूपये 5,00,000/- परिपक्वता दिनांक 03.04.07, परिपक्ता राशि 5,50,207/--,. एफ डी नंबर 10470315125 दिनांक 11.03.05 रूपये 5,00,000/- परिपक्वता दिनांक 03.04.07, परिपक्ता राशि 5,53,938,/-. एफ डी नंबर 10470315147 दिनांक 02.08.05 रूपये 11,00,000/- परिपक्वता दिनांक 03.04.07, परिपक्ता राशि 11,94,862,/-है इस तरह उक्त पांच एफडी में आरोपी द्वारा उक्त दिनांकों में 42,50,000/-रूपये की राशि विनियोजित की जो परिपक्व होने के बाद उसे दिनांक 03.04.2007 को 46,25,582,/-रूपये प्राप्त हुआ इस तरह उक्त राशि में आरोपी को रूपये 3,75,000,/--रूपये ब्याज प्राप्त हुआ जो आरोपी की आय है, आरोपी ने दिनांक 3.04.07 को रूपये 46,25,582,/-का एफ डी कमांक 30157063865 लिया जो दिनांक 03.03.12 को परिपक्व होकर उसे रूपये 70,36,131/-प्राप्त हुआ इस तरह आरोपी को उक्त एफ डी में 24,10,549,/-व्याज प्राप्त हुआ जो आरोपी की आय है। 
56. आरोपी ने दिनांक 03.08.07 को एफ डी कमांक 30153159315 रूपये 11 लाख का लिया था जो 28.02.12 को परिपक्व होकर रूपये 16,78,082,/--आरोपी को मिला, इस तरह आरोपी को उक्त एफडी का ब्याज 5,78,082 / -रूपये प्राप्त हुआ, इस तरह आरोपी को उक्त सातों एफ डी से रूपये 33,64,213/--रूपये ब्याज प्राप्त हुआ जो उसकी आय है, भारतीय स्टेट बेंक के पत्र प्र०पी085 के अनुसार आरोपी ने 29.03.12 को एफडी कमांक 32242560050 के द्वारा नब्बे लाख रूपये की एफडी लिया जिसका ब्याजआरांपीकां86,248/…रूक्यो एव44' 93,699,/-रूपये अदा किया गया जो आरोपी की आय है, इस तरह आरोपी को भारतीय स्टेट बैंक से एफ डी का ब्याज 36,44,160,/--रूपये प्राप्त हुआ जो उसकी आय है तथा आरोपी ने नब्बे लाख रूपये की एफ डी किया है जो उसका व्यय है । 

57. शाखा प्रबंधक साउथ इंडियन बैंक मिथलेश गुप्ता अ0ऎसा020 का यह कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा दिनांक 15. 11.2014 को पत्र लिखकर नोमलता दीवान, करण दीवान और देवयानी दीवान के बचत एवं सावधि जमा खाते की स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट को फीज करने एवं विवरण पेश किये जाने हेतु भेजा गया था, नोमलता दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001430, करण दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001431 तथा देवयानी दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001434 का स्टेटमेंट मैने कव्हरिंग मेमो के जरिये दिनांक 17. 11.2014 को एसीबी को भेजा था, कव्हरिंग मेमो प्र०पी0-94 है तथा नोमलता दीवान की उक्त बचत खाते की पासबुक प्र०पी0-95 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट की नकल प्र०पी0-96 है, जो तीन पन्नों में है, देवयानी दीवान के उक्त बचत खाते की पासबुक प्र०पी0-97 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट की नकल प्र०पी0-98 है, जो दो पन्नो में है, करण दीवान के उक्त बचत खाते की पासबुक प्र०पी0-99 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट की नकल प्र०पी0-100 है, जो तीन पन्नो में है, उक्त सभी दस्तावेजो में बैंक की सील लगी हुई है, उक्त पत्र के आधार पर उक्त तीनो खाते के संव्यवहार को फीज किया गया था, श्रीमती नोमलता45 दीवान के नाम पर उनके बैंक में सावधि बचत खाता कमांक 04331010000002817 रूपये सात लाख का एफडीआर प्र०पी0-101 है। 
58. मिथलेश गुप्ता ने अपने प्रतिपरीक्षण में इनकार किया है कि कम्प्यूटर का स्टेटमेंट किसी भी कम्पयूटर से निकाला जा सकता है तथा स्वीकार किया है कि नोमलता और देवयानी के खाते में उन्ही के पैसे है और वे ही निकाल सकता है, परंतु प्रकरण में देवयानी एवं करण के द्वारा बैंक में जमा करने हेतु राशि कहां से प्राप्त की गयी यह स्पष्ट नहीं है, नोमलता आरोपी की पत्नी है इसलिए उक्त खातों के आय एवं व्यय की राशि आरोपी के आय-व्यय में जोडी जायेगी, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के कथन में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है जिससे उसके कथन पर अविश्वास किया जा सका, इसलिए यह तथ्य प्रमाणित पाया जाता है कि साउथ इंडियन बैंक नोमलता दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001430 का पासबुक प्र०पी0-95 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट प्र०पी0-96 के अवलोकन से दर्शित होता है कि उक्त बैंक से नोमलता को 94,143 /--रूपये ब्याज मिला जो आरोपी की आय में जोडा जायेगा तथा खाते में शेष राशि 64,276 है जो आरोपी के व्यय में जोडी जायेगी । देवयानी दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001434 की पासबुक प्र०पी0-97 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट की नकल प्र०पी0-98 के अवलोकन से दर्शित होता है कि उक्त बैंक से देवयानी को 60,834 /--रूपये ब्याज मिला जो आरोपी की आय में जांडा46 जायेगा तथा खाते में शेष राशि 82,313 /-रूपये है जो आरोपी के व्यय में जोडी जायेगी। 
59. मिथलेश गुप्ता के कथन से यह भी प्रमाणित हुआ है कि करण दीवान का बचत खाता कमांक 04330530000001431 का पासबुक प्र०पी0-99 तथा एकाउंट ऑफ स्टेटमेंट की नकल प्र०पी0-100 के अवलोकन से दर्शित होता है कि उक्त बैंक से करण को 6204,/--रूपये ब्याज मिला जो आरोपी की आय में जोडा जायेगा तथा खाते में शेष राशि 40,292 / -रूपये है जो आरोपी के व्यय में जोडी जायेगी, इस तरह उक्त तीनों खातों से रूपये 1,61,181,/-ब्याज मिला जो आरोपी की आय है तथा खाते में शेष 1,86,881/--है जो आरोपी का व्यय है, एफडी कमांक 04331010000002817 रूपये सात लाख का प्र०पी0-101 नोमलता के नाम से है, करण के नाम से साउथ इंडियन बैंक में एफडी कमांक 04331010000002818 है जो उसके उक्त खाते से बनायी गयी है इसलिए उक्त एफडी को प्र०पी0101क अंकित किया जाता है तथा करण के नाम से साउथ इंडियन बैंक में एफडी कमांक 04331010000002819 है जो उसके उक्त खाते से बनायी गयी है इसलिए उक्त एफडी को प्र०पी0102क अंकित किया जाता है, एफडी का व्यय एक्कीस लाख रूपये भी आरोपी का व्यय है। 
60. मुख्य प्रबंधक केनरा बैंक, भिलाई संदीप वर्मा अ0सा०23 का यह कथन है कि एसीबी कार्यालय रायपुर के द्वारा पत्र दिनांक 15.11.2014 भेजकर आरोपी दिलीप कुमार दीवान के फिक्सड डिपाजिट (सावधि जमा), बचत खाता एवं लॉकर को ब्लॉक काने47 के लिए कहा गया था तथा बचत खाता कमांक 2548101000498 खाता धारक आरोपी डी0के0दीवान एवं बचत खाता कमांक 2548101000603 खाता धारक नोमलता दीवान और डी0के0दीवान के संयुक्त नाम से था, सावधि जमा कमांक केडीआर 2548401000266 रूपये 2,535 एवं केडीआर 2548401000747 रूपये 15,94,603/- का स्टेटमेंट की जानकारी चाही गयी थी, तब उसने दिनांक 18.11.2014 को कब्हरिंग मेमो प्र0पी0-118 के माध्यम से बचत खाता कमांक 2548101000498 खाता धारक आरोपी डी0के0दीवान का स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र0पी0-119 है, जो चार पेज है, आरोपी के लॉकर कमांक-20 को सीज किये जाने का अभिलेख प्र०पी0-120 है, आरोपी के बचत खाता कमांक 2548101000498 का पासबुक प्र०पी0-121 है, बचत खाता कमांकंक 2548101000498 खाता धारक आरोपी डी0के0दीवान का स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र०पी0-119 है, 2548101000603 खाता धारक नोमलता दीवान और डी0के0दीवान के पासबुक की प्रति प्र०पी0-122, उक्त खाते का स्टेटमेंट ऑफ एकडंट प्र०पी0-123 है, जो चार पन्नो में है, आरोपी के सावधि जमा खाता कमांक केडीआर 2548401000747 रूपये 15,94,603 /- स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र0०पी0-124 है, एफडीआर की मूल प्रति प्र0०पी0-125 है। 


61. संदीप वर्मा ने अपने प्रतिपरीक्षण में इस कथन से अनभिज्ञता व्यक्त की है कि दोनो खाते जगदलपुर से अंतरित होकर आये है तथा इस कथन से इनकार किया है कि पिल्कान्ड48 डिपाजिट प्र0पी0-125 की राशि एक साथ जमा नही हुई थी, इस तरह उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित रहे है, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि केनरा बैंक भिलाई में आरोपी का बचत खाता कमांक 2548101000498 स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र0०पी0-119 पासबुक प्र०पी0120 के अनुसार आरोपी को बैंक से 1,12,520,/--रूपये ब्याज मिला है जो उसकी आय है तथा खाते में शेष राशि 4,23,902/-रूपये है जो उसका व्यय है, आरोपी और उसके पत्नी का बचत खाता कमांक 2548101000603 का पासबुक प्र०पी0122 स्टेटमेंट प्र०पी0123 के अनुसार आरोपी को बैंक से 1,63,452,/--रूपये ब्याज मिला है जो उसकी आय है तथा खाते में शेष राशि 8,60,175,/--रूपये है जो उसका व्यय है, एवं आरोपी का एफडी केडीआर 2548401000747 प्र०पी0-125 रूपये 15,94,603/- स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट प्र०पी0-124 है, जिसमें आरोपी द्वारा अर्जित ब्याज 1,05,000,/-रूपये है उक्त एफ डी की राशि आरोपी का व्यय है। 
62. शाखा प्रबंधक भारतीय जीवन बीमा निगम पी0नगेन्द्र प्रसाद अ0सा021 का यह कथन है कि एसीबी रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 04.02.15 उनके कार्यालय को भेजकर आरोपी की जीवन बीमा पालिसी कमांक 384384642, 381505887, 380279645 के संबंध में स्टेटमेंट रिपोर्ट, प्रीमियम हिस्ट्री, आरोपी द्वारा जमा किये गये प्रीमियम, उनकी कंपनी द्वारा समय-समय पर किये गये भुगतान की जानकारी मांगी गयी थी, जो जानकारी कवरिंग मेमो प्र0पी0102 र्क49 द्वारा दी गयी थी, पालिसी कमांक 384384642 का सरवाइवल बेनिफिट प्र0०पी0108 है, जो चेक प्र0०पी0109 के द्वरा आरोपी को भुगतान किया गया था, जिसकी स्टेटस रिपोर्ट प्र०पी0110, प्रीमियम हिस्ट्री प्र०पी0111 है, पालिसी कमांक 381505887 आरोपी के नाम से थी, जिसका सरवाइवल बेनिफिट प्र0०पी0105 है, जिसकी स्टेटस रिपोर्ट प्र०पी0106, प्रीमियम हिस्ट्री प्र०पी0107 है, जो मनी बैक पालिसी थी, पालिसी कमांक 380279645 आरोपी के नाम से थी, जिसकी स्टेटस रिपोर्ट प्र०पी0103, प्रीमियम हिस्ट्री प्र0पी0104 है, इस साक्षी ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि एसीबी का पत्र लेकर नही आया है, परंतु स्वीकार किया है कि दस्तावेज प्र०पी0-103 से 108, 110, 111 कम्प्यूटर से तैयार की गयी है तथा शीटें उसने नही निकाला है, परंतु बताया है कि उसके अधिकारी ने निकाला था। 
63. पी0नगेन्द्र के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है जिससे उसके कथन पर संदेह किया जा सके, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि भारतीय जीवन बीमा निगम से आरोपी ने पालिसी कमांक 380279645 लिया था जिसमें स्टेटमेंट प्र०पी0103, 104 के अनुसार प्रीमियम की राशि उसके द्वारा 77,325 /- अदा की गयी एवं परिपक्व होने के बाद उसे रूपये 1,73,800/-प्राप्त हुआ, आरोपी ने बीमा पालिसी क मांक 381505887 लिया था जिसमें स्टेटमेंट प्र०पी0105 से 107 के अनुसार प्रीमियम की राशि उसके द्वारा 79,696/- अदा की गयी एवं परिपक्व होने के बाद उसे रूपये 1,06,150,/ …प्राप्त5हु0आ, आरोपी ने बीमा पालिसी कमांक 384384642 लिया था जिसमें स्टेटमेंट प्र०पी0108 से 111 के अनुसार प्रीमियम की राशि उसके द्वारा 1,29,490/- अदा की गयी एवं परिपक्व होने के बाद उसे रूपये 60,000 हुआ। इस तरह परिपक्व होने पर प्राप्त राशि आरोपी की आय में जोडी जायेगी एवं उसके द्वारा अदा की गयी राशि उसके व्यय में जोडी जायेगी । 


64. शाखा प्रबंधक मेक्स लाईफ इंश्योरेस कंपनी रायपुर आशीष गौर अ0सा०24 का यह कथन है कि पुलिस अधिक्षक ए0सी0बी के पत्र दिनांक 04.02.2015 हमारे शाखा को भेजकर पालिसी नं0 458452117, 458451226 एवं 730521747 के पालिसी धारक के नाम, पालिसी जारी करने के दिनांक, वार्षिक प्रिमियम, टोटल प्रिमियम जमा राशि एवं पालिसी के वर्तमान स्थिति के संबंध में जानकारी मांगी गई थी तब हमने उनके पत्र को अपने मुख्य शाखा गुडगांव भेजी थी, जिस पर हमारे मुख्य शाखा ने उक्त जानकारी एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को भेजी थी, जो प्र०पी0-126 है, जो दो पन्नों में है, पॉलिसी कमांक 458452117 में जमा की गयी वार्षिक प्रिमियम की राशि का विवरण प्र०पी0-127 है तथा एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 06.06.2015 भेजकर पॉलिसी कमांक 729935890 के संबंध में यह जानकारी चाही गयी थी कि, उक्त पॉलिसी में कितनी-कितनी रकम जमा की गयी है ओर उसकी पॉलिसी डाक्यूमेंट की मांग की गयी थी, जिस पर हमारे मुख्य कार्यालय गुड़गांवर्कद्वाराउक्तजानक्ली एन्टी51 करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को दी थी, जो प्र०पी0-128 है और पॉलिसी की डाक्यूमेंट प्र०पी0-129 है । 
65. आशीष गौर ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि दो पॉलिसी दिलीप दीवान के नाम से एवं एक पॉलिसी नोमलता के नाम से है, दिलीप दीवान के नाम की दोनो पॉलिसी सरेण्डर हो चुकी है, तथा इस कथन से अनभिज्ञता व्यक्त कि है कि पॉलिसी प्र०पी0-129 का भुगतान किसने किया, दिलीप और करूणा का क्या संबंध है, उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है, जिससे उसके कथनो पर संदेह किया जा सके, उक्त साक्षी के कथनो से प्रमाणित हुआ है कि आरोपी ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस पालिसी कमांक 458451226 स्टेटमेंट प्र०पी0126 के अनुसार आरोपी द्वारा उक्त बीमा का प्रीमियम 3,50,000/-अदा किया जो परिपक्व होने पर 4,18,372/-उसे प्राप्त हुए एवं बीमा पालिसी कमांक 730521747 के स्टेटमेंट प्र०पी0126 के अनुसार उक्त बीमा का प्रीमियम 2,50,000/--अदा किया जो परिपक्व होने पर 2,00,766/-उसे प्राप्त हुए, इस तरह आरोपी को उक्त परिपक्व बीमा पालिसी से 9,59,088/- प्राप्त हुए जो आरोपी की आय है जिसमें उसके द्व रा 8,86,511,/--रूपये प्रीमियम अदा किया जो उसका व्यय है। 
66. सीनियर सेल्स मैनेजर अविवा लाईफ इंश्योरेंस, रायपुर ज्योति तुलसानी अ0सा०25 का यह कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा पत्र 04.02.2015 भेजका52 आरोपी दिलीप दीवान की पॉलिसी नंबर 10163268 के संबंध में जानकारी चाही गयी थी, जिसे हमने हेड आफिस गुडगांव भेजा दिया था और उनके द्वारा उक्त जानकारी लिखित प्र0०पी0-130 में एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को भेजी थी, उसके साथ पॉलिसी नंबर 10163268 के पॉलिसी बॉण्ड प्र०पी0-131 को भेजी गयी थी। 


