Saturday, 23 June 2018

राजीव तिवारी विरुद्ध छ.ग. राज्य

 

न्यायालय-प्रफुल्ल सोनवानी, विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम)
बलौदाबाजार, जिला-बलौदाबाजार भाटापारा (छ.ग.)
सेंट्रल फाईलिंग नं.01/2016
विशेष दाण्डिक प्रकरण (भ्रष्टाचार
नि.अधिनियम) क्र.01/2016
संस्थित दिनांक 23.12.2016
छ.ग.राज्य, द्वारा - आरक्षी केन्द्र-एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर
रायपुर (छ.ग.)                                                                                  ..... अभियोजन
।। विरुद्ध ।।
राजीव तिवारी पिता ऋषि कुमार तिवारी, उम्र 37 साल,
पटवारी हल्का नंबर 12, ग्राम टिकुलिया, भाटापारा
जिला-बलौदाबाजार, छ.ग.
स्‍थायी पता मकान नं. 150, कर्मचारी आवास कॉलोनी
5 नं.06 सिमगा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा (छ.ग.)                          ...... अभियुक्त
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छ.ग. राज्य द्वारा श्री अमिय अग्रवाल अतिरिक्त लोक अभियोजक।
आरोपी द्वारा श्री देवा देवांगन अधिवक्ता
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                                                                         ।। निणर्य ।।
(आज दिनांक 30 /अक्टूबर/2017 को घोषित)
1. आरोपी राजीव तिवारी पर धारा 07, 13(1)(डी) व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अन्तर्गत आरोप है कि, उसने लोक सेवक के रूप में पटवारी हल्का नंबर 12 तहसील भाटापारा, जिला बलौदाबाजार (छ.ग.) में पटवारी के पद पर पदस्थ रहते हुए प्रार्थी गंगाप्रसाद वर्मा जो कि पिलेश्वर निषाद से एक खेत क्रय किया था का नामांतरण प्रमाणीकरण कराने के एवज में प्रार्थी से 15,000/-रूपये वैध पारिश्रमिक से भिन्न पारितोषण के रूप में मांग किया और दिनांक 01.06.2016 को 10,000/- रिश्वत प्राप्त कर आपराधिक अवचार कारित किया।
2. प्रकरण में स्वीकृत तथ्य कुछ भी नहीं है।
3. अभियोजन का प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि, प्रार्थी गंगाप्रसाद वर्मा (अ.सा.04) ने दिनांक 28.05.2016 को पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर के समक्ष उपस्थित होकर एक लिखित शिकायत पत्र प्र.पी. 19 प्रस्तुत कर निवेदन किया कि वह ग्राम दावनबोड थाना भाटापारा जिला बलौदाबाजार भाटापारा का रहने वाला है। उसने माह अप्रेल 2016 में ग्राम टिकुलिया थाना भाटापारा में पिलेश्वर निषाद के खेत 01 एकड 15 डिसमिल को 05,10,000/- (पाँच लाख दस हजार रूपये) में पावर ऑफ अटार्निं के आधार पर कमल किशोर साहू से पंजीयन ऑफिस में चेक के माध्यम से पूरा पैसा भुगतान कर रजिस्ट्री कराया था रजिस्ट्री होने के बाद स्टाम्प पेपर लाकर उसके नाम से ऋण पुस्तिका बनवाने एवं नामांतरण कराने के लिए ग्राम टिकुलिया के पटवारी राजीव तिवारी से स्टाम्प पेपर रजिस्ट्री पेपर के साथ सम्पर्क किया । पटवारी रजिस्ट्री पेपर देखकर कहा कि इस रजिस्ट्री में आपत्ति लगा है ऋण पुस्तिका बनवाने एवं नामांतरण के लिए 15000/- (पन्द्रह हजार रूपये) लगेगा तब वह कहा कि किसान आदमी हूँ, 15000/- (पन्द्रह हजार रूपये) कहां से दूंगा ? तब उसने तहसीलदार से चर्चा कर एक-दो दिन में बताउंगा कहा तब उसने पटवारी से फोन से सम्पर्क किया तो उसने 10,000/-(दस हजार रूपये) से कम में काम नहीं होगा कहा तथा यह भी कहा कि यदि आपत्ति नहीं लगता तो इस काम को तीन हजार रूपये में कर देते वह अपने स्तर पर किया किसी ने भी प्रमाणीकरण नामांतरण में आपत्ति नहीं किया है। पटवारी राजीव तिवारी ऋण पुस्तिका बनाने,प्रमाणीकरण नामांतरण के एवेज में उससे 10,000/-(दस हजार