67. ज्योति तुलस्यानी ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि उक्त पॉलिसी एवं बाण्ड वर्तमान में जीवित है, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है, जिससे उसके कथनो पर संदेह किया जा सके, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी द्वारा अविवा लाईफ इंश्योरेंस से उक्तानुसार पॉलिसी नंबर 10163268 ली गयी थी जिसके स्टेंटमेंट प्रपी0130 एवं 131 के अनुसार आरोपी द्वारा 1,49,481/--रूपये प्रीमियम अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है । 
68. शाखा प्रबंधक, एडलवाईस टोकियो लाईफ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0, रायपुर जितेन्द्र डहाले अ0सा026 का यह कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 04.02.2015 भेजकर हमारे इंश्योरेंस कंपनी के पॉलिसी नंबर 002180960ई एवं 001848399ई के पॉलिसी होल्डर प्रिमियम जमा करने के दिनांक, प्रिमियम एमांउन्ट, प्रिमियम जमा करने का तरीका और पॉलिसी53 के वर्तमान स्टेटस के संबंध में जानकारी चाही गयी थी, जिसे उनकी इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा कंपनी के हेड आफिस मुंबई भेजा गया, हेड आफिस के द्वारा उपरोक्त मांग की गयी जानकारी प्र०पी0-132 भेजी गयी थी, पॉलिसी कमांक 001848399ई की पॉलिसी बॉण्ड प्र०पी0-133 है एवं पॉलिसी नंबर 002180960ई की पॉलिसी बॉण्ड प्र0पी0-134 है, इस साक्षी ने अपने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि दोनो पॉलिसीयां जीवित नही है, क्योंकि उनके प्रिमियम का भुगतान नही किया गया है, पॉलिसी के प्रिमियम का भुगतान नोमलता द्वारा चेक से और देवयानी द्वारा नगद किया गया है, उक्त पॉलिसीयों के संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित रहे है, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है, उक्त पॉलिसियां एडलवाईस टोकियो लाईफ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0 भेजी गयी थी, पॉलिसी कमांक 001848399ई प्र0०पी0-132 की पॉलिसी बॉण्ड प्र०पी0-133 है जिसके अनुसार पालिसी के प्रीमियम की राशि 1,95,228 /-रूपये एवं पॉलिसी नंबर 002180960ई की पॉलिसी बॉण्ड प्र०पी0-134 के अनुसार प्रीमियम की राशि 1,97,494/-रूपये इस तरह कुल 3,92,722 / -रूपये प्रीमियम अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है। 
69. क्षेत्रीय प्रबंधक बजाज एलियांज लाईफ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0 रायपुर डॉ0अनिमेष पांडेय अ0सा०33 का कथन है कि पुलिस अधीक्षक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर द्वारा दिनांक 04.02.2015 को उसके कार्यालय में पत्र भेजकर आरोपी एवं आपके पुत्र करण दीवान के उनकी कंपनी की पॉलिसी कमांक 197971998574, 198011791 की स्टेटस रिपोर्ट एवं प्रिमियम हिस्ट्री रिपोर्ट की मांग की गयी थी, जिस पर उसने दिनांक 21.02. 2015 को उक्त जानकारी लिखित में एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को पत्र प्र०पी0-164 के द्वारा भेजी थी, जप्तशुदा दस्तावेज आरोपी की पॉलिसी कमांक 198011791 प्र०पी0-165 है, जो उनके कार्यालय द्वारा जारी की गयी है, जप्तशुदा दस्तावेज करण दीवान की पॉलिसी कमांक 1979719987 प्र0०पी0-166 है, जो उनके कार्यालय द्वारा जारी की गयी है। 
70. डा0अनिमेष पांडे ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि दस्तावेज प्रपी0-164 उसके समक्ष टाईप किये गये है और उसमें उसके हस्ताक्षर है तथा यह भी बताया है कि जो प्रिमियम की राशि पटाता है, उसे उसकी रसीद देते है, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के कथन में आरोपी एवं उसके पुत्र करण द्वारा लिये गये उक्त बीमा पॉलिसी के संबंध में संदेह किये जाने का कोई कारण दर्शित नही है, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि बजाज एलियांज लाईफ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0 से आरोपी द्वारा पॉलिसी कमांक 198011791 लिया गया जिसके स्टेटमेंट एवं पालिसी प्र०पी0164 एवं 164ए के अनुसार प्रीमियम रूपये 2,00,000/--अदा किया गया, पॉलिसी कमांक 1979719987 भी लिया गया जिसके स्टेटमेंट एवं पालिसी प्र0०पी0165 एवं 166 के अनुसार प्रीमियम रूपये 1,98,500,/--अदा किया गया, इस तरह कुल प्रीमिम 3,98,500,/--अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है । 
 71. शाखा प्रबंधक रिलायंस 5लाइं5फ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0 शाखा रायपुर मृगनेन्द्र नारायण अऎसा034 का कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा उसकी कंपनी को पत्र भेजकर आरोपी की पॉलिसी कमांक 51850038, 51850036, 51812861, 51770088, 51769995, 51812836, 14844025 एवं नोमलता दीवान की पॉलिसी कमांक 14844202 के प्रिमियम डिटेल की जानकारी की मांग की गयी थी, जिसके संबंध में उनके लेखाधिकारी श्री अभिमन्यु आचार्य द्वारा दिनांक 08.06.2015 को पत्र प्र०पी0-167 के माध्यम से उक्त जानकारी भेजी गयी थी, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के द्वारा दिये गये पत्र के माध्यम से जो विवरण मांगा गया था, उसका विवरण प्र०पी0-168 से 170 तक है, प्रकरण में जप्तशुदा दस्तावेज आरोपी द्वारा प्रिमियम जमा करने की रसीद प्र०पी0-171, पॉलिसी बाण्ड की कॉपी प्र0०पी0-172 से 177 तक है, प्रकरण में जप्तशुदा दस्तावेज नोमलता दीवान के रिनिवल प्रिमियम रसीद प्र०पी0-178 हैं। 


72. मृगनेन्द्र नारायण ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि उसमें लगी सील बाजार में बनाया जा सकता है तथा यह भी बताया है कि कंपनी का लेटर हेड ले जाने पर बनाते है तथा इस साक्षी ने अनभिज्ञता व्यक्त की है कि पॉलिसी प्रीमियम किसने अदा किया, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है, जिससे उसके कथन में संदेह किया जा सके, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी के द्वारा उक्त आठ पालिसियां ली गयी, जिसके स्टेटमेंट एवं पालिसीप्र0पी0167से178र्क अनुसार56 रूपये 14,50,000/-प्रीमियम अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है तथा एक पालिसी के परिपक्व होने पर रूपये 1,71,947 / -प्राप्त हुआ जो आरोपी की आय है। 
73. शाखा प्रबंधक भारती एक्सा लाईफ इंश्योरेंस कंपनी लिमि0, रायपुर रजत कुमार विश्वास अ0सा०36 का कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर द्वारा दिनांक 04.02.2015 को पत्र भेजकर आरोपी की पॉलिसी नंबर 501-1404042 के स्टेटस रिपोर्ट और प्रिमियम हिस्ट्री के संबंध में जानकारी मांगी गयी थी, जिसके संबंध में उसने दिनांक 16.04. 2015 को पत्र प्र०पी0-179 लिखकर उक्त जानकारी एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को भेजी थी, आरोपी की पॉलिसी नंबर 501-1404042 के स्टेट्स रिपोर्ट प्र०पी0-180 है और उसके पॉलिसी बाण्ड प्र०पी0-181 है, जिसे उनके कार्यालय द्वारा जारी किया गया है, उक्त साक्षी ने अपने प्रतिपरीक्षण में इस कथन से इनकार किया है कि पॉलिसी प्र०पी0-181 को वह पहली बार देख रहा है तथा बताया है कि सिस्टम में उक्त दस्तावेज की प्रति को देखा था, इसके अतिरिक्त उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नही हुआ है, जिससे उसके कथनो पर संदेह किया जा सके, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी द्वारा भारती एक्सा लाईस इंश्योरेंस की पॉलिसी नंबर 501-1404042 के स्टेट्स रिपोर्ट एवं बाण्ड प्र०पी0-180 एवं 181 के अनुसार आरोपी द्वारा 1,50,247/--रूपये प्रीमियम अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है । 

74. अतिरिक्त तहसीलदार 57तहसील कार्यालय रायपुर पुलक भट्टाचार्य अ0सा035 का कथन है कि पं0 दीनदयाल उपाध्याय नगर, रायपुर में आरोपी का एक मकान कमांक एचआई जी-135 है, जिसमें वह अप्रेल 2008 से जनवरी 2014 तक चार हजार रूपये प्रतिमाह किराये पर निवास करता था, उक्त मकान की किरायेदारी के संबंध में कोई लिखित एग्रीमेंट वगैरह नही था, उक्त मकान का किराया देते समय उनके द्वारा कोई रसीद नही दिया जाता था, परंतु प्रतिमाह उसके द्वारा किरायाशुदा मकान का किराया अदा किया जाता था तथा उक्त किराये के मकान में जब तक वह निवास करता था, उक्त मकान में और कोई निवास नही करता था, उक्त मकान में वह परिवार सहित निवास करता था, उक्त मकान से किसी भी प्रकार का कोई अन्य संचालन आदि नही होता था, किरायाशुदा मकान तीन बीएचके का एक मंजिला मकान था, उक्त संबंध में एसीबी वाले उससे पूछताछ कर उसका बयान लिये थे। 


75. उक्त साक्षी ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि मकान किराये पर लेने पर किराया नामा निष्पादित करवाना चाहिए और किराये की रसीद देना चाहिए, वह आयकरदाता है, उसने अपने आयकर विवरण में किराये की राशि का भी विवरण नही दिया है तथा इस कथन से इनकार किया है कि उसने अपना बयान देते समय एसीबी को नही बताया था कि अप्रेल 2008 से जनवरी 2014 तक किरायाशुदा मकान में कोई कोचिंग क्लास चलाया जा रहा था, उक्त साक्षी अतिरिक्त तहसीलदार के पद पर घटना के समय पदस्थ था, उ…५'नर्क58 द्वारा आरोपी के मकान में रहने संबंधी कथन उसके प्रतिपरीक्षण मे अखंडित रहे हैं,उसके द्वारा अपने आयकर विवरणी में उसका उल्लेख नहीं करने एवं रसीद नहीं लेने के आधार मात्र पर उसके कथन पर अविश्वास नहीं किया जा सकता, इसलिए उसके कथन से यह प्रमाणित पाया जाता है कि वह माह अप्रेल 2008 से जनवरी 2014 तक कुल 70 माह रूपये चार हजार प्रतिमाह की दर से किराये पर रहा जो राशि 2,80,000/--रूपये होती है जिसे उसने आरोपी को अदा किया। 
76. सचिव आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय छ0ग0 शासन संजय शुक्ला अ0सा०29 का कथन है कि वह छ0ग0गृह निर्माण मण्डल, रायपुर में उपायुक्त के पद पर पदस्थ थे, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के पत्र दिनांक 22.10.2014 भेजकर आरोपी की पदस्थापना आदेश एवं वेतन के संबंध में जानकारी की मांग की गयी थी, जिस पर उसने आरोपी के विभिन्न स्थानों में पदस्थ रहने के दौरान की जानकारी मंगाकर दिनांक 28.01.2015 को उप पुलिस अधीक्षक एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को जानकारी सहित विवरण पत्र प्र०पी0-137 द्वारा भेजा था, भेजे गये सहपत्र 37 पन्नों में है, इस साक्षी ने इस कथन से अनभिज्ञता व्यक्त की है कि आरोपी के द्वारा अपने आय के संबंध में समस्त जानकारी समय-समय पर भिजवाते थे, इसके अतिरिक्त आरोपी के वेतन के संबंध में उक्त साक्षी के द्वारा दी गयी जानकारी के संबंध में किये गये कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित रहे है, जिससे यह प्रमाणित पाया जाता 5है9 कि आरोपी के वेतन की जानकारी का पत्र प्र0पी0-137 है, जो ३7 पन्नो में है। 
77. संजय शुक्ला अ0सा०29 का यह भी कथन है कि पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा दिनांक 26.09.2015 को अपराध कमांक 50,/14 के मूल साक्षियों के कथन एवं दस्तावेजो को भेजकर आरोपी डी0के0दीवान उपायुक्त छ0ग0गृह निर्माण मण्डल, रायपुर के विरूद्ध अभियोजन स्वीकृति की मांग किया था, तब उसने आरोपी के विरूद्ध दिनांक 30.06.2015 को धारा 13(1)(डी), 1302) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 एवं धारा 200, 201, 420, 467, 468 एवं 471 भादवि के तहत अभियोजन स्वीकृति प्र०पी0-193 प्रदान किया था, जिसे कब्हरिंग मेमो प्र०पी0-194 के जरिये एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर को भेजा गया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि उप पुलिस अधीक्षक, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा दिनांक 22.11.2014 को पत्र भेजकर आरोपी की प्रथम नियुक्ति आदेश, पदस्थापना आदेश की छायाप्रति, सेवा पुस्तिका की छायाप्रति, व्यक्तिगत नस्ती की प्रमाणित छायाप्रति, आरोपी द्वारा प्रस्तुत अचल संपत्ति के संबंध में अभिलेख की छायाप्रति, नियुक्ति दिनांक से छापा दिनांक 15.11.2014 तक वेतन एवं भत्तो की जानकारी की मांग की गयी थी, जिस पर उसने दिनांक 01.12.2014 कव्हरिंग मेमो प्र०पी0-195 के जरिये उक्त जानकारी भेजी थी, नियुक्ति आदेश की कॉपी प्र0०पी0-196 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि आरोपी की वार्षिक चल-अचल संपत्ति का विवरणी प्र०पी0-197 है, आरोपी की60 सेवा पुस्तिका प्र०पी0-198 है। 


78. संजय शुक्ला ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि आरोपी के अभियोजन स्वीकृति देने के लिए वह सक्षम अधिकारी है, ऐसा कोई दस्तावेज उसने प्रकरण में संलग्न नही किया है और न ही लेकर आया है तथा स्वीकार किया है कि वर्तमान प्रकरण के अतिरिक्त अन्य किसी प्रकरण में अभियोजन स्वीकृति नही दिया है तथा इस कथन से इनकार किया है कि उसने दबाववश अभियोजन स्वीकृति दिया है तथा इस कथन से भी इनकार किया है कि उसने बिना आरोपी के पक्ष जाने अभियोजन स्वीकृति दे दिया, यह साक्षी आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय एवं सचिव के पद पर पदस्थ है एवं छ0ग0गृह निर्माण मण्डल में उपायुक्त है, इसलिए उसे अभियोजन स्वीकृति दिये जाने का अधिकार होना पाया जाता है तथा उसके द्वारा अभियोजन स्वीकृति आदेश में इस बात का उल्लेख किया गया है कि किस आधार पर उसने अभियोजन स्वीकृति आदेश दिया है, इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी के विरूद्ध उचित रूप से अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गयी है तथा कव्हरिंग मेमो प्र०पी0-195 के द्वारा आरोपी का नियुक्त आदेश प्र०पी0-196, वार्षिक चल-अचल संपत्ति का विवरण प्र०पी0-197 है, जो 13 पन्नों में है तथा सेवा पुस्तिका प्र०पी0-198 है। 
79. आरक्षक शिवशरण साहू अ0सा०31 एवं एएसपी नेगी का कथन है कि ढारत सिंग दीवान को जानता हूं, दिनांक 25.05.2015 को ढारत सिंग एसीबी कार्यालय में आये थे और छ:61ऋण पुस्तिका एएसपी नेगी को दिये थे, जिसे एएसपी नेगी ने उसके समक्ष जप्त कर जप्ती पत्र प्र0०पी0-163 तैयार किये थे, जप्तशुदा ऋण पुस्तिका आर्टिकल-ए-11 से ए--16 तक है, उक्त जप्ती के संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित रहे है, जो यह प्रमाणित पाया जाता है कि उक्त ऋण पुस्तिका जप्त की गयी। 
80. राकेश डोडी अऎसा038 का कथन है कि वह वर्ष 1987 से चार्टर्ड एकाउन्टेंट का कार्य कर रहा हूं, वह मेसर्स डोडी एण्ड एसोसियेट्स, 115 न्यू सिविक सेंटर भिलाई का सीनियर भागीदार है, एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा पत्र दिनांक 22.01.2015 भेजकर आरोपी दिलीप कुमार दीवान एण्ड अदर्स के इनकम टैक्स रिटर्न एवं बैलेंसशीट की मांग की गयी थी, जिस पर उसने दिनांक 23.01.2015 भेजकर उक्त जानकारी प्र०पी0-199 के पत्र के माध्यम से भेजी थी, उसके द्वारा भेजी गयी आप आरोपी के वर्ष 2014-15 के इनकम टैक्स रिटर्न, जिसका एकनॉलेजमेंट नंबर 305599460310714 की सत्यापित कॉपी प्र०पी0-200 और कम्पूटेशन ऑफ इनकम की सत्यापित कॉपी प्र०पी0-201 है, इस साक्षी प्रतिपरीक्षण में इंकार किया है कि दिलीप दीवान ने आयकर विवरणी भरते समय उसे अन्य दस्तावेज भी दिये थे जिसे उसने उसके आयकरण विवरणी में सम्मिलित नहीं किया, साक्षी पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट है उससे यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि उसे दिये गये विवरण को उसके द्वारा आरोपी के आयकर विवरणमें सम्मिलित नहीं किया गया ही62 इसलिए यह प्रमाणित पाया जाता है कि आरोपी के 2014-15 का रिटर्न प्र०पी0200 एवं कंप्यूटेशन आफ इनकम प्र०पी0201 उसके द्वारा पत्र प्र०पी0199 द्वारा एसीबी कार्यालय भेजा गया था। 
81. रतन भद्टर अ0सा040 का कथन है कि वह वर्ष 1992-93 से पी0आर0भट्टर एण्ड कंपनी के नाम पर चार्टर्ड एकाउन्टेट का कार्य करता है, वह आप आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान एवं उनके पुत्र करण दीवान का आयकर विवरणी वर्ष 2011-12 से आज तक देख रहा हूं, मैने उन दोनो के इनकम टैक्स रिटर्न तैयार करते समय कृषि आय से संबंधित रसीदें आदि देखकर इनकम टैक्स रिर्टन में शामिल किया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के पत्र दिनांक 17.01. 2015 उसे भेजकर आप आरोपी, नोमलता दीवान, करण दीवान, देवयानी दीवान, योगेन्द्र दीवान के आयकर विवरणी के संबंध में जानकारी मांगी गयी थी, तब उसने एसीबी को पत्र दिनांक 19.01.2015 भेजकर नोमलता दीवान एवं करण दीवान के संबंध में उसके द्वारा भरी गयी विवरणी की जानकारी लिखित में प्र०पी0-203 भेजी थी। 


82. उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि नोमलता दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2011-12 का अभिस्वीकृति पत्र प्र०पी0-204 है, जिसे दिनांक 31.03.2012 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन (आय गणना पत्रक) भी भरा था, जो प्र०पी0-205 है, जिसके कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट प्र०पी6०3-2०6 है, नोमलता दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2012-13 के अभिस्वीकृति पत्र प्र0०पी0-207 है, जिसे दिनांक 24.05.2012 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन भी भरा था जो प्र०पी0-208 है, जिसके कैपिटल एकाउंट प्र०पी0-209 एवं बैलेंस शीट प्र0०पी0-210 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि नोमलता दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2013-14 का अभिस्वीकृति पत्र प्र०पी0-211 है, जिसे दिनांक 31.12.2014 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन (आय गणना पत्रक) भी भरा था, जो प्र०पी0-212 है, जो दो पन्नो में है, जिसके कैपिटल एकाउंट प्र0०पी0-213 एवं बैलेंसशीट प्र०पी0-214 है। 
83. उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि नोमलता दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2014-15 के अभिस्वीकृति पत्र प्र०पी0-215 है, जिसे दिनांक 31.12.2014 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन पत्रक भी भरा था, जो प्र०पी0-216 है, जिसके कैपिटल एकाउंट प्र०पी0-217 एवं बैलेंसशीट प्र०पी0-218 है, जो दो पन्नो में है, नोमलता दीवान के पैन कार्ड की कॉपी प्र०पी0-219 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि करण दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2013-14 का अभिस्वीकृति पत्र प्र०पी0-220 है, जिसे दिनांक 31.12.2014 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन (आय गणना पत्रक) भी भरा था, जो प्र०पी0-221 है, जिसके कैपिटल एकाउंट प्र०पी0-222 एवं बैलेंसशीट प्र०पी0-223 है। 
 84. उक्त साक्षी का यह मी6क4थन है कि करण दीवान के आयकर विवरणी के कर निर्धारण वर्ष 2014-15 के अभिस्वीकृति पत्र प्र0पी0-224 है, जिसे दिनांक 31.12.2014 को भरा गया, जिसके साथ कंपूटेशन (आय गणना पत्रक) भी भरा था, जो प्र०पी0-225 है, जो दो पन्नो में है, जिसके कैपिटल एकाउंट प्र०पी0-226 एवं बैलेंसशीट प्र०पी0-227 है। करण दीवान का पैन कार्ड की कॉपी प्र०पी0-228 है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि नोमलता दीवान का वर्ष 2006-07 का कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट की कम्प्यूटर कॉपी प्र0०पी0-229 है, नोमलता दीवान का वर्ष 2007-08 का कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट की कम्पयूटर कॉपी प्र०पी0-230 है, नोमलता दीवान का वर्ष 2008-09 का कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट की कम्प्यूटर कॉपी प्र0०पी0-231 है, नोमलता दीवान का वर्ष 2009-10 का कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट की कम्पयूटर कॉपी प्र०पी0-232 है। नोमलता दीवान का वर्ष 2010-11 का कैपिटल एकाउंट एवं बैलेंसशीट की कम्प्यूटर कॉपी प्र०पी0-233 है, उक्त साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि नोमलता एवं करण के द्वारा दिये गये विवरण के आधार पर उसने उनका आयकर विवरणी भरा था उसने प्र०पी0229 से 233 का दस्तावेज एसीबी को नहीं दिया था इस तरह उक्त साक्षी कथन से प्रमाणित होता है कि उसके द्वारा ऐसीबी द्वारा मांगी गई जानकारी के आधार पर नोमलता, करण के आयकर विवरण एवं उससे संबंधित दस्तावेज एसीबी को दिया था तथा नोमलताएवं करण के बताये अनुसार उनका आयकर विवरण भरा था । 


 85. आयकर निरीक्षक सुशीला65 पी.नायर वर्मा अ0सा०22 का यह कथन है कि वह एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के द्वारा हमारे कार्यालय को दिनांक 22.01.2015 को पत्र भेजकर आप आरोपी के एचयूएफ के आयकर विवरणी कर निर्धारण वर्ष 2010-11 से 2014-15 तक की जानकारी चाही गयी थी, जिस पर तात्कालीन आयकर अधिकारी श्रीमती बीनू जे0 कुमार के द्वारा कव्हरिंग मेमो के जरिये उक्त विवरणी की सत्यापित कॉपी एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर को भेजी थी, कव्हरिंग मेमो प्र०पी0-112 है, आयकर विवरणी वर्ष 2010-11 प्र०पी0-113, आयकर विवरणी वर्ष 2011-12 प्र0पी0-114, आयकर विवरणी वर्ष 2012-13 प्र०पी0-115, आयकर विवरणी वर्ष 2013-14 प्र०पी0-116, आयकर विवरणी वर्ष 2014-15 प्र०पी0-117 है, जिनके अ से अ भाग पर श्रीमती बीनू जे0 कुमार तात्कालीन आयकर अधिकारी के हस्ताक्षर है, सुशीला पी0नायर ने अपने प्रतिपरीक्षण इस कथन से इंकार किया है कि दस्तावेज प्र०पी0113 से 117 में वीनू जे कुमार के हस्ताक्षर नहीं है एवं बताया है कि उसने उसके सामने हस्ताक्षर किया था, उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण में ऐसा कोई तथ्य प्रमाणित नहीं हुआ है जिससे उस पर संदेह किया जा सके इसलिए प्रमाणित पाया जाता है कि एसीबी द्वारा मांगी गयी जानकारी के आधार पर आयकर विभाग-1-4 भिलाई द्वारा दिलीप दीवान की आयकर विवरणी वर्ष 2010-11 से 2014-15 प्रपी-113 से 117 कवरिंग मेमो प्र0०पी0112 द्वारा भेजा गया था। 
 86. डी0एस0नेगी का यह6भी6 कथन है कि आरोपी को फार्म नंबर-1, 2, 3 आय-व्यय का विवरण दिया गया था, जिसे आरोपी के चार्टर्ड एकाउन्टेंट एस0आर0भट्टड ने भरकर आरोपी के हस्ताक्षरयुक्त उन्हें दिया था, फार्म नंबर-01 प्र०पी0-271, फार्म नंबर-02 एवं 03 प्र0पी0-272 है, आरोपी द्वारा अपने फार्म नंबर-1, 2, 3 के जवाब के साथ अपनी पत्नी नोमलता दीवान के इनकम की गणना पत्रक वर्ष 2006-07 से 2008-09 तक पेश किया था, जो कमश: प्र०पी0-273 से 277 तक है, आरोपी द्वारा न्यूवेक सेल्स से इलेक्ट्रीक चिमनी खरीदने की रसीद प्र०पी0-278, नोमलता दीवान के नाम पर एक्टीवा गाडी कमांक सीजी-07-एबी-1615 का आर.सी. बुक प्र०पी0-279, नोमलता दीवान के नाम पर टाटा नैनो एलएक्स कमांक सीजी-07-एमए-३3930 का आरसी बुक प्र०पी0-280, लाईफ स्टाईल एक्जीविसन की रसीद प्र०पी0-281, त्रिभुवनदास भीमजी जावेरी की रसीद प्र०पी0-282 है, इस संबंध में उक्तसाक्षी के कथन अखंडित रहे हैं जो यही दर्शित करता है कि आरोपी द्वारा फार्म 1,2,3 प्र0पी0-271 एवं 272 तथा अन्य दस्तावेज प्र०पी0-273 से प्र०पी0-282 दिया गया था । 
87. डी0एस0० नेगी का यह भी कथन है कि उसने विवेचना के दौरान श्रीराम चौहान, श्रीमती मीरा देवी, विद्याभूषण कुरूवंशी, रूपेश दाउ, छबलूराम ठाकुर, एस0आर॰भट्टड्, नारायण अग्रवाल, करूण सिंग, मुकेश सिंग, पुलक भट्टाचार्य, मोहितराम कुरूवंशी का कथन उनके बताये अनुसार लेखबद्ध किया था, गवाह श्रीराम चौहान का धारा 164 द0प्र०सं0 के तहत कथन न्यायालय माननीय विनय कुमार6 7प्रधान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, रायपुर से कराये जाने बाबत् आवेदन प्र०पी0-283 न्यायालय को दिया था, श्रीराम चौहान के द्वारा न्यायालय में दिया गया कथन प्र0०पी0-284 है, उक्त संबंध में साक्षी के उक्त कथन अखंडित रहे हैं जो उसके द्वारा उक्त बयान लेना और श्रीराम का न्यायालय में कथन करवाने का प्रमाणित करता है। 
88. अभियोजन के प्रकरण के अनुसार आरोपी पर आलोच्य अवधि नवंबर 2004 से 1 अप्रेल 2004 से 15.11.2014 (जिसे आगे आलोच्य अवधि कहा गया है)के मध्य शासकीय अधिकारी होते हुए आय से अधिक संपत्ति अर्जित की, प्रकरण में यह अविवादित है कि आलोच्य अवधि में आरोपी छ0ग0 राज्य हाउसिंग बोर्ड के रायपुर कार्यालय में उपायुक्त के पद पर पदस्थ होते हुए शासकीय अधिकारी थे, आरोपी द्वारा प्रस्तुत स्टेटमेंट नं02 में आलोच्य अवधि में अपनी आय का मुख्य स्रोत वेतन से आय रूपये 60,20,435 /- सोना बेचने से रूपये 6,10,035,/- संपत्ति बेचने से रूपये 18,51,000/-,. घर किराये से देने से एवं कृषि से खुद को रूपये 37,05,260/-एचयूएफ दिलीप दीवान 16,43,310/-, नोमलता दीवान 39,75,465 /-, बैंक ब्याज से, बीमा पालिसी यूनिट टस्ट, राष्टीय बचत, शेयर से नोमलता को रूपये 3,02,781,/-, दिलीप दीवान को रूपये 2,71,300/-, देवयानी को रूपये 3,08,121/-, पी0एफ0 का आहरण रूपये 1,35,000/- आरोपी द्वारा नगद ऋण करूणा सिंह से रूपये दस लाख, एसबीआई से रूपये 7,74,001/- आरोपी की मां मीरा दीवान से पच्चीस लाख रूपये नगद उपहार, आरोपी को6 8प्राबिरुहैं'ट फंड में प्राप्त लाभांश रूपये 4,40,580/- अन्य स्रोतों से आय में उसके एचयूएफ में केपिटल गेन से आय रूपये 72,68,610/- स्वयं को प्राप्त ब्याज रूपये 13,74,989,/- दिलीप कुमार दीवान एचयूएफ को प्राप्त ब्याज रूपये 81,46,841,/- एवं नोमलता दीवान को केपिटल गेन ब्याज एवं कोचिंग क्लास से आय रूपये 17,10,917/- कुल आय रूपये 4,20,38,645,/-होना बताया है। 
89. साक्षी संजय शुक्ला अ0सा029 के द्वारा आरोपी के वेतन से प्राप्त आय के संबंध में दस्तावेज प्र०पी0137 प्रस्तुत किया है, जिसके अनुसार आलोच्य अवधि में आरोपी को वेतन से आय माह अप्रेल 2004 से 17,321 /- अप्रैल 2004 से मार्च 2005 तक रूपये 2,46,437 /- अप्रेल 2005 से मार्च 2006 तक 3,३32,153/-, अप्रैल 2006 से मार्च 2007 तक रूपये 3,43,400/-, अप्रैल 2007 से मार्च 2008 तक रूपये 3,99,441/-, अप्रैल 2008 से मार्च 2009 तक रूपये 4,02,548/--, अप्रैल 2009 से मार्च 2010 तक रूपये 4,26,464/-,. अप्रैल 2010 से मार्च 2011 तक रूपये 7,34,899 /-, अप्रेल 2011 से मार्च 2012 तक रूपये 5,77,165,/-, अप्रैल 2012 से अक्टूबर 2012 तक रूपये 3,31,907/-, नवंबर 2012 -- रूपये 50,730 /-, दिसंबर 2012 से मार्च 2014 तक रूपये 8,44,651,/-, अप्रैल 2014 से नवंबर 2014 तक रूपये 5,77,839/- इस तरह आलोच्य अवधि में वेतन से कुल आय 52,84,955 /--रूपये होना पाया जाता है, आवेदक के घर में मिले उपयोग के सामान को इन्वेंट्री प्र0पी02 में दर्शित किया गया है एवं आरोपी व उसके परिवार के सदस्यी'69द्वारा वायुयान में यात्रा करना, बेट्री, यूरेका फोर्स से सामान खरीदा, गीजर, फिल्टर आदि में व्यय को दृष्टिगत रखते हुए आवेदक के वेतन की कुल आय में से उसके रहन सहन की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए 60प्रतिशत राशि कटौती करने के बाद बचत की राशि रूपये 21,13,982,/-वेतन से आय होना पाया जाता है ।
90. आरोपी द्वारा दिनांक 27.11.2011 को सोने के सामान विकय किये जाने से आय रूपये 6,10,035,/- होना बताया है परंतु इस संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है तथा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसके द्वारा कितना सोना बेचा गया और उसकी कितनी राशि उसे प्राप्त हुई उसमें से कितनी राशि उसने आय के रूपमें अर्जित किया इसलिए आरोपी द्वारा रूपये 6,10,035/-जो आय होना बताया गया है वह विश्वास योग्य नहीं है | 
91. आरोपी द्वारा उसकी पत्नी नोमलता दीवान द्वारा 19 अगस्त 2011 को फूलेट विकय करने में रूपये 18,51,500/-रूपये आय होना बताया है, आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट नं01 प्र०पी0272 के साथ संलग्न विवरणी में आरोपी की पत्नी नोमलता एवं पुत्र करण के नाम से मकान नंबर एफ-6 जुनवाई भिलाई को दिनांक 30.03.07 को रूपये 7,09,668,/-में कय करने और 19.08.2011 को 18,51,500/-रूपये में अमित, मोनिका अग्रवाल भिलाई को विकय किये जाने का उल्लेख है उक्त दोनौ विकय पत्र की प्रतियां आरोपी द्वारा प्रस्तुत की क्सी7है0, आरोपी ने अपने विभाग में प्रस्तुत विवरण में उक्त संपत्ति का उल्लेख नहीं किया है परंतु यविकय पत्रों से उक्त संपत्ति का कय एवं विकय होना दर्शित होती है इसलिए 19.08.2011 को आरोपी की पत्नी एवं पुत्री को 18,51,500,/-रूपये प्राप्त होना दर्शित होता है । 
92. आरोपी द्वारा स्वयं के एवं पत्नी के किराये की आय बतायी गयी है, प्रकरण में प्रमाणित हुआ है कि आरोपी ने पुलक भट्टाचार्य को अपना मकान अप्रेल 2008 से जनवरी 2014 तक रूपये चार हजार प्रतिमाह किराये पर दिया था जिसकी आय रूपये 2,80,000 /-रूपये आरोपी की आय होना पाया जाता है, आरोपी के द्वारा स्टेटमेंट 2 एवं 3 प्र०पी0272 के साथ नोमलता दीवान का शिवानी घोष के साथ किराया एग्रीमेंट दिनांक 14.10.14 डी0के0दीवान का जागीर सिंह के साथ किरायानामा दिनांक 31.10.2014, नोमलता दीवान की राजेश के साथ किराया अभिस्वीकृति दिनांक 10.10.14 की प्रति भी प्रस्तुत की है परंतु आरोपी की ओर से उक्त किरायेदारों का साक्ष्य प्रकरण में नहीं करवाया गया है, प्रकरण में आरोपी के निवास पर दिनांक 15.11.14 को छापा मारा गया है,उक्त किरायानामा उसके आसपास की अवधि का है, उक्त किरायानामा में से दीपक वर्मा के अतिरिक्त अन्य किरायानामा छापा अवधि के आसपास का ही है इसलिए उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता, इसलिए आरोपी को किराये की राशि के संबंधमें आयरूपये 2,80,000/--होना ही पाया जाता है। 