रूपये) की मांग कर रहा है। वह उसे रिश्वत नहीं देना चाहत है बल्कि रिश्वत लेते पकड्वाना चाहता है।
4. प्रार्थी के उक्त लिखित शिकायत आवेदन के सत्यापन हेतु दिनांक 28.05.2016 को प्रार्थी गंगाप्रसाद को एक डिजीटल वाईस रिकार्डर देकर पुन: आरोपी के पास उसके द्वारा रिश्वत की मांग की जाने वाली वार्तालाप को रिकार्ड कर लाने बोला गया। तब प्रार्थी गंगाप्रसाद द्वारा दिनांक 31.05.2016 मोबाईल के माध्यम से निरीक्षक एस.के.सेन को जानकारी दिया कि, वह दिनांक 29.05.2016 को पटवारी कार्यालय जाकर उससे सम्पर्क कर रिश्वत की मांग की बातचीत को रिकार्ड कर लिया तथा रिकार्ड वार्तालाप में पटवारी राजीव तिवारी द्वारा दस हजार रूपये लेने को सहमत हो जाना बताया तब प्रार्थी गंगाप्रसाद वर्मा को डिजीटल वाईस रिकार्डर के साथ एवं आरोपी को रिश्वत में दिये जाने वाली रकम लेकर महेन्द्र टैक्टर शो रूम के सामने ग्राम तरेंगा लिमतरा भाटापारा रोड में दिनांक 01.06.2016 को उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया गया । प्रार्थी के उक्त सूचना की पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया गया एवं उसके निर्देशानुसार ट्रेप दल का गठन किया गया एवं ट्रेप कार्यवाही हेतु मौके पर उपस्थित रहने के लिए दो स्वतंत्र राजपत्रित अधिकारियों को ए.सी.बी.कार्यालय रायपुर भेजने हेतु कलेक्टर रायपुर को प्र.पी. 27 का ज्ञापन प्रेषित किया गया। जिस पर दो पंच साक्षी डॉक्टर ए.के.प्रसाद (अ०सा० 01) एवं शादाब मेमन(अ०सा०० 6) एंटी करप्शन ब्यूरो कार्यालय रायपुर में उपस्थित हुए जिन्हें ट्रेप दल में शामिल किया गया ट्रेप दल के सदस्य डी.एस.पी. श्री डी.एस.परिहार,निरीक्षक श्री एस.के.सैन,उपनिरीक्षक रविशंकर तिवारी,उप निरीक्षक श्री झनक लाल साहू, आरक्षक शिवप्रसाद साहू,सैनिक दशरथ धृतलहरे,एवं वाहन चालक चंद्रप्रकाश साहू ए.सी.बी.कार्यालय में दिनांक 01.06.2016 को प्रात: 09.30 बजे उपस्थित होने पर पूर्व निर्धारित स्थान महेन्द्र ट्रेक्टर शो रूम के सामने ग्राम तरेंगा लिमतरा भाटापारा रोड पहुंचे जहां प्रार्थी गंगाप्रसाद उपस्थित मिला जहां प्रार्थी का परिचय ट्रेप दल के सदस्यों से कराया गया । उसी समय प्रार्थी द्वारा द्वितीय शिकायत पत्र प्र.पी.02 दिया गया एवं रिकार्डेड डिजीटल वायस प्रस्तुत किया गया । प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत द्वितीय
शिकायत पत्र का अवलोकन करने एवं रिकार्डेड डिजीटल वांयस को सुनने के पश्चात द्वितीय आवेदन पत्र पर टीप अंकित करने के पश्चात आरोपी के विरूद्घ प्रथम दृष्टया अपराध धारा 7 पी.सी. एक्ट 1988 का पाये जाने से अपराध पंजीबद्ध किया गया। वायस रिकार्ड में रिकार्डेड वार्तालाप का प्रार्थी के सहयोग से आवाज सुनकर प्र.पी.03 का लिप्यांतरण तैयार किया गया पश्चात लेपटाप की मदद से रिकार्डेड वार्तालाप का सी.डी.तैयार किया जाकर मूल सी.डी. को लिफाफा में रखकर प्र.पी.04 के अनुसार जप्त किया गया ।