 93. आरोपी की ओर से क्याव71 साक्षी के रूप में अपने भाई यो गेन्द्र दीवान ब0सा05 का कथन करवाया है जिसने कथन किया है कि उसने डी.एस. नेगी को अपने आय के संबंध में दस्तावेज दिया था और उन्हे शपथ पत्र भी दिया था, मुझसे नेगी ने पूछताछ के लिये उसके गांव लहरौद गये थे, श्री नेगी ने बताया था कि उसके बडे भाई आरोपी के यहां छापा मारें हैं तथा उसके लहरौद स्थित घर में भी छापा की कार्यवाही के लिये उससे अनुमति मांगी थी तब उसने उन्हे अनुमति दिया था, उन्होनें उससे जो दस्तावेज वगैरह मांगे थे वह उसने उन्हें दिया था, उसने नेगी साहब को बताया था कि वह कृषि भूमि में दो फसल लेता है, जिससे उसे वर्ष में 10 से 14 लाख रूपये आय होती है, वे लोग 7 भाई हैं जमीन का बटवारा नहीं हुआ है जो भी कृषि आय होती है उसे सब मिलकर बांट लेते हैं, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि एसीबी वालों ने ग्राम लहरौद में कार्यवाही किये हैं, ग्राम लहरौद में 16-17 एकड जमीन है, इस साक्षी द्व [रा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनकी जमीन में उनके द्वारा कितनी फसल ली जाती है एवं कितना व्यय करने के बाद कितनी राशि की हर वर्ष बचत होती है एवं उसमें से कितनी राशि आरोपी को प्रतिवर्ष देते हैं, इसके अतिरिक्त इस साक्षी के द्वारा ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे इस बात पर विश्वास किया जा सके कि उनके द्वारा आरोपी को कृषि से प्राप्त होने वाली राशि में से कोई राशि दी जाती थी, इसलिए बचाव साक्षी योगेन्द्र दीवान के कथन का कोई लाभ आरोपी को प्राप्त नहीं होता । - 
94. आरोपी द्वारा उसे एवं उसकी पत्नी तथा एचयूएफ दिलीप दीवान, खेती से भी आय होना बताया गया है, आरोपी द्वारा अपने विभाग में दिये गये अचल संपत्ति के विवरण प्र0०पी0183 से 189, प्र०पी0197 वर्ष 2007 से दिसंबर 2011 के किसी भी वर्ष में उसके पास, उसकी पत्नी या उसके एचयूएफ में कृषिभूमि होने के संबंध में कोई विवरण नहीं दिया है, छ0ग0गृह निर्माण मंडल द्वारा आरोपी को 29.11.2014 को पत्र प्र०पी0190 को अचल संपत्ति का विवरण प्रस्तुत न करने के कारण उसे प्रस्तुत करने एवं उसका कृत्य कदाचरण के संबंध में आने के संबंध में पत्र लिखा है, जिससे दर्शित होता है कि दिनांक 29.11.2014 तक भी आरोपी के द्वारा वर्ष 2012, 2013 की स्थिति में अपनी अचल संपत्ति का विवरण अपने विभाग में प्रस्तुत नहीं किया था। 
95. आरोपी द्वारा प्रस्तुत स्टेटमेंट नं01 प्र०पी01 के अवलोकन से दर्शित होता कि उसकी पुत्री देवयानी दीवान के नाम से ग्राम कौआझर जिला महासमुंद की भूमि कय करने की राशि का भुगतान श्रीमती दीवान द्व रा किये जाने का उल्लेख है, श्रीमती दीवान का नाम नोमलता दीवान है, उक्त संपत्ति 10.10.2011 से 14.08.2012 के मध्य कय की गयी, आरोपी की ओर से वर्ष 2012 एवं 2013 की बैलेंस शीट पेश की गयी है, जिसमें देवयानी दीवान के नाम कय की गयी संपत्ति उसकी बैलेंस शीट में वर्णित है और नोमलतादीवान की उक्त वर्ष के बैंलेंस शीट में उक्त संपत्ति का विवरण नहीं है, आरोपी की ओर से 1नै7श3 आयकर विवरणी में कृषि आय का कोई उल्लेख नहीं है, आरोपी की ओर से प्रस्तुत एचयूफ दिलीप दीवान की आयकर विवरणी में कृषि आय अर्जित किया जाना बताया गया है जबकि संपत्ति देवायानी दीवान के नाम की है। 
96. प्रकरण में अभियोजन की ओर से धान विकय की रसीद प्र०पी0248 से 251 डीके दीवान के नाम की प्रस्तुत की गयी है परंतु डीके दीवान की आयकर विवरणी में कृषि आय का कोई उल्लेख नहीं है, नोमलता के आयकर विवरणी में कृषि आय होना बताया गया है जबकि उसके नाम कोई कृषि भूमि नहीं है, इसलिए आरोपी, उसकी पत्नी एवं उसके एचयूएफ से प्राप्त कृषि आय का विवरण स्टेटमेंट क02 में दिया गया है, वह विश्वास योग्य नहीं है, इसलिए आरोपी द्वारा किराये से मकान देने, खेती से प्रापत आय एवं अन्य व्यय के संबंध में जो आय का वर्णन अपने स्टेटमेंट क02 में दिया है, उसमें मात्र 2,80,000/-रूपये किराये की राशि की उसकी आय होना पायी जाती है, आरोपी की कृषि से कोई आय नहीं होना पाया जाता है । 


97. अभियोजन साक्षी सीए राकेश डोडी अ0सा038, सी.ए. भटटर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0सा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र०पी0171, 172 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट,स्टेट बेंक रायपुर के कुमार अ0०सा038 के पास बुक एवं स्टेंटमेंट प्र0०पी080 से 83 में आरोपी के बचत खाते का ब्याज रूपये 1,81,797/…दंनावै'करायुपरर्क रोहतास74 सोना अ0सा013 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी061, 62 के बचत खाते के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 2,42,336/-, केनरा बैंक भिलाई के संदीप वर्मा अ0सा023 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी0119, 120 के बचत खाते के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 1,12,520/-, बैंक आफ बडोदा रायुपर के टेकचंद अ0सा014 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी066,67 के बचत खाते के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 3923 /-, एक्सिस बैंक रायुपर के प्रदीप दास अऎसा016 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी077 के बचत खाते के अनुसार ब्याज 1782,/-रूपये आरोपी को दिया गया है। 
98. उक्त कारणवश आरोपी को उक्त बेंकों के बचत खाते में आलोच्य अवधि में 5,42,382,/-रूपये ब्याज दिया गया है, जो आरोपी की आय है, आरोपी की पत्नी नोमलता का केनरा बेंक भिलाई में बचत खाता का पासबुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी0122 एवं 123 के अनुसार ब्याज 1,63,452/- है, साउथ इंडियान बैंक के पास बुक एवं स्टेंट मेंट प्र०पी095 एवं 96 के अनुसार ब्याज 94,143,/-है इस तरह कुल बयाज 2,57,595 / -रूपये है, देवयानी का साउथ इंडियन बैंक की बचत खाता पासुबक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी097, 98 के अनुसार ब्याज 60,834 /--रूपये एवं करण का बचत खाते का पासबुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी099 एवं 100 के अनुसार ब्याज 6204/--रूपये है, इस तरह कुल बचत खाते का ब्याज 7.671,015/--रूपये है जो आरोपी की आय में जोडा जायेगा। 
 99. अभियोजन साक्षी सीए 7रार्क5श डोडी अ0सा038, सीए. भटटर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0सा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र०पी0171, 172 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट, स्टेट बेंक रायपुर के कुमार अ0सा038 के पास बुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी084, 85 में आरोपी के एफ डी का ब्याज रूपये 36,44,160/- देना बैंक रायुपर के रोहतास सोना अ0सा013 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी064 के एफ डी के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 771,856 /-, केनरा बैंक भिलाई के संदीप वर्मा अ0सा०23 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी0124, 125 के एफ0डी0 के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 1,05,000/-, बैंक आफ बडोदा रायुपर के टेकचंद अ0सा014 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी068 के एफडी के अनुसार आरोपी को दिया गया ब्याज 2,957 /- आरोपी को दिया गया है, इस तरह आरोपी को उक्त बेंकों से एफ0डी0 का ब्याज आलोच्य अवधि में 45,23,973/-रूपये दिया गया है, जो आरोपी की आय है, सी0ए0 भट्टर द्वारा दिया गया पत्र प्र0०पी0203, नोमलता कीबैलेंस शीट वर्ष 2012-13 प्र०पी0217, वर्ष 2013-14 प्र०पी0218 के अनुसार देना बैंक में एफ.डी.का ब्याज रूपये 4,95,608रू /-नोमलता को प्राप्त हुआ है जो आरोपी की आय में जोडा जावेगा, इस तरह आलोच्य अवधि में आरोपी एवं उसकी पत्नी का एफ0०डी0 के ब्याज से आय रूपये 50,19,581 /-होना पाया जाता है जो आरोपी की आय है । 
 100. अभियोजन साक्षी सीए 7रार्क6श डोडी अ0सा038, सीए. भटदटर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0सा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र0पी0171, 172 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट, भार0जीवन बीमा निगम के नगेन्द्र प्रसाद अ0सा021 के द्वारा बीमा पालिसी का स्टेटमेंट प्र०पी0103 से 111, मैक्सलाइफ इंश्यो0 कंपनी के आशीष गौर अ0सा024 द्वारा प्रमाणित बीमा पालिसी का स्टेटमेंट प्र०पी0126 के अनुसार आरोपी को आलोच्य अवधि में बीमा पालिसी परिपक्व होने पर रूपये 9,59,088/- दिया गया जो उसकी आय है तथा रिलायंस इंश्यो0 कंपनी के मृगनेंद्र नारायण अऎसा034 द्वारा बीमा के स्टेटमेंट एवं बॉण्ड प्र०पी0167 से 178 के अनुसार एक बीमा पालिसी परिपक्व होने पर आरोपी को 1,71,947 /-रूपये दिया गया इस तरह आरोपी को बीमा पालिसियों के परिपक्व होने पर 11,31,035/--रूपये प्राप्त हुआ जो उसकी आय में जोडा जावेगा। 
101. इस तरह आरोपी की आय निम्नानुसार है :- 1/ कुल वेतन आय 21,13,982,/-रूपये, 2 / मकान बेचने से आय १18,51,500/-रूपये, 3/ मकान किराये से आय ?2,80,000/--रूपये 4 / बचत खाता, एफ डी से ब्याज की आय 571,86,596/-रूपये 5/ बीमा पालिसी से आय 11,31,035/-रूपये विर्शषप्र०क०-812/2015 77 अक्सोपीकीकूलआया,11,63,113/-रूपये 
 102. आरोपी के व्यय की गणना की जा रही है, जिसके अनुसार आरोपी के वेतन से व्यय कम किया जा चुका है इसलिए वेतन से पृथक से. कोई राशि नहीं ली जा रही है। 
103. अभियोजन साक्षी सीए राकेश डोडी अ0सा038, सीए. भटटर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0सा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र०पी0171, 172 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट, स्टेट बेंक रायपुर के कुमार अ0सा038 के पास बुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी080 से 83 में आरोपी के बचत खाते की शेष राशि रूपये 7,41,286/- देना बैंक रायुपर के रोहतास सोना अऎसा013 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र0०पी061, 62 के बचत खाते की शेष राशि 4,75,000/-, केनरा बैंक भिलाई के संदीप वर्मा अऎसा०23 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र0०पी0119, 120 के बचत खाते की शेष राशि 4,23,902/- बैंक आफ बडौदा रायपुर के टेकचंद अ0सा०14 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी066, 67 के बचत खाते की शेष राशि 1,81,021 /--रूपये है । 


104. एक्सिस बैंक रायुपर के प्रदीप दास अ0सा016 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी077 के बचत खाते की शेष राशि 3,00,608/--रूपये आरोपी को दिया गया है, इस तरह आरोपी को उक्त बेंकों के बचत खाते में आलोच्य अवधि में 21,21,777 /-रूप२प्रे78 शेष था, जो आरोपी की व्यय है, आरोपी की पत्नी नोमलता का केनरा बेंक भिलाई में बचत खाता का पासबुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी0122 एवं 123 के अनुसार शेष राशि 8,60,175 /-है, साउथ इंडियन बैंक के पास बुक एवं स्टेंट मेंट प्र०पी095 एवं 96 के अनुसार ब्याज 94,143,/-है इस तरह कुल बयाज 2,57,595 / -रूपये है, देवयानी का साउथ इंडियन बैंक की बचत खाता पासुबक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी09, 98 के अनुसार शेष राशि 64,276 / -रूपये एवं करण का बचत खाते का पासबुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी099 एवं 100 के अनुसार शेष 40,292,/-रूपये है तथा देवयानी का बचत खाते में शेष राशि प्र0०पी097, 98 के स्टेट मेंट अनुसार 82,313,/- है, इस तरह आरोपी की पत्नी एवं बच्चों के बचत खातों में कुल शेष राशि 10,47,056 /--रूपये है, इस तरह आरोपी, उसकी पत्नी एवं उसके बच्चों के बचत खाते में रूपये 31,68,833/--रूपये जो आरोपी का व्यय है। 
105. सीए भदटर द्वारा दिया गया पत्र प्र०पी0203 में नोमलता दीवान द्वारा 25 लाख रूपये दीपक शर्मा, 15 लाख रूपये नीलम शर्मा को ऋण देना एवं करण दीवान की ओर से बागडी नर्सिग होम को 15 लाख रूपये ऋण देने का उल्लेख है, उक्त राशि 55 लाख रूपये आरोपी का व्यय है । 

106. अभियोजन साक्षी सीए राकेश डोडी अ0सा038, सी.ए. भट्टर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0ऎसा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र0पी0171,791 72 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट, स्टेट बेंक रायपुर के कुमार अ0सा038 के पास बुक एवं स्टेंटमेंट प्र०पी084, 85 में आरोपी के एफ डी की राशि नब्बे लाख रूपये, देना बैंक रायुपर के रोहतास सोना अ0सा013 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी064 के एफ डी की राशि 19,08,789,/- है, केनरा बैंक भिलाई के संदीप वर्मा अ0सा023 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी0124, 125 के एफ0डी0 की राशि 15,94,903/-, बैंक आफ बडोदा रायुपर के टेकचंद अऎसा014 के पास बुक व स्टेंट मेंट प्र०पी008 के एफडी की राशि 1,02,957/- है, इस तरह आरोपी का उक्त बेंकों से एफ0डी0 की राशि आलोच्य अवधि में 1,26,06,358,/--रूपये है, जो आरोपी का व्यय है, इसी प्रकार नोमलता दीवान, करण एवं कु०देवयानी के नाम से साउथ इंडियन बैंक कुल तीन एफ0०डी0 प्रत्येक सात लाख अर्थात कुल 21,00,000/-की राशि है जो आरोपी के व्यय में जोडी जाएगी, सीए भट्टर रा दिये गये पत्र प्र०पी0203 एवं नोमलता दीवान की बैलेंस शीट वर्ष 2013-14 प्र०पी0218 के अनुसार रूपये 31,42,552,/-की देना बैंक में एफडी है, जो भी आरोपी का व्यय है, इस तरह आरोपी उसकी पत्नी एवं उसके बच्चों की कुल एफ0डी0 की राशि 1,78,48,610,/--रूपये है, जो आरोपी का व्यय है। 
107. अभियोजन साक्षी सीए राकेश डोडी अ0सा038, सी.ए. भटटर अ0सा040, आयकर निरीक्षक सुशीला अ0सा022 के साक्ष्य आरोपी की ओर से पेश स्टेटमेंट 1,2,3 प्र०पी0171, 172 में दिये गये आयकर विवरण केपिटल एकाउंट बैलेंस शीट, भार०8जीश्न0 बीमा निगम के नगेन्द्र प्रसाद अऎसा021 के द्वारा प्रमाणित बीमा पालिसी का स्टेटमेंट प्र०पी0103 से 111, मैक्सलाइफ इंश्यो0 कंपनी के आशीष गौर अ0सा024 द्वारा प्रमाणित बीमा पालिसी का स्टेटमेंट प्र०पी0126, बजाज अलायंज के डा0अनिमेष पांडे अ0सा033 के बीमा पालिसी का स्टेटमेंट प्र०पी0164, 164ए, 165, 166, भारतीय हैक्सा इंश्यो0क0 के रजत विश्वास अ0सा036 के बीमा पालिसी स्टेट मेंट प्र०पी0179 से 181, रिलायंस इंश्यो0क0 के मृगनेंद्र नरायण अ0सा034 के बीमा पालिसी स्टेटमेंट प्र०पी0167 से 178, अविवा लाइफ इंश्यो0कपनी के ज्योति तुल्सानी अऎसा०25 के बीमा पालिसी स्टेंटमेट प्र०पी0130, 131 के अनुसार आरोपी द्वारा उक्त पालिसियों मेंकुल प्रीमियम रूपये 30,34,739,/-अदा किया है जो उसका व्यय है, इण्डनविश लाइफ इंश्यो0क0 के जितेन्द्र डहाले बीमा पालिसी स्टेटमेंट प्र०पी0132 से 134 के अनुसार आरोपी की पत्नी के नाम की बीमा पालिसी में 1,97,494 /--रूपये प्रीमियम अदा किया गया एवं लडकी देवयानी के नाम की बीमा पालिसी में 1,95,228,/--रूपये प्रीमियम अदा किया गया, इस तरह आरोपी की ओर से कुल बीमा प्रीमियम 34,27,461/--रूपये अदा किया गया जो आरोपी का व्यय है। 108. आरोपी द्वारा स्वयं, अपनी पत्नी नोमलता, पुत्री देवयानी एवं पुत्र करण दीवान के नाम से विकय पत्र प्र०पी038 से 59 के द्वारा रूपये 43,29,120/- तथा विकय पत्र 199 से 162क के द्वारा रूपये 60,45,775 / -कुल रूपये 1,०3,74,89581/-रूपयॅ की भूमि कय की है जो आरोपी का व्यय है। आरोपी के द्वारा 7,74,001/-रूपये एसबीआई से ऋण लेना बताया गया है, जो आरोपी के व्यय में जोडा जावेगा | आरोपी द्वारा स्वयं अपनी पत्नी के नाम से एचआई जी 2358 इंडस्टियल स्टेट भिलाई में खरीदे गये भवनके स्टेटमेंट प्र०पी030 से 3३ की राशि रूपये 9,56,598 /-अदा की गयी है जो आरोपी के व्यय में जोडा जावेगा, आरोपी द्वारा विकय पत्र प्र०पी071 से 75 के माध्यम से अपने स्वयं, पत्नी, पुत्र के नाम से प्लाट एवं मकान कय किया गया है जिसकी राशि 68,00,450 /-उसने अदा किया है जो आरोपी का व्यय है। 
109. आरोपी की पत्नी के नाम पर नैनो कार है जिसका व्यय रूपये 2,00,000/-आरोपी के व्यय में जोडा जायेगा, आरोपी द्वारा आलोच्य अवधि में स्वयं की आय का आयकर रूपये 8,46,384/--रूपये अदा किया है तथा दिलीप दीवान एचयुएफ 5,76,420/-रूपये आयकर अदा किया है, आरोपी की पत्नी के द्वारा 3,12,655/-रूपये आयकर अदा किया गया है जो आरोपी का व्यय है, इस तरह आरोपी के द्वारा आयकर के रूप में रूपये 17,35,459/-अदा किया है जो उसका व्यय है, आरोपी एवं नोमलता दीवान ने अपने पुत्र करण दीवान के पक्ष में गोदनामा प्र0०पी29 लिखे हैं जिसके स्टांप व्यय की राशि रूपये 2,18,700/-आरोपी के व्यय में जोडा जावेगा । 
 110. आरोपी द्वारा दस लष्ठा82 रूपये करूणा सिंह से कर्ज लेना बताया गया है परंतु इस संबंध में कोई सूचना अपने विभाग को नहीं दी है, आरोपी ने ऐसा कोई दस्तावेज भी पेश नहीं किया है जिससे दर्शित हो कि उसने करूणा सिंह से दस लाख रूपये ऋण लिया था, इसलिए आरोपी द्वारा करूणा सिंह से दस लाख रूपये ऋण लेने के संबध में जो वर्णन स्टेटमेट क02 में किया गया है वह विश्वास योग्य नहीं है। 
111. आरोपी के द्वारा अपने स्टेटमेंट क02 में उसे उसकी माता के द्वारा 25 लाख रूपये कैश उपहार देना व्यक्त किया गया है, इस संबंध में ढारत सिंह दीवान अ0सा027 का कथन है कि उसकी स्वयं की पैत्रिक कृषि भूमि ग्राम पत्थरी में है, उसके पिता स्व0 श्री ईश्वर प्रसाद दीवान के तीन संतान है, एक वह स्वयं और उसका छोटा भाई अमृत सिंग दीवान तथा चरोखन का निधन हो चुका है, उसके दादा स्व0 श्री विशाल सिंग की दो संताने थी, बडी उसकी बुआ श्रीमती मीरा दीवान तथा दूसरा मेरे पिता स्व0 श्री ईश्वरी सिंग दीवान थे, उसके दादा के नाम पर कितनी अचल संपत्ति थी मैं नही बता सकता, उसके पिता ईश्वर सिंग के नाम पर ग्राम पत्थरी में कृषि भूमि है, जो लगभग 50 एकड है, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि उसके पिता की मृत्यु वर्ष 2012 में हुई है, उसके पिताजी उसकी बुआ को 25 लाख रूपये दिये थे। 
112. इस साक्षी को अभियोजन द्वारा प्रतिकूल साक्षी घोषित किया गया है जिसमें उसने इस कथन से 8इ'3कार किया है कि उसकी बुआ मीरा बाई को उसके पिता द्वारा पचीस लाख रूपये देने की बात अपनी बुआ से मिलकर बता रहा है तथा इस कथन से भी इंकार किया है कि उसकी पिता ने उसकी बुआ मीरा को पचीस लाख रूपये नहीं दिये, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि पुलिस बयान प्र०पी0135 उससे नहीं लिये गये थे, जब पचीस लाख रूपये दिये गये तो परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे और वह भी मौजूद था। मीरा देवी आरोपी की मां है, उसे उक्त साक्षी ढारत सिंह के द्वारा उसके पिता द्वारा पचीस लाख रूपये उपहार देना बताया है आरोपी द्वारा अपनी मां मीरा बाई से पचीस लाख रूपये नकद उपहार प्राप्त करना बताया है परंतु इस संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है, आरोपी ने उक्त नकद उपहार के संबंध में अपने विभाग को कोई सूचना नहीं दी, इसलिए इस बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता कि आरोपी की मां ने उसे पचीस लाख रूपये नकद उपहार दिया था। 113. आरोपी की ओर से प्रस्तुत स्टेटमेंट नं02 में प्राविडेंड फंड का लाभांश 4,40,580/--रूपये होना बताया गया है परंतु इस संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया है, इसलिए उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता, आरोपी की ओर से प्रस्तुत स्टेटमेंट नं02 में एचयूएफ का केपिटल गेन 72,68,610/-रूपये, स्वयं का केपिटल गेन 13,74,989,/--रूपये दिलीप दीवान एचयूएफ का 81,46,841/--रूपये होना बताया है, परंतु इस संबंध में आरोपी ने अपने आयकर विवरणी में विवरण नहीं दिया है और न ही अपने विभाग को इस संबंध में सूचना दी84है, इसलिए आरोपी द्वारा उक्त आय अर्जित करने के संबंध में किया गया कथन विश्वास योग्य नहीं है । 
114. आरोपी की ओर से प्रस्तुत स्टेटमेंट नं02 में अपनी पत्नी का कोचिंग क्लासेस, ब्याज केपिटल गेन से आय से आय 17,10,917/--रूपये होना बताया है, परंतु आरोपी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है उसकी पत्नी नोमलता दीवान कहां तक पढी है, वह किन और कितने बच्चों को कोचिंग क्लास में पढाती थी, उनसे उसे कितनी आय होती थी, इस संबंध में आरोपी ने अपने विभाग में भी कोई सूचना नहीं दी है, इसके अतिरिक्त आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान का केपिटल गेन आदि के संबंध में अपने विभाग में कोई सूचना नहीं दी है इसलिए आरोपी द्वारा वर्णित उक्त आय विश्वास योग्य नहीं है। 
115. संपदा अधिकारी छ0ग0 गृह निर्माण मण्डल, संपदा प्रबंधन परिक्षेत्र-4, शंकर नगर, रायपुर ए0के0सरकार अऎसा०19 का कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर के द्वारा पत्र दिनांक 19.05.2015 भेजकर गृह निर्माण मण्डल की योजना सड्डू सेक्टर-5ऽ में एम0आर0कुरूवंशी के नाम से निर्मित दुकान कमांक-३, 4 के एग्रीमेंट एवं लीज डीड की मांग की गयी थी, जिसके आधार पर दिनांक 25.05.2015 को प्रशासकीय अधिकारी, छ0ग0 गृह निर्माण मण्डल, मुख्यालय, शंकर नगर, रायपुर के द्वारा कव्हरिंग पत्र के द्वारा उक्त दस्तावेज भेजे गये थे, गृह निर्माण मण्डल की योजना सडडू WEBB—5 में एम0आर0कुरूवंशी के नाम से निर्मित दुकान कमांक-३ एवं 4 का मूल लीज डीड कमश: प्र०पी0-86 एवं 87 है, जो कमश: दस एवं ग्यारह पन्नो में है, जिसके प्रत्येक पेज के अ से अ भाग पर आरोपी के हस्ताक्षर है, एम0आर0कुरूवंशी के नाम पर प्लाट नंबर एचआई जी 22, कचना रायपुर,के एग्रीमेंट एवं लीज डीड की मांग की गयी थी, जिसके आधार पर एम0आर0कुरूवंशी के नाम पर प्लाट नंबर एचआई जी 22, कचना रायपुर का लीज डीड प्र०पी0-91 है, जो 13 पन्नो में है, जिसके प्रत्येक पेज पर आरोपी डी0के0दीवान के हस्ताक्षर है, एम0आर0कुरूवंशी के नाम पर सेडार-1,/123 बोरियाकला रायपुर का लीज डीड प्र०पी0-92 है, जो 12 पन्नों में है, जिसके प्रत्येक पेज पर आरोपी डी0के0दीवान के हस्ताक्षर है। 
116. उक्त साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि उपरोक्तानुसार लीज डीड तीस वर्षो की होती है, यदि लीज डीड का पालन उन्हें लेने वाले नहीं करते हैं तो हाउसिंग बोर्ड लीज डीड निरस्त कर देता है, इस तरह उक्त साक्षी के उक्त कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, जिससे दर्शित होता है कि उक्त दस्तावेज प्र०पी086, 87, 91 एवं 92 हाउसिंग बोर्ड द्वारा निष्पादित किया गया था तथा एमआर कुरूवंशी की ओर से आरोपी ने उक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किया था। 
117. लीज डीड प्र०पी086 अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 19 जुलाई 2006 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा सड्डू स्थित दुकान कमांक-३ के संबंध में निष्पादित किया86 गया था और उक्त दुकान को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 2,78,116,/--अदा की गयी, जिसमें से चेक द्वारा 24,000/- एवं शेष राशि 2,54,116,/-नकद अदा की गयी, उक्त सभी नकद राशि आरोपी द्वारा अदा किया जाना बताया गया है, लीज डीड प्र०पी087 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 19 जुलाई 2006 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा सड्डू स्थित दुकान कमांक-4 के संबंध में निष्पादित किया गया था और उक्त दुकान को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 2,78,116,/--रूपये अदा की गयी उक्त दोनों दुकान क0३3 एवं 4 की राशि का भुगतान फरवरी 2006 से अक्टूबर 2006 एवं 08 फरवरी 2008 को किया गया, जिसमें से चेक द्वारा रूपये 24,000/-, 24,000 एवं शेष राशि 2,54,116/-, रूपये 2,54,116/-नकद अदा की गयी, उक्त सभी नकद राशि आरोपी द्वारा अदा किया जाना बताया गया है, लीज डीड प्र०पी090 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 07 अगस्त 2010 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा ब्लॉक कमांक-10 के एलआईजी 159, अवंति विहार तेलीबांधा रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था जिसमें उक्त प्लाट को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 2,99,874/-रूपये नगद आरोपी के द्वारा मार्च 2008 से जून 2008 के मध्य अदा की गयी। 


118. लीज डीड प्र०पी091 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 26 मई 2009 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा सड्डू स्थित प्लाट कमांक-एचआई जी-22 कचना रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था और उक्त प्लाट को लीज87 पर लेने के लिए कुल राशि 35,76,930/-रूपये सितंबर 2008 से जुलाई 2009 एवं 09.05.2011 तथा दिनांक 1.07.2011 को अदा की गयी, जिसमें से उक्त सारी राशि आरोपीद्वारा नकद अदा की गयी, लीज डीड प्र०पी092 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 08 जुलाई 2010 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्व [रा सड्डू स्थित प्लाट कमांक-शेडर ((1)^1२) आई ,/123 बोरियाकला रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था और उक्त प्लाट को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 24,08,493 /--रूपये जिसमें से मई 2010 से जुलाई 2010, 12 सितंबर 2011 27.02.2012, 18.10.2012 को अदा की गयी, जिसमें से 1,93,500/-चेक द्वारा एवं शेष नकद आरोपी द्वारा अदा किया गया, इस तरह उक्त दस्तावेज प्र०पी086, 87, 91, 92 के द्वारा रूपये 65,41,655,/-में से 48,000,/-चेक द्वारा एवं शेष राशि फरवरी 2006 से अक्टूबर 2006 एवं फरवरी 2008 में रूपये 5,56,232,/-तथा 2008 से 2012 के बीच लगभग 59,85,423 /--रूपये हाउसिंग बोर्ड को आरोपी द्वारा अदा किया जाना बताया गया है। 
119. बचाव साक्षी मोहित राम कुरूवंशी ब0०सा03 का कथन है कि दिलीप दीवान उसका बडा दामाद है, उसकी ग्राम सरसेनी जिला बलौदाबाजार में 3 एकड जमीन है तथा ग्राम नेवरा में 3 एकड 35 डिसमिल दो फसली जमीन है, उसकी सेवानिवृत्ति पर उसे सीपीएफ का 15 लाख रूपये मिला था, उसमें से उसने 6 लाख रूपये पोस्ट ऑफिस में जमा किया था जिसका ब्याज उसे 1 लाख 27 हजार88 रूपये मिला था, उसने सीपीएफ की राशि में से 5 लाख रूपये अपने दामाद आरोपी को रोलिंग के लिये दिया था, उसने उक्त राशि में से सड्ढू में भवन निर्माण योजना के अंतर्गत वर्ष 2006 में दुकान खरीदा था, उसी पीरियड में वर्ष 2006 में सड्ढू में एक मकान और खरीदा था जिसका नंबर एलआईजी 734 था, उसने वर्ष 2009 में कचना में एक मकान खरीदा था और 2010 में बोरिया कला में एक मकान खरीदा था जिसका नंबर 1,123 है, वह मकान खरीदने का पैसा आरोपी को दे देता था आरोपी पैसा पटाकर रसीद अपने पास रख लेता था, वर्ष 2011 में उसने सड्दू के मकान को 15 लाख नगद में श्रीमती सत्यभामा बंछोर को बेचा था, उस राशि को उसने आरोपी के पास रखवा दिया था, वह स्वदेशी कंपनी में काम करता था जिसमें उसे 1 लाख रूपये मिला था, वह प्रगति इंडिया में राशि जमा किया था जहां से उसे 5 लाख 58 हजार रूपये चेक के माध्यम से मिला था जिसकी फोटो प्रति उसने नेगी साहब को दिया था। 