5. प्रार्थी द्वारा पटवारी को रिश्वत के रूप में दिये जाने वाले रिश्वती रकम 1000-1000/-रूपये के 10 नोट, कुल 10,000/-नोट दिये जाने पर पंचसाक्षी ए.के.प्रसाद द्वारा उक्त नोट को अपने हाथ में लेकर गिनती किया गया तथा नोटों के नंबरों को पढ एवं बोलकर निरीक्षक एस.के.से द्वारा तैयार किये गये प्रारंभिक पंचनामा में नोट कराया गया एवं उक्त नोटों पर फिनाफथलीन पावडर लगाने के लिए सैनिक दशरथ धृतलहरे (अ०सा० 07) को दिये जाने पर उसके द्वारा नोटों के दोनों तरफ फिनाफथलीन की हल्की परत लगा कर प्रार्थी के पहने हुए पेंट के पीछे जेब में सावधानी पूर्वक रखवाया गया एवं प्रार्थी को समझाया गया कि उक्त नोट आरोपी के मांगने पर ही
उसके हाथ में देवे तथा रिश्वत देने के पहले और बाद में हाथ न मिलाने को कहा गया एवं यह भी समझाया गया था कि सिर से गमछा उतार कर ट्रेप दल के सदस्यों को ईशारा करना तथा यह भी ध्यान रखना कि उक्त रकम लेने के पश्चात कहां रखता है उसके पश्चात उसके निर्देश पर आरक्षक शिवप्रसाद साहू (अ०सा० 09) के द्वारा एक साफ कांच के गिलास में साफ पानी लेकर सोडियम कार्बोनेट का जलीय घोल तैयार किया गया जो रंगहीन था उस घोल में फिनाफथलीन पावडर लगाने वाले आरक्षक दशरथ धृतलहरे को छोडकर ट्रेप दल के सभी सदस्यों के हाथों की उंगलियों को डुबाया गया तो घोल के रंग में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ उस घोल को सभी को दिखाकर उसकी आवश्यकता नहीं होने पर फेक दिया गया। आरक्षक शिव प्रसाद साहू द्वारा पुन: सोडियम कार्बोनेट का जलीय घोल तैयार करवाकर फिनाफथलीन पावडर लगाने वाले आरक्षक के हाथों की उंगलियों को धुलवाये जाने पर घोल का रंग परिवर्तित होकर गुलाबी हो गया। उक्त घोल को सभी को दिखाकर समझाया गया कि, यदि आरोपी फिनाफथलीन पावडर लगे नोटों को अपने हाथों में लेगा तो उसके हाथों की उंगलियों में से फिनाफथलीन पावडर चिपक जायेगा और सोडियम कार्बोनेट का जंलीय घोल उसके हाथ धुलाये जाने पर घोल का रंग गुलाबी हो जायेगा। उसके बाद आरक्षक दशरथ धृतलहरे से कोरे कागज पर फिनाफथलीन पावडर का नमूना पुडिया एवं साफ कागज पर उपयोग लागे गये पीतल सील नमूना तैयार कर पृथक-पृथक लिफाफो में सीलबंद कर प्र.पी.06 के अनुसार जप्त किया गया ।




6. पश्चात ट्रेप दल का गठन कर नोटों पर फिनाफथलीन पावडर लगाने वाले आरक्षक दशरथ धृतलहरे को ट्रेप दल में शामिल न कर उससे जप्त समान एवं फिनाफथलीन पावडर के डिब्बे के साथ ए.सी.बी.कार्यालय में रहने बोला गया तथा प्रार्थी को छाया साक्षी आरक्षक शिव प्रसाद साहू के साथ मोटर सायकल से आगे रवाना किया गया तथा ट्रेप दल के शेष सदस्यों एवं पंच साक्षी पीछे-पीछे शासकीय वाहन से पटवारी कार्यालय मोहता बिल्डिंग पहुंच कर प्रार्थी को आगे रवाना किया तथा ट्रेपदल के सभी सदस्य वाहन से उतर कर आपस में नजरी लगाव रखते हुए पटवारी कार्यालय के पास खडे हो गये तथा प्रार्थी एवं छाया साक्षी शिवप्रसाद साहू के साथ पटवारी के पास रिश्वत देने भेजा गया । प्रार्थी द्वारा आरोपी को रिश्वती रकम देकर पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ईशारा किया गया तत्पचात् प्रार्थी के ईशारा पाकर ट्रेप दल के सभी सदस्य आरोपी राजीव तिवारी के कार्यालय में प्रवेश किये और आरेपी पटवारी राजीव तिवारी के दाहिने हाथ को निरीक्षक सेन एवं बांया हाथ को आरक्षक शिवप्रसाद साहू ने पकड लिये निरीक्षक सेन ने आरोपी को अपना परिचय दिया तथा आरोपी का नाम पता पूछने पर अपना नाम राजीव तिवारी पटवारी हल्का नं. 