120. एम आर कुरूवंशी ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि उसकी 4 लडकियां और 1 लडका है, जो सभी शादीशुदा है, वह आरोपी के अतिरिक्त अपने किसी अन्य दामाद को कोई राशि इन्वेस्टमेंट के लिये नहीं दिया था, उसे सीपीएफ से जो राशि प्राप्त हुई थी उसमें से कोई भी राशि अपने लडके को नहीं दिया था तथा स्वीकार किया है कि उसने मकान और दुकान खरीदना बताया है वह स्ववित्तीय योजना के अंतर्गत कय किया हैं, जिन मकान और दुकान को उसने ख्मी89दा था उसका पैसा आरोपी को दिया था उसका कब्जा भी आरोपी के ही पास था, उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि स्ववित्तीय योजना के अंतर्गत मकान या दुकान कय करने पर उसकी राशि का भुगतान एकमुश्त करना पडता है स्वत: कहा कि मैंने किश्तों में मकान खरीदा था तथा स्वीकार किया है कि उसने जो मकान कय किया है उसमें वर्ष में एक बार किश्त अदा करना होता है, किश्त चेक के माध्यम से भी जमा होती है, उसने अपने पास रखे रकम से 5 लाख एवं पंद्रह लाख रूपया आरोपी को दिया था, उसकी लिखापढी नहीं किया था, इस कथन से इंकार किया है कि उसने आरोपी से रूपये देने के संबंध में इसलिये लिखापढी नहीं किया क्योंकि उसने आरोपी को रूपये नहीं दिया था, उसने जो दुकाने वर्ष 2006 में खरीदी थी उसका मूल्य 42000/- 42000/- रूपये था, वह नहीं बता सकता कि 42000/- रूपया उक्त दुकानों का मूल्य नहीं था बल्कि किश्त थी। 
121. एमआर कुरूवंशी ने इस कथन से इंकार किया है कि सत्यभामा ने उसे चेक के माध्यम से राशि का भुगतान किया था, उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि गृह मंडल से मकान बेचने की अनुमति लेना पडता है, यह कहना गलत है कि सारी कार्यवाही आरोपी द्वारा की गई थी इसलिये मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि मकान बेचने के पहले गृह मंडल से अनुमति लेना पडता है, यह कहना सही है कि मैंने गृह निर्माण मंडल से जितनी भी संपत्ति खरीदी है उसके फार्म भरने एवं अन्य सारी कार्यवाहियां आरोपी द्वारा की गई है, यह कहना गलत90 है कि मैं कभी गृह निर्माण मंडल नहीं गया स्वत: कहा कि बुलाने पर जाता था। यह कहना गलत है कि सारे मकान आरोपी के थे उसमें मेरा सिर्फ नाम ही था। इस साक्षी ने स्वीकार किया है कि उसने श्री नेगी को स्वदेशी कंपनी और प्रगति इंडिया में नौकरी करने के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं दिया था स्वत: कहा कि मैं वहां नौकरी नहीं करता था, जबकि उसके द्वारा अपने परीक्षण में नौकरी करना बताया है साक्षी ने स्वदेशी कंपनी एवं प्रगति इंडिया के संबंध में कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया है इसलिए उक्त संबंध में साक्षी द्वारा किया गया कथन विश्वास योग्य नहीं है। 
122. एम0आर0 कुरूवंशी द्वारा 2006 में 42,000,/-, 42,000 में दो दुकान खरीदना बताया है परंतु प्र०पी086 एवं 87 के अनुसार उसकी कीमत कमश: रूपये 2,78,116/- एवं रूपये 2,78,116/-है, इसलिए कुरूवंशी द्वारा 42,000 /-, 42,000/- में उक्त दोनों दुकान खरीदने की बात सही नहीं है, उसने अपने दामाद को पांच लाख एवं पंद्रह लाख रूपये देना बताया है परंतु प्र०पी091 एवं 92 के प्लाट की कुल कीमत लगभग साठ लाख रूपये है इसलिए भी एमआर कुरूवंशी द्वारा अपने दामाद आरोपी को उक्त प्लाट खरीदने हेतु राशि देने संबंधी कथन सही नहीं है, एम0आर0कुरूवंशी द्वारा सत्यभामा को एक दुकान बेचना बताया है परंतु उस संबंध में कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, एमआर कुरूवंशी ने कृषि से आय होना एवं आयकर दाता होना भी बताया है परंतु उस संबंध में भी कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है इसलिए91 एमआर कुरूवंशी द्वारा आरोपी का राशि दिये जाने संबंधी कथन विश्वास योग्य नहीं है, उक्त चारों संपत्ति की अधिकतम राशि आरोपी द्वारा हाउसिंग बोर्ड में अदा कीगयी है जो यही दर्शित करता है कि उक्त चारों संपत्तियों की अधिकतम नगद राशि आरोपी ने ही 59,85,423 /--रूपये देकर कय किया है, जो उसके व्यय में सम्मिलित किया जावेगा। 123. ए0के0सरकार का यह भी कथन है कि प्रथम तल दीनदयाल आवास योजना अंवति विहार तेलीबांधा, रायपुर, रूपेश दाउ के नाम पर अवंति विहार फ्लैट नंबर एलआई जी-159,/10 के एग्रीमेंट एवं लीज डीड की मांग की गयी थी, जिसके आधार पर रूपेश दाउ के नाम पर अवंति विहार फ्लैट नंबर एलआई जी-159,/10 का एग्रीमेंट प्र०पी0-89 है जो 09 पन्नों में है एवं सेल डीड प्र0०पी0-90 है, जो 16 पन्नो में है, जिसके प्रत्येक पेज पर आरोपी डी0के0दीवान के हस्ताक्षर है, उक्त संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, एग्रीमेंट प्र०पी089 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 07 अगस्त 2008 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा रूपेश दाउ के नाम मकान कमांक-एलआईजी 159 ब्लाक नंबर 10 थर्ड फ्लोर, अवंति विहार तेलीबांधा रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था, जिसमें उक्त प्लाट को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 2,99,874/-रूपये नगद आरोपी के द्वारा 12 मार्च 2008 से 06.06.2008 के मध्य अदा की गयी। 
124. बचाव साक्षी रूपेश दाउ92 ब0सा02 का कथन है कि उसे डी0एस0 नेगी ने एक नोटिस प्र०डी-5ऽ भेजा था, जिसके बाद वह 29.05. 2015 को एसीबी कार्यालय में श्री नेगी के सामने उपस्थित हुआ, उसके मकान का दस्तावेज आरोपी के घर में मिला था जिसके संबंध में उसे श्री नेगी ने बुलाया था, उसके मकान का कमांक एल आई जी 159 अवंति विहार तेलीबांधा रायपुर का है, आरोपी उसके मामा लगते हैं, उसने आरोपी को थोडा-थोडा पैसा दिया जो कि उसकी कृषि आय से अर्जित की गयी है, आरोपी के द्वारा उक्त मकान खरीदा गया, आरोपी का उक्त मकान से कोई लेना-देना नहीं है पैसा उसके द्वारा दिया गया, उसके द्वारा शपथ पत्र भी दिया गया था और कृषि भूमि के दस्तावेजों की फोटोकापी भी दिया था तथा बताया है कि उसकी खेती में साल में तीन बार फसल होती थी। 


125. इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि अगस्त 2008 में रजिस्टी हुई थी वह 2007 तक बेरोजगार था, पैतृक भूमि उसे वर्ष 2002 से 2004 के बीच मिली थी, 2003 में कृषि मंडी में अनाज बेचने पर चेक से भुगतान होता था, उसने एसीबी को कृषि उपज उत्पादन होने, विकय होने, हिसाब किताब एवं पासबुक नहीं दिया था उसके पास पैसा रहता था तब वह आरोपी को देता था, उसने किश्तों में राशि अदा किया था, उसे जानकारी नहीं है कि मकान की किश्त कितनी थी इस कथन से इंकार किया है कि रजिस्टी उसने अपने पास इसलिए नहीं रखी क्योंकि मकान को आरोपी ने खरीदा था, छत्तीसगढ में दो फसल का प्रावधान है, इस साक्षी विर्शषप्र०क०-812/2015 के द्वारा उसके पास कितनी जमीन है, उसे कितनी उपज मिलती है एवं कितनी आय प्राप्त करता था इस बाबत कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है उसने कब-कब कितनी राशि आरोपी को दी यह भी नहीं बताया है ऐसा काई दस्तावेज भी पेश नहीं किया है कि जिससे दर्शित हो कि उसने आरोपी को कोई राशि दी है, जबकि सेल डीड प्र०पी090 के अनुसार रूपेश दाउ के नाम से खरीदे गये प्लाट की संपूर्ण राशि कुल राशि 2,99,874 / -रूपये नगद आरोपी के द्वारा 12 मार्च 2008 से 06.06.2008 के मध्य अदा की गयी, जबकि इस साक्षी द्वारा 2000 से 2008 के बीच आरोपी को पैसा देना बताया गया है जो विश्वास योग्य नहीं है, अत: उक्त प्लाट को आरोपी द्वारा रूपेश दाउ के नाम से कय करना प्रमाणित होता है जिसकी राशि रूपये 2,99,874 /- आरोपी के व्यय में जोडा जायेगा। 
126. ए0के0सरकार का यह भी कथन है कि बी0एस0दीवान एवं श्रीमती उर्मिला पैकरा के नाम पर धारित फ्लैट नंबर 152, प्लाट नंबर एलआईसी ब्लाक नंबर 10, के एग्रीमेंट एवं लीज डीड की मांग की गयी थी, जिसके आधार पर बी0एस0०दीवान एवं श्रीमती उर्मिला पैकरा के नाम पर धारित फ्लैट नंबर 152, प्लाट नंबर एलआई जी ब्लाक नंबर 10, प्रथम तल दीनदयाल आवास योजना अंवति विहार तेलीबांधा, रायपुर का लीज डीड प्र०पी0-88 है, जो 11 पन्नों में है, जिसके प्रत्येक पेज पर आरोपी डी0के0दीवान के हस्ताक्षर है, उक्त संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, लीज डीड प्र०पी088 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 21 मार्च 200964 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा बीएस दीवान एवं उर्मिला पैकरा के नाम प्लाट कमांक-152 अवंति विहार तेलीबांधा रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था जिसमें उक्त प्लाट को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 2,58,061,/--रूपये नगद आरोपी के द्वारा नवंबर 2004 से अक्टूबर 2005 के मध्य तथा दिनांक 08.07.2006 एवं दिनांक 23.02.2007 को अदा की गयी, उक्त संबंध में उक्त साक्षी के कथन प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, आरोपी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है जिससे दर्शित हो कि उक्त प्लाट की राशि का भुगतान बीएस दीवान एवं उर्मिला ने उसे दिया हो, न ही उर्मिला का कथन करवाया है जबकि संपूर्ण राशि भुगतान आरोपी ने किया है, इसलिए उक्त राशि आरोपी द्वारा अदा करना दर्शित होता है जो उसके व्यय में जोडी जायेगी। 
127. ए0के0सरकार का यह भी कथन है कि श्रीमती करूणा सिंह हाउस नंबर बनयान--1,/50, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी बोरियाकला, रायपुर के एग्रीमेंट एवं लीज डीड की मूल प्रति की मांग की गयी थी, जिसके आधार पर श्रीमती करूणा सिंह हाउस नंबर बनयान-1,/50, हाउसिंग बोर्ड कॉ लोनी बोरियाकला, रायपुर के लीज डीड प्र0०पी0-93 है, जो 21 पन्नों में है, जिसके प्रत्येक पेज पर आरोपी डी0के0दीवान के हस्ताक्षर है, उक्त संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, लीज डीड प्र०पी093 के अवलोकन दर्शित होता है कि वह दिनांक 05 फरवरी 2013 को हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर द्वारा श्रीमती करूणा सिंह के नाम हाउस नंबर विर्शषप्र०क०-812/2015 बनयान-1/5०,हाउसि'गबोर्ड कॉंलांनी95 बोरियाकला, रायपुर के संबंध में निष्पादित किया गया था, जिसमें उक्त प्लाट को लीज पर लेने के लिए कुल राशि 48,28,616/-रूपये नगद आरोपी के द्वारा फरवरी 2011 से सितंबर 2011 के मध्य एवं दिनांक 12.01.2012, दिनांक 16.01.2013 एवं दिनांक 31.01.2013 को अदा की गयी। बचाव साक्षी एमआर कुरूवंशी ने इस कथन से इंकार किया है कि उसकी लडकी करूणा शादी के बाद शिक्षा कर्मी में नौकरी लगी थी। 
128. मुकेश कुमार सिंह अ0सा039 का कथन है कि आरोपी के घर छापे में तलाशी के दौरान उसकी पत्नी के नाम का हाउसिंग बोर्ड कालोनी बोरियाकला रायपुर के मकान नंबर बनयान 150 कीमती 48 लाख के कागजात मिले थे, उसने अपनी पत्नी को मकान खरीदने में सहयोग किया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि वह शासकीय कर्मचारी है और अपनी पत्नी के नाम से मकान खरीदने की सूचना अपने विभाग में दिया था, बचाव साक्षी एमआर कुरूवंशी ने इस कथन से इंकार किया है कि उसकी लडकी करूणा शादी के बाद शिक्षा कर्मी में नौकरी लगी थी। मुकेश ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि वह शासकीय कर्मचारी है और अपने विभाग में उसकी सूचना दी है इंकार किया है कि मकान को उसकी पत्नी के नाम से उसके साढू दिलीप दीवान ने खरीदा है तथा प्रतिपरीक्षण में बताया है कि उसकी पत्नी शिक्षा कर्मी है जिसकी पृथक से आय है उसने मकान अपनी एवं पत्नी की आय से खरीदा है तथा मकान खरीदने में किसी ने कोई सहयोग नहीं किया है, इस तरह मुकेश सिंह एवं करूणा सिंह के शासकीय कर्मचारी हाने और उनके द्वारा अपनी आय से उक्त मकान खरीदा जाना दर्शित होताहै जो आरोपी के व्यय में नहीं जोडा जायेगा । 
129. बचाव साक्षी नारायण अग्रवाल ब0०सा04 का कथन है कि उसे डीएसपी नेगी ने एसीबी कार्यालय में बयान के लिये बुलवाया था, उसने डी.एस.नेगी को अपना एकाउंट स्टेटमेंट की प्रति, शपथ पत्र, लेजर एकाउंट एवं मेरे द्वारा हाउसिंग बोर्ड में काम किये जाने के संबंध में वर्क आर्डर की कापी दिया था, वह हाउसिंग बोर्ड में ठेकेदारी का काम करता है, उसने दो साल पहले 13 या 14 फरवरी को बैंक से 5 लाख रूपये निकाला था उसे रूकना पड गया इसलिये उसने आरोपी को 4 लाख 70 हजार रूपया यह कहते हुए दिया कि सुबह ले लेगा, अब साक्षी कहता है कि 11 वां महिना था, मुझे सुबह पता चला कि आरोपी के यहां छापा पडा है, इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि वह हाउसिंग बोर्ड कालोनी बोरसी, दुर्ग छ.ग. में रहता है, वह उस दिन सुबह 9.30-10 बजे घर से निकला था, वह सुपेला के एचडीएफसी बैंक से पैसा निकाला था, 5 लाख रूपया बैंक से निकालते समय उसे 1000/- रूपये के 5 बंडल दिये थे, वह उस दिन शाम के लगभग 4 बजे आरोपी से मिला था, वह बोरिया कला साईड में ही रात में रूका था तथा स्वीकार किया है कि काम होने के बाद लोगों को भुगतान करना पड्ता है, साक्षी यह भी बताता है कि ढलाई वाले मजदूर काम के तुरंत बाद पैसा लेते हैं तथा ढलाई रात भर चली इसलिये काफी बडा काम था और बहुत सारे मजदूर लगे हुए97 थे, 5 लाख रूपया वह खर्चे और श्रमिकों के भुगतान के लिये निकाला था। 
130. इस साक्षी के कथन से यह प्रमाणित हआ है कि वह हाउसिंग बोर्ड में मकान बनाने की ठेकेदारी कार्य करता है, उसके द्वारा पांच लाख रूपये बैंक से निकाला गया, उस दिन बहुत बडी ढलाई का काम था और ढलाई वाले मजदूरों को तुरंत पैसा देना पडता है, उसके खर्चे एवं श्रमिकों के भुगतान के लिए उसके द्वारा पांच लाख रूपये निकाला गया था, इसलिए जब मजदूरों की राशि देने के लिए बैंक से पैसा इस साक्षी द्वारा निकालना बताया गया तो आरोपी को रखवाने के लिए पैसा देने संबंधी कथन विश्वास योग्य नहीं है, आरोपी के भिलाई स्थित मकान मेंछापा मारा गया था जहां से राशि जब्त हुई थी इसलिए इस साक्षी द्वारा आरोपी को चार लाख सत्तर हजार रूपये दिये जाने संबंधी कथन विश्वास योग्य नहीं है, इसलिए उसका कोई लाभ आरोपी को प्राप्त नहीं होता | 
131. आरोपी की ओर से बचाव साक्षी के रूप में विद्याभूषण ब0सा01 का कथन कराया गया है जिसने कथन किया है कि टीवीएस स्कूटी पेप उसने 2004 में लिया था, उसने उक्त वाहन को भिलाई से कय किया था और आने जाने के कारण उक्त वाहन कण्डम थी, उक्त वाहन को बेचने के लिए और उसकी अच्छी कीमत मिल जाये इसलिए उसे स्मृति नगर भिलाई में आरोपी के घर छोड दिया था, उक्त गाडी का नंबर सी.जी.07 के / 1006 था, उसने एसीबी को उपरोक्त कथन? संबंध में शपथ पत्र भी दिया था, इस साक्षी के पेप वाहन को आरोपी की आय व्यय की गणना में नहीं लिया गया है। 
132. शोएब अहमद खान अ0सा042 का कथन है कि वह दिसम्बर-2014 से एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ है, उसे अपराध कमांक 50 /2014 की डायरी विवेचना में प्राप्त होने पर उसने उप पुलिस अधीक्षक श्री नेगी द्वारा तैयार विवेचना प्रतिवेदन जिसमें आरोपी की चल एवं अचल संपत्ति की जांच के दस्तावेजो का अवलोकन करने के उपरांत, उसने आरोपी के विरूद्ध चालान तैयार किया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि अभियोग पत्र के अनुसार आरोपी की चल-अचल संपत्ति की संक्षेपिका-01 प्र०पी0-285 आलोच्य अवधि के पूर्व के लिए आरोपी, आरोपी की पत्नी एवं अन्य का व्यय आरोपी की आय की तुलना में 2,06,505,/- रूपये ज्यादा थी, जिसके अनुसार आरोपी की चल-अचल संपत्ति संक्षेपिका-02 प्र०पी0-286 आलोच्य अवधि के लिए आरोपी, आरोपी की पत्नी एवं अन्य का व्यय उसके आय की तुलना में 7,73,51,876/- रूपये ज्यादा था। 133. डीएसपी शोएब अहमद का यह भी कथन है कि उक्त अवधि में आरोपी, आपकी पत्नी एवं अन्य की आय 2,03,60,966,/- रूपये थी, जिसकी तुलना में व्यय रूपये 9,77,12,842/- पाया गया था, इस तरह आय की तुलना में व्यय रूपये 7,73,51,876/- अधिक होना पाया गया था, उक्त विर्शषप्र०क०-812/2015 साक्षी का यह भी कथन है कि स'क्षेपिका99-०3 प्र०पी0-287 है, जिसमें संपूर्ण सेवा अवधि के आय-व्यय का संक्षेपिका कमांक-03 तैयार किया गया, जिसमें आलोच्य अवधि पूर्व की बचत आरोपी, आरोपी की की पत्नी एवं अन्य की आय निरंक मानी गयी तथा आलोच्य अवधि में आरोपी की आय 2,00,42,537/-रूपये, आरोपी की पत्नी की आय 3,18,429,/- रूपये तथा अन्य की आय 73,371 कुल आय 2,03,60,966,/--रूपये होना पाया गया, इसी प्रकार आलोच्य अवधि में आरोपी का व्यय 6,13,67,012,/-रूपये, आरोपी की पत्नी का व्यय 1,43,08,646,/--रूपये तथा अन्य का व्यय 2,20,37,184 /-रूपये कुल व्यय 9.77,12,842/-रूपये होना पाया गया, जिसके अनुसार आरोपी की कुल संपत्ति 479 प्रतिशत होना पाया गया तथा अनुपातहीन संपत्ति आय की तुलना में 379 प्रतिशत होना पाया गया । 