12 होना बताया गया ट्रेप दल प्रभारी श्री डी.एस.परिहार उप पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपी पटवारी से प्रार्थी गंगा प्रसाद वर्मा से दस हजार रूपये रिश्वत लेने की बात पूछने पर उसने रिश्वत लेने से इंकार किया तथा प्रार्थी से कोई रूपये नहीं लेना बताया गया । उसके पश्चात निरीक्षक सेन के निर्देश पर शिवप्रसाद साहू द्वारा आरोपी के हाथ छोडकर साफ कांच के गिलास में पानी लेकर सोडियम कार्बोनेट का जलीय घोल तैयार कर आरोपी एवं प्रार्थी को छोडकर ट्रेप दल के सभी सदस्यों का हाथ धुलाये जाने पर घोल रंगहीन रहा जिसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ जिसे कांच की शीशी में सीलबंद कर रखा गया । उसके बाद पुन: सोडियम कार्बोनेट का जलीय घोल तैयार कर आरोपी राजीव तिवारी के दोनों हाथों की उंगलियों को डुबाये जाने पर घोल का रंग गुलाबी हो गया जिसे एक साफ कांच की शीशी में सीलबंद किया गया । उसके बाद ट्रेप प्रभारी डी.एस.परिहार द्वारा प्रार्थी से लिया गया रिश्वती रकम लिये जाने के संबंध में पटवारी से पूछने पर रिश्वत लेने से इंकार किया तब प्रार्थी को बुलाकर पूछा गया तो प्रार्थी द्वारा बताया गया कि, आरोपी उसे अपने कंप्यूटर कक्ष में ले जाकर अपने हाथ में हाथ में रूपये लेना और कम्प्युटर टेंबल में रखना बताया जहां रिश्वती रकम दिखाई दे रहा था उक्त रिश्वती रकम को पंच साक्षी ए.के.प्रसाद द्वारा बरामद किया गया । संपूर्ण कार्यवाही में प्राप्त घोलों का रासायनिक परीक्षण कराया गया। परीक्षण रिपोर्ट में धनात्मक पाया गया। प्रार्थी से संबंधित दस्तावेज की जप्ती किया गया। घटनास्थल का नजरी नक्शा पटवारी के द्वारा तैयार करवाया गया तथा रिश्वत लेन-देन के समय की बातचीत के संबंध में लिप्यांतरण पंचनामा तैयार किया गया और सी.डी.तैयार की गयी तथा आरोपी को गिरफ्तार किया गया और देहाती नालिसी को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण /एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर के अपराध क्रमांक 42/2016 में प्रथम सूचनापत्र दर्ज किया गया जो प्र.पी. 15 है । जप्तशुदा घोल एवं फिनाफथलीन पावडर को रासायनिक जांच के लिए राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला रायपुर प्र.पी.36 का प्रेषित किया गया । आरोपी की सेवा पुस्तिका हेतु तहसीलदार भाटापारा को प्र.पी. 42 का ज्ञापन भेजा गया उक्त ज्ञापन के परिपालन में तहसीलदार भाटापारा द्वारा प्र.पी. 22 के अनुसार ज्ञापन भेजा गया । तत्पश्चात गवाहों के कथन लेखबद्घ किया गया व राज्य शासन से आरोपी के संबंध में अभियोजन स्वीकृति हेतु विधि एवं विधायी कार्य विभाग न्यायिक रायपुर से प्राप्त किया गया जो प्र.पी. 26 है, तत्पश्चात विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के समक्ष अभियोग पत्र दिनांक 23.12.2016 को प्रस्तुत किया गया ।