134. शोएब अहमद ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि श्री नेगी द्वारा बनाये गये विवेचना प्रतिवेदनमें तैयार संक्षेपिका एवं उसके द्वारा तैयार की गयी संक्षेपिता प्र०पी0285 से 287 में कोई भिन्नता नहीं है, उसने पृथक से कोई जांच नहीं की परंतु इस कथन से इंकार किया है कि उसके द्वारा आय-व्यय की गणना अंदाज से त्रुटिपूर्ण की गयी है, उसनें इंकार किया है कि उसने एवं नेगी ने वेतन की आय को जोडा है अन्य आय को नहीं जोडा है, इस कथन से भी इंकार किया है कि अंदाज से संक्षेपिका में मूल्य दर्ज किया है तथा इस कथन से इंकार किया है कि आरोपी की आय से उसका व्यय 379प्रतिशत अधिक नहीं है, प्रकरणमें आरोपी की 100 उपरोक्तानुसार आय एवं व्यय की गणना की गयी है इसलिए उक्त साक्षी के प्रतिपरीक्षण का कोई लाभ आरोपी को प्राप्त नहीं होता। 
135. आरोपी का व्यय निम्ननुसार होना पाया गया है, 1. बचत खाते का शेष रूपये 31,68,833/- 2. एफडी खाते का शेष रूपये 1,78,48,610/- 3. बीमा के प्रीमियम की राशि -- रूपये 34,27,861 /- 4. आयकर की राशि रूपये 17,35,459/- 5. कृषिभूमि कय में हुआ व्यय रूपये 1,03,74,895 /- 6. आरोपी के परिवार के सदस्यों का जुनवानी दुर्ग में प्लाट व मकान कय की राशि रूपये 68,00,450 /- 7. आरोपी व उसकी पत्नी के नाम पर एचआई जी 2358 भिलाई, कय की राशि रूपये 9,56,598/- 8. आरोपी द्वारा एमआर कुरूवंशी के नाम से कय दुकान,/मकानों की राशि रूपये 59,85,423 /-- 9. आरोपी द्वारा रूपेश दाउ के नाम से कय मकान की राशि रूपये 2,99,874/- 10. आरोपी द्वारा उर्मिला पैंकरा एवं बीएस दीवान के नाम से कय प्लाट की राशि रूपये 2,58,061 /- 11. आरोपी की पत्नी नोमलता दीवान 101 के नाम से हाउसिंग बोर्ड बोरियाकला में कय प्लाट की राशि रूपये 14,13,090 /- 12. आवास ऋण भुगतान रूपये 7,74,001/- 13.दान पत्र निष्पादन में स्टांप रूपये 2,18,700/- 14. नकद राशि रूपये 18,14,150 /- 15. सोने-चांदी के जेवरात की राशि रूपये 19,95,211 /-- 16. नोमलता एवं करण द्वारा दीपक, नीलम और बागडी नर्सिग होम को दिया गया ऋण रूपये 55,00,000 /- कुल व्यय का योग -- रूपये 6,25,71,208 /- 
136. इस तरह प्रकरण में आरोपी की कुल आय रूपये 1,11,63,113/- होना पायी गयी है, जबकि उसके द्वारा उक्त आय के विरूद्ध व्यय 6,25,71,208 /--रूपये किया जाना प्रमाणित हुआ है, इस प्रकार आरोपी के द्वारा 5,14,08,095 /--रूपये की अनुपातहीन संपत्ति धारित किया जाना प्रमाणित होता है। 
137. प्रकरण की परिस्थितियों के अनुसार आरोपी ने करोडों रूपये की अचल संपत्तियां नगद कय की है, इसलिए इस पर विचार करने में यह भी विचार किया जाना आवश्यक है कि आरोपी के पास इतनी नकद राशि कहां से आयी? आरोपी की ओर से छ0ग0 गृह निर्माण मंडल से खरीदी गयी सेल डीड, लीज डीड की प्रतियां प्रस्तुत की गयी हैं जिनमें छ0ग0 गृह निर्माण मंडल की ओर से आयुक्त / उपायुक्त द्वारा सेल डीड, विकय पत्र या अन्य दस्तावेज निष्पादित किये जातं1 0हें2', वर्तमान प्रकरण में यह प्रमाणित हुआ है कि आरोपी आलोच्य अवधि अप्रेल 2004 से 2014 तक छ0ग0 गृह निर्माण मंडल संभाग कमांक-2 में उपायुक्त के पद पर पदस्थ था, शासन के द्वारा टी.वी. रेडियो एवं समाचार पत्रों में किये जा रहे विज्ञापन के अनुसार छ0ग0 गृह निर्माण मंडल द्वारा लाखों रूपये से लेकर करोडों रूपये मूल्य के विभिन्न प्लाट, मकानों का निर्माण किया जा रहा है और वे आम जनता के लिए विकय हेतु प्रस्तावित किये जाते हैं तथा सेल डीड, एग्रीमेंट लीज डीड या अन्य दस्तावेज का निष्पादन आयुक्त /उपायुक्त छ0ग0 गृह निर्माण मंडल की ओर से किया जाता है। 
138. आरोपी जिस अवधि में संभाग क०02 में पदस्थ था, उस अवधि में छ0ग0 गृह निर्माण मंडल की अनेकों योजनाएं संचालित थीं, आरोपी से प्राप्त नगद से यही प्रमाणित होता है कि उसके द्वारा छ0ग0 गृह निर्माण मंडल की ओर से प्लाट, मकान विकय करने पर केताओं से अवैध राशि की वसूली की जाती रही है, प्रकरण में यह भी अवलोकनीय है कि छ0ग0 गृह निर्माण मंडल के सचिव स्तर से आयुक्त तक सभी वरिष्ठ अधिकारी रायपुर में ही हैं, मुख्यालय भी रायपुर में है और आरोपी द्वारा इतने लम्बे समय तक करोडों रूपये की राशि अवैध रूप से अर्जित कर उस राशि से अचल संपत्तियां कय करना, विभिन्न बैंकों में राशि विनियोजित करना यही दर्शित करता है कि हमारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार इतना बढ गया है, जिससे आम जनता त्रस्त है जो अत्यंत ही चिंताजनक है। 
139. अवधारणीय प्रश्न कमांक-(2) एवं (3) पर निष्कर्ष एवं निष्कर्ष के कारण :- दोनों अवधारणीय प्रश्न एक दूसरे से संबंधित होने से दोनों का निराकरण एकसाथ किया जा रहा है, भृत्य छ0ग0 हाउसिंग बोर्ड कार्यालय, रायपुर श्रीराम चौहान अ0सा028 का कथन है कि वह वर्ष 1994 से पदस्थ है, वह आफिस में आवक-जावक का कार्य भी देखता था, एसीबी वाले उसे अदालत लेकर आये और वहां पूछताछ कर उसका बयान लिये थे तथा उससे आवक-जावक रजिस्टर आर्टिकल ए--1 से ए--6 जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी027 तैयार किये थे, बाद में उससे आवक-जावक के चार रजिस्टर आर्टिकल ए--7 से ए-10 जब्त कर जब्ती पत्र प्र०पी0136 तैयार किये थे।
140. भृत्य छ0ग0हाउसिंग बोर्ड मुख्यालय शंकर नगर रायपुर परमानंद साहू अ0ऎसा06 का कथन है कि वह दिनांक 06.06.2012 से पदस्थ है, वह श्री राम चौहान को जानता है, एसीबी वाले उनके कार्यालय में आये थे और श्रीराम से कुछ रजिस्टर लिये थे जिसका जब्ती पत्र प्र०पी027 है, डी0एस0नेगी का यह भी कथन है कि उसने दिनांक 15.05.2015 एवं 19.05. 2015 को कार्यालय छ0ग0हाउसिंग बोर्ड, मुख्यालय शंकर नगर, रायपुर से श्रीराम चौहान के पेश करने पर रजिस्टरों को गवाहो के समक्ष जप्त कर जप्ती पत्र प्र०पी0-27 एवं 136 तैयार किया था, परमानंद साहू ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि वह रजिस्टर को बिना देखे उसकी तारीख, माह और वर्ष के बारे में नही बता सकता, उक्त जप्ती पत्र के संबंध में उक्त साक्षियों के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखण्डित रहे है, क्लिंषप्र0क0-812/2०15 जिससे यह प्रमाणित पाया जाता है कि104 जप्ती पत्र प्र०पी0-27 के माध्यम से श्रीराम से एसीबी के डीएस नेगी ने रजिस्टर आर्टिकल-ए--1 से ए--6 एवं ए-7 से ए-10 जप्त किया गया। 


141. प्रशासकीय अधिकारी छ0ग0गृह निर्माण मण्डल, मुख्यालय, रायपुर जी0एम0 अंसारी अ0सा०37 का कथन है कि आरोपी के द्वारा अचल संपत्ति विवरण की छाया प्रति प्रस्तुत किया है, जो कि इस कार्यालय में पूर्व में प्राप्त नहीं है, उक्त पत्र के साथ उसने अपने कार्यालय में आरोपी द्वारा प्रस्तुत किये गये पत्र एवं दस्तावेज की प्रति भी भेजा था, जो प्र०पी0-183 से 191 है, उक्त साक्ष्य के संबंध में उक्त साक्षी के कथन उसके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं, प्र०पी0183 से 191 के दस्तावेजों से प्रमाणित पाया जाता यहै कि आरोपी द्वारा वर्ष 2007 से दिसंबर 2011 तक अपनी अचल संपत्ति का विवरण अपने विभाग छ0ग0हाउसिंग बोर्ड को दिया था। 
142. भृत्य श्रीराम चौहान का यह भी कथन है कि छब्लू ठाकुर द्वारा लाये गये पत्र की पावती उसे दिया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि आयुक्त द्वारा जिन अधिकारियों को डाक आने पर भेजे जाने के लिए मार्क करते थे, वह उस आधार पर डाक बुक में उस पत्र का नंबर एवं दिनांक इंद्राज करता था तथा पत्र में आवक डाक बुक का नंबर एवं दिनांक डालकर संबंधित अधिकारी को भेजता था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि उसने छबलू ठाकुर द्वारा लाये गये पत्र की पावती उसे दिया था और पत्रों 105 का इंद्राज रजिस्टर में नहीं किया था, छबलू ठाकुर को पावती देने के बाद वह चला गया था, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि आरोपी का चपरासी छबलू ठाकुर उसके समक्ष दिनांक 20.10.2009, 30.06.2010, 18.04.2011, 02. 03.2012, 15.06.2012, 03.01.2013 एवं 10.01.2014 का अंग्रेजी में लिखा हुआ पत्र एक प्रति में लेकर आया था और उसे साईन करके देने के लिए कहा, तब वह छबलू ठाकुर के द्वारा लाये गये पत्रों पर सील लगाकर उसे दिया था, उपरोक्त पत्र उसके उच्चाधिकारी का था इस कारण से उसने उन पत्रों पर हस्ताक्षर एवं सील लगाकर दे दिया, आयुक्त के पास वह पत्र नही पहुंचा था और न ही वहां से मार्क होकर उसके पास आया था, इस कारण से आवक-जावक रजिस्टर में इसकी प्रविष्टि नही हो पायी, उक्त साक्षी का यह भी कथन है कि उसे पत्र दिखाये जाने पर उसके संबंध में याद आया। 
143. भृत्य छ0ग0हाउसिंग बोर्ड कार्यालय शंकर नगर छबलू राम ठाकुर अऎसा032 का कथन है कि वह आरोपी के पास कार्य करता था, वह श्रीराम चौहान को भी जानता हूं, वह आवक-जावक शाखा में डाक लेने का काम करता था, वर्ष 2014 में उसे कार्यालय में पता चला कि आरोपी के घर में एसीबी का छापा पडा है, आरोपी के घर छापा पड्ने के 15-20 दिन बाद आरोपी ने उसे सात पत्र दिये थे, जिसे ले जाकर उसने आवक-जावक शाखा में श्रीराम को दिया था, जिसने उसे उक्त लेटर दिये जाने की पावती दो लेटर में दी गयी थी, लेटर अंग्रेजी भाषा में लिखा हुआ था, जिसमें क्या लिखा था, उसे जानकारी नही है, 3३1नैरामा06 द्वारा दी गयी पावती पत्र को उसने आरोपी को ले जाकर दिया था, आरोपी द्वारा सभी पत्रो की एक-एक प्रति ही उसे दी गयी थी, श्रीराम ने पत्रों में पावती लगाकर उसे वापस किया। 
144. श्रीराम ने प्रतिपरीक्षण में यह याद नहीं होना बताया है कि कितने पत्र थे, उनमें कौन सी तारीख डली थी और उसने कौन सी तारीख को पावती दी थी तथा स्वीकार किया है कि उसे आरोपी ने कभी फोन नहीं किया न ही हस्ताक्षर करने कहा न ही उस पर दबाव डाला न ही उसके पास छब्लू ठाकुर को भेजकर हस्ताक्षर कर पावती देने कहा, छब्लू से फोन या मोबाइल से बात भी नहीं करवाया था, इस साक्षी ने प्रश्न उत्तर में बताया है कि वे पत्र अग्रेजी में थे वह अंग्रेजी नहीं पढ सकता इसलिए नहीं बता सकता कि वह पत्र किसने किसको लिखा था, छबलू ने कहा था कि स्टाफ का पत्र है, छबलू ठाकुर ने अपने प्रतिपरीक्षण में बताया है कि उसने जो पत्र श्रीराम को दिया था उसे गिना नहीं था, परंतु श्रीराम ने दो पावती दिया था, जिसे आरोपी को दिया था तथा इस कथन से इंकार किया है कि पत्र बंद लिफाफे में थे, इस संबंध में उसने श्रीराम से चर्चा नहीं की तथा स्वीकार किया है कि आरोपी द्वारा श्रीराम को देने जो पत्र दिया गया था वह छापा पडने के पहले का था, छापा पडने के पहले का नहीं था, उक्त साक्षी के कथन उनके प्रतिपरीक्षण में अखंडित रहे हैं। 
145. इस तरह उक्त साक्षी श्रीराम एवं छबलू के कथन से यह प्रमाणित पाया जाता है कि छबलू ठाकुर आरोपी का छ0ग0गृह निर्माण मंडल में भृत्य था और आरोपी के निर्देश पर काम करता था, आरोपी के घर छापा पडने के बाद आरोपी द्वारा छबलू को अंग्रेजी में लिखा हुआ छापे के पूर्व दिनांक 20.10.2009, 30.06.2010, 18.04.2011, 02.03.2012, 15.062012, 03.01.2013 एवं 10.01.2014 का एक प्रति में पत्र छबलू ठाकुर को श्रीराम चौहान से पावती लाने के लिए दिया था जिसे छबलू ठाकुर ने श्रीराम चौहान को दिया और श्रीराम चौहान ने उसमें पावती लिखकर वापस छबलू को दे दिया था, जिसे छबलू ठाकुर ने आरोपी को दिया था। 
146. डी0एस0 नेगी का यह भी कथन है कि साक्षी श्रीराम चौहान एवं छबलू सिंह के बयान के आधार पर तथा आरोपी द्वारा फार्म नंबर 1, 2, 3 में दी गयी जानकारी के दस्तावेजों को उसने छ0ग0गृह निर्माण मण्डल, मुख्यालय शंकर नगर रायपुर को दिनांक 22.05.2015 को भेजकर जानकारी मांगी थी कि आरोपी द्वारा अपने चल एवं अचल संपत्ति की जानकारी विभाग को दी गयी है अथवा नही, जिसके संबंध में उनके द्वारा दिनांक 22.05.2015 को पत्र भेजकर जानकारी दी गई थी कि आरोपी द्वारा अपनी संपूर्ण संपत्ति की जानकारी विभाग को नही दिया था, जिस चल एवं अचल संपत्ति की जानकारी दी गयी थी, उसे सूची अनुसार पत्र के साथ भेजा गया था, जिसके आधार पर उसने न्यायालयीन आदेशानुसार आरोपी के विरूद्ध धारा 467, 468 एवं 471 भा0दं0वि0 का अपराध पंजीबद्ध किया था । 


147. प्रशासकीय अधिकारी छ0ग0गृह निर्माण मण्डल मुख्यालय रायपुर जी0एम0 अंसारी अ0सा०37 का कथन है कि एन्टी करप्शन ब्यूरो कार्यालय, रायपुर द्वारा दिनांक 20.05.2015 को पत्र एवं उसके साथ संलग्न आवेदन पत्र दिनांक 20.10.2009, 30.06.2010, 10.04.2011, 02.03.2012, 15. 06.2012, 03.01.2013 एवं एक पत्र जिसमें दिनांक अंकित नहीं है, भेजा गया था और उसके संबंध में जानकारी मांगी गयी थी, जिस पर उसने पत्र कमांक 4244 दिनांक 22.05.2015 प्र0पी0-182 भेजकर उक्त जानकारी दी थी। 
148. जी0एम0अंसारी ने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि वह बिना अभिलेख देखे नहीं बता सकता कि वे पत्र कौन सी तारीख के थे, उसने उक्त पत्रों के संबंध में चौहान को नोटिस नहीं दिया, उसने आवक रजिस्टर देखा था जिसमें उक्त छह पत्रों का कोई इंद्राज नहीं था, एसीबी वाले छह पत्र उसके कार्यालय लेकर आये थे उनमें उसके कार्यालय की सील लगी थी, उनके कार्यालय में भृत्य श्रीराम को सील लगाकर उनके विभाग की पावती देने का अधिकार था, इस कथन से इंकार किया है कि कंप्यूटर आपरेटर ने पत्र प्र०पी0182 अपने मन से टाइप कर लिया तथा बताया है कि प्र०पी0182 दिनांक 22.05.15 के बाद गवाही के समय देख रहा है। 
 149. इस तरह उक्त साक्षी र्का 0क9९श्रन से भी यह प्रमाणित पाया जाता है कि एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दिनांक 20.05.2015 को पत्र के माध्यम से छह आवेदन पत्र दिनांक 20.10.2009, 30.06.2010, 10.04.2011, 02.03.2012, 15.06.2012, 03.01.2013 एवं एक पत्र जिसमें दिनांक अंकित नही है, को जी0एम0अंसारी के पास भेजा था, उक्त पत्र के संबंध में छ0ग0राज्य गृह निर्माण मंडल के आवक रजिस्टर आर्टिकल ए--1 से ए-10 में कोई इंद्राज नहीं है, जो भी इस बात की पुष्टि करता है कि छब्लू ठाकुर उक्त पत्रों की एक प्रति लेकर श्रीराम के पास आया था, जिस पर पावती लिखकर श्रीराम ने छबलू ठाकुर को दिया और छबलू ने आरोपी को दिया था, जहां तक एसपी नेगी द्वारा अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किये गये यह तथ्य कि आरोपी के संबंध में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला था जिससे उसका कृत्य धारा 467, 468, 471 भादवि की श्रेणी में आता है तथा इस कथन से इंकार किया है कि आरोपी को जमानत न मिले इसलिए 60 दिन के बाद उक्त धारा जोड दी गयी, परंतु आरोपी के द्वारा धारा 467, 468, 471 भादवि का अपराध किया गया है या नहीं, इसका निष्कर्ष साक्ष्य से ही निकलेगा, एएसपी नेगी के कहने से नहीं होगा, इसलिए उक्त प्रतिपरीक्षण का कोई लाभ आरोपी को प्राप्त नहीं होता ।
150. आरोपी से एसीबी द्वारा स्टेंटमेंट-1, 2, ३ के संबंध में जानकारी मांगी थी जिस पर आरोपी ने स्टेंटमेंट क01 एसीबी को दिया था, उक्त स्टेंटमेंट में आरोपी ने अपनी संपत्ति का विवरण दिया था, उक्त 110 स्टेंटमेंट के साथ आरोपी ने दिनांक 20.10.09, 30.06.2010, 10.04.2011, 02.03.2012, 15.06.2012, 03.01.2013 (पत्र में दिनांक नहीं है), 10.01. 2014 (पत्र में दिनांक नहीं है), को आवक लिपिक छ0ग0रा0गृह निर्माण मंडल मुख्यालय रायपुर में श्रीराम की पावती का पत्र पेश किया था जिसे सुविधा की दृष्टि से प्र0०ऱ0271क, प्र०ऱ0271ख, प्र०र0271ग, प्र०र0271घ, प्र०रऱ0271च, प्र०र0271छ, प्र०ऱ0271ज से अंकित किया गया, उक्त पत्रों में आरोपी द्वारा उक्त दिनांकों प्र०र0271क में कृषिभूमि कय करने, प्र०र0271ख में नोमलता द्वारा नेनो कार खरीदने, प्र०र0271ग में नोमलता द्वारा देवयानी के नाम से कृषिभूमि कय करने, प्र०ऱ0271घ में मीरा दीवान द्वारा आरोपी को 25 लाख रूपये नकद उपहार देने, प्र०र0271च में नोमलता द्वारा फ्लेट कय करने, प्र०र0271छ में दिसंबर 2012 वर्ष के लिए आरोपी द्वारा अचल संपत्ति का विवरण आयुक्त छ0ग0गृह नि0मंडल को दिये जाने, प्र०ऱ0271ज में दिसंबर 2013 वर्ष के लिए आरोपी द्वारा अचल संपत्ति का विवरण आयुक्त छ0ग0गृह नि0मंडल को दिये जाने का उल्लेख है। 
151. जबकि अंसारी की ओर से एसीबी को दिये गये पत्र दिनांक 29.11.14 को प्र०पी0190 को छ0ग0गृह निर्माण मंडल के आयुक्त द्वारा आरोपी को वर्ष 2012, 2013 का अचल संपत्ति विवरण प्रस्तुत नहीं करने और उसका ऐसा कृत्य कदाचार की श्रेणी में आने का लिखा था, जिसका जवाब आरोपी द्वारा पत्र दिनांक 07.02.2015 प्र०पी0191 प्रस्तुत करते हुए वर्ष 2012 का अचल संपत्ति का विवरण दिनांक 03.01.13 को एवं दिनांक 2013 का अचल संपत्ति का विवरण 10.01.14 को प्रस्तुत किया जाना एवं उसकी पावती प्रस्तुत किया गया था।
152. जबकि श्रीराम, छबलू ठाकुर एवं अंसारी के कथनों से यह प्रमाणित हुआ है कि पत्र प्र०र0272क से प्र०ऱ0272ज आरोपी के यहां छापा पडने के बाद उसने एक पत्र देकर उसकी पावती ली, इसलिए आरोपी द्वारा अपने स्टेंटमेंट के साथ प्रस्तुत प्र०र0271क से प्र०र0271ज के दस्तावेज प्र०पी0191 को बाद में आवक-जावक लिपिक श्रीराम को अपने प्रभाव में लेकर अपने विभाग को सम्यक सूचना दिये बिना दस्तावेज की कूटरचना की, ऐसी कूटरचना छल के प्रयोजन से की और पत्र का असली न होते हुए उसका असली के रूप में प्रयोग किया तथा छल कर पत्रों की पावती प्राप्त की तथा उन्हें मिथ्या होना जानते हुए उसका असली के रूप में प्रयोग किया।


153. उक्त कारणवश अभियोजन यह प्रमाणित करने में सफल रहा है कि आरोपी दिलीप कुमार दीवान शासकीय नियोजन मेंछ0ग0 गृह निर्माण मंडल मुख्यालय शंकर नगर रायपुर में बतौर लोकसेवक उपायुक्त के पद पर पदस्थ रहते हुए आलोच्य अवधि 1 अप्रेल 2004 से 15.11.2014 के दौरान स्वयं एवं अपने परिवार की आय के ज्ञात स्रोतों से उपार्जित आय से अधिक रूपये 5,14,08,095 /- मूल्य की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की तथा उक्त संपत्ति अपने आधिपत्य में रखकर पद का दुरूपयोग कर आपराधिक क्याचांणकिया,अल्सीपीद्वारास्का',अक्सीपत्सीतथानग्वालिकपुत्र-पुत्री के नाम पर कृषि भूमि एवं मकान आदि संपत्तियां कय की परंतु सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत इसकी सम्यक सूचना अपने विभाग को नहीं दी तथा बाद में उक्त चूक का आभास होने पर अपने कार्यालय के आवक-जावक लिपिक श्रीराम चौहान को अपने प्रभाव में लेकर कयशुदा संपत्तियों की सूचना अपने विभाग को कय अवधि में दिये जाने संबंधी दस्तावेज तैयार कर कूटरचना की और यह जानते हुए कि उक्त दस्तावेजों का उपयोग असल के रूप में किया जायेगा कूटरचित दस्तावेज तैयार किया एवं उनका उपयोग असल दस्तावेज के रूप में किया, कयशुदा अवधि के कूटरचित दस्तावेज लिपिक श्रीराम चौहान को देकर उनकी पावती प्राप्त कर छल किया तथा मिथ्या दस्तावेज विभाग में प्रस्तुत कर साक्ष्य का विलोपन किया, इसलिए आरोपी दिलीप दीवान को धारा 13(1)(ई) सहपठित 1302) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 तथा धारा 467, 468, 467 /471 420, 200/201 भारतीय दण्ड विधान के अपराध में दोषी पाकर दोषसिद्ध ठहराया जाता है। 
154. प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुए आरोपी को परिवीक्षा का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता, दंड के प्रश्न पर सुनने के लिए निर्णय थोडे समय के लिए स्थगित किया गया । (जितेन्द्र कुमार जैन) विशेष न्यायाधीश(भ्रष्टा0निवा0अधि0) एवं प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर, छ0ग0
पुनश्च :- 
155. दंड के प्रश्न पर विशेष लोक अभियोजक, आरोपी एवं उसके अधिवक्ता के तर्क सुने गये, विशेष लोक अभियोजन ने निवेदन किया कि आरोपी को कठोर से कठोर दंड से दंडित किया जावे, आरोपी एवं उसके अधिवक्त ने निवेदन किया कि आरोपी लंबे समय से अभिरक्षा में है, उस पर उसका परिवार आश्रित है, इसलिए उसे कम से कम दंड से दंडित किया जाये । 
156. दंड के प्रश्न पर विचार किया गया, आरोपी द्वारा अभिरक्षा में रही गयी अवधि एवं उस पर उसका परिवार आश्रित होने के काधार पर कम से कम दंड दिये जाने की प्रार्थना की गयी है, प्रकरण की परिस्थितियों के अनुसार आरोपी द्वारा वरिष्ठ शासकीय अधिकारी होते हुए करोडों रूपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किया है, इसलिए आरोपी के लिये नरमी बरता जाना उचित नहीं है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं छ0ग0 उच्च न्यायालय ने अपने अनेकों न्याय-सिद्धांतों में आरोपी द्वारा किये गये अपराध के आधार पर उसका दंड निर्धारित किये जाने की व्यवस्था दी है, धारा-16 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी यह प्रावधान किया गया है कि न्यायालय द्वारा अर्थदण्ड की राशि निर्धारित करते समय अनुपातहीन संपत्ति की राशि का ध्यान रखेगा, प्रकरण की उक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी दिलीप कुमार दीवान को निम्नलिखित दंडादेश दिया जाता है :- 114 कमांक आरोपी का नाम धारा कठोर कारावास अर्थदण्ड की | अर्थदण्ड के के सजा की राशि रूपयों में |व्यतिकम पर अवधि सजा की अवधि 1 दिलीप कुमार दीवान धारा 07 वर्ष दो करोड साढे तीन वर्ष 13(1)(ई) सपठित 130) भ्र.नि.अधि. 2. दिलीप कुमार दीवान 47 10 वर्ष पचास लाख 03 साल भा0द0वि0 3. दिलीप कुमार दीवान 468 05 वर्ष पचास लाख 03 साल भा0द0वि0 4. दिलीप कुमार दीवान 467/471 07 वर्ष पांच लाख 03 साल भा0द0वि0 5. दिलीप कुमार दीवान 420 03 वर्ष पांच लाख 01 साल भा0द0वि0 6. दिलीप कुमार दीवान 200/20। 03 वर्ष पांच लाख 01 साल भा0द0वि0 हि रूपये 157. आरोपी वर्तमान प्रकरण में दिनांक 04.05.2015 से दिनांक 08. 08.2016 तक एवं दिनांक 24.08.2016 से आज दिनांक 22.11.2016 तक कुल 554 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहा है, उक्त अवधि धारा 428 द0प्र०सं0 के प्रावधान अनुसार दी गयी सजा में समयोजित की जावे । 
158. प्रकरण में आरोपी द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गयी राशि से विकता व्यासनारायण, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 511, 512, 516, 526, 533 प्र0पी0-139, विकेता परसराम यादव, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 521, 705, 706 प्र0पी0-140, विकेता नेहरूलाल, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 690, 691, 695, 711 प्र०पी0-141, विकेता रामनिहाल, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 534 प्र०पी0-142, विकेता सारधा यादव वगैरह, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 522, 536, 549 प्र०पी0-143, विकेता आशो बाई यादव, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 508/2 प्र0पी0-144, विकेता असवंतीन यादव वगैरह, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 508/1 प्र0०पी0-145, विकेता सुकदेव सिंग, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 516 प्र०पी0-146, विकेता सुरेश ठाकुर, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 568 प्र०पी0-147, विकेता असवंतिन वगैरह, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 507 प्र०पी0-148, विकेता राजाराम वगैरह, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 5665, 566/6 प्र0पी0-149, विकेता हीरालाल यादव, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 596 प्र०पी0-150, विकेता गीताबाई, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 573 प्र०पी0-151, विकेता दुलौरिन वगैरह, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 669 प्र0पी0-152, विकेता भूपेन्द्र वगैरह, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 675 प्र०पी0-153, विकेता भोजबाई, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 671/1 प्र०पी0-154, विकेता देवलाल वगैरह, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 587 प्र०पी0-155, विकेता रामबाई वगैरह, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 724 प्र०पी0-156, विकेता लालाराम, केता कु0देवयानी दीवान खसरा नंबर 718 प्र०पी0-157, विकेता कलीराम यादव, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 6764, 6881 प्र०पी0-158, विकेता दयालू यादव, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 593 /1 प्र0पी0-159, विकेता हीरालाल यादव, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 6731 प्र०पी0-160, विकेता दसरू, केता कु०देवयानी दीवान खसरा नंबर 600, 670 प्र०पी0-161, विकेता अनिरूद्ध चन्द्राकर, केता करण दीवान खसरा नंबर 4901, 496, 498, 499, 500, 501, 504, 567, 570, 694 प्र0पी0-162, विकेता जीवनलाल, केता दिलीप कुमार दीवान खसरा नंबर 571 प्र०पी0-162-क भूमि कय की है, इसलिए उक्त समस्त भूमियां अपील न होने की दशा में अपील अवधि पश्चात राजसात किया जाता है, अपील न होने की दशा में माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेश का पालन किया जावे । 
159. आरोपी द्वारा हाउसिंग बोर्ड रायपुरसे एम आर कुरूवंशी के नाम कय की गयी दुकान कमांक 3 एवं 4 प्लाट एलआई जी 159 अवंति विहार, प्लाट एचआईजी 22 कंचना रायपुर, प्लाट सेडर-आई /123 बोरियाकला रायपुर स्थित मकान को अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे । आरोपी द्वारा हाउसिंग बोर्ड रायपुर से रूपेश दाउ के नाम से एलआईजी 159,/10 अवंति विहार रायपुर में कय की गयी संपत्ति को अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे । आरोपी द्वारा हाउसिंग बोर्ड रायपुर से उर्मिला पैकरा एवं बीएस दीवान के नाम से फ्लेट नंबर 152 एलआईजी अवंति विहार रायपुर में कय की गयी संपत्ति को अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे ।


160. प्रकरण में जब्तशुदा नकद रूपये 18,14,150,/-एवं विदेशी करेंसी राजसात किये जाते हैं, प्रकरण में जब्तशुदा सोने एवं चांदी के जेवरात कीमती रूपये 19,95,2121 /-एवं आरोपी एवं उसके परिवार के नाम से निर्णय की कंडिका कमांक-94 में उल्लेखित भारतीय स्टेट बैंक, देना बैंक, केनरा बैंक, बैंक आफ बडोदा, साउथ इंडियन बैंक के एफडी अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे। आरोपी के भारतीय स्टेट बैंक के बचत खाता कमांक 10470136757, 32242560050, देनां बैंक रायपुर के बचत खाता कमांक 107910008677, केनरा बैंक भिलाई के बचत खाता कमांक 2548101000489 बैंक आफ बडोदा रायपुर का बचत खाता कमांक 17380100014039, एक्सिस बैंक रायपुर का बचत खाता कमांक 913010029259690 की राशि अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे। अन्य ऐसी संपत्ति जो आरोपी द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गयी है, उसे अपील न होने की दशा में अपील अवधि बाद राजसात किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे । 
161. प्रकरण में जब्तशुदा दस रजिस्टर हाउसिंग बोर्ड से संबंधित हैं जो अपील न होने की दशा अपील अवधि बाद आवश्यक दस्तावेज लेकर उन्हें वापस किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे। प्रकरण में करूणा सिंह का विकय पत्र एवं बीमा पालिसी से संबंधित आवश्यक दस्तावेज लेकर अपील न होने की दशा में अपील अपील अवधि बाद उसे वापस किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे। प्रकरण में ढारत सिंह दीवान से छह ऋण पुस्तिका जब्त की गयी है, जो उससे संबंधित आवश्यक दस्तावेज लेकर अपील न होने की दशा में अपील अपील अवधि बाद उसे वापस किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश पालन किया जावे ।
162. प्रकरण में ग्राम लहरौद जिला महासमुंद से छापे के दौरान जब्ती पत्र तैयार किया गया था, जिससे संबंधित संपत्ति आरोपी के आय-व्यय में नहीं लिया गया है, अत: वह जब्त संपत्ति के संबंधित स्वामी के पक्ष में अपील न होने की दशा में अपील अपील अवधि बाद उसे वापस किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपील न्यायालय के आदेश का पालन किया जावे । निर्णय मेरे निर्देश में टंकित निर्णय खुले न्यायालय में किया गया। पारित किया गया।
सही 
(जितेन्द्र कुमार जैन
विशष न्यायाधीश (भ्र0नि0अधि0) एवं प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, रायपुर, (छ0ग0) 

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