7. मेरे पूर्वाधिकारी श्री बृजेन्द्र कुमार शास्त्री विशेष न्यायाधीश(भ्रष्टाचार नि.अधिनियम) द्वारा दिनांक 18.01.2017 को आरोपी के विरूद्घ धारा 07, 13(1) (डी) व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अन्तर्गत आरोप की विरचना की गयी। आरोपी का अभिवाकृ लिया गया जिस पर आरोपी ने अपना अपराध अस्वीकार किया और विचारण चाहा है । अभियोजन साक्ष्य के उपरांत धारा 313 द.प्र.सं. के अन्तर्गत अभियुक्त परीक्षण में आरोपी ने स्वयं को निर्दोष होना कहा और अपने कथन में कहा कि '' ए. सी.बी.वालों के सीखाने पर विद्वेषषश झूठ बोल रहे हैं, मैं निर्दोष हूँ , मुझे झूठा फंसाया गया हैं |'' तथा आरोपी ने अपने प्रतिरक्षा में साक्ष्य नहीं देना व्यक्त किया है।
8. अभियोजन ने अपने समर्थन में निम्न लिखित साक्षियों का साक्ष्य कराया गया है -
अभियोजन अभियोजन साक्षी का नाम साक्ष्य का प्रकार साक्षी क्र. अ.सा.01) श्री ए.के.प्रसाद पंचसाक्षी श्री अनिल बक्शी प्रथम सूचना पत्र लेख 02 (अ.सा.02) कर्ता। अ.सा.03) श्री खिलेश्वर प्रसाद पटवारी पटवारी नक्शा। अ.सा.04) श्री गंगाप्रसाद वर्मा प्रार्थी। 5 अ.सा.05) श्री महेश सिंह राजपूत आरोपी के पदस्थापना जानकारी अ.सा.06) श्री शादाब मेमन पंचसाक्षी | ((अ०सा० 10) श्री विश्वनाथ स्वर्णकार अभियोजन स्वीकृति 10 सहायक ग्रेड-3 9. आरोपी ने अपने समर्थन में किसी साक्षी का साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है।

प्रकरण के निराकरण हेतु निम्न विचारणीय प्रश्नों पर विचार करना आवश्यक है:-
1- क्या घटना दिनांक को आरोपी लोक सेवक के रूप में पटवारी हल्का नंबर 12 तहसील भाटापारा में पटवारी
के पद पर पदस्थ था ?
2- क्या घटना दिनांक को आरोपी के समक्ष प्रार्थी का नामांतरण एवं प्रमाणीकरण का कार्य लंबित था ?
3- क्या आरोपी, प्रार्थी का नामांतरण एवं प्रमाणी -करण संबंधी कार्य करने हेठु सक्षम प्राधिकारी था ?
4- क्या आरोपी द्वारा प्रार्थी के नाम पर नामांतरण एवं प्रमाणीकरण करने के बदले में वैध पारिश्रमिक से भिन्न राशि र 15, 000 रिश्वत के रूप में प्रार्थी से मांग की थी ?
5- क्या आरोपी द्वारा दिनांक 01.06.2016 को उपरोक्त कार्य के एवज में प्रार्थी से र 10,000 वैध पारिश्रमिक से भिन्न रिश्वत के रूप में प्राप्त किया था ?
6. क्या आरोपी द्वारा लोकसेवक के रूप में आपर्राधिक अवचार कारित किया गया हैं ?

विचारणीय प्रश्न क्रमांक 01 पर निष्कर्ष व निष्कर्ष के आधार:-
10. प्रकरण में आरोपी को पटवारी हल्का नंबर 12 तहसील भाटापारा, तहसील-भाटापारा पलारी, जिला बलौदाबाजार (छ.ग.) में पटवारी के पद पर पदस्थ रहना बताया गया है। इस संबंध में (अ.सा.11)एस.के.सेन ने बताया है कि, उसके द्वारा दिनांक 08.06.2016 को तहसीलदार भाटापारा आरोपी राजीव तिवारी की सेवा पुस्तिका की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रदान करने हेतु एक पत्र प्रेषित किया था उक्त पत्र प्रदर्श पी 42 है। उक्त पत्र के परिपालन में तहसीलदार भाटापारा के द्वारा पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर को संबोधित करते हुए एक ज्ञापन प्रेषित कर आरोपी राजीव तिवारी पटवारी की सेवा पुस्तिका, नियुक्ति संबंधी प्रविष्टि एवं पटवारी हल्का नंबर 12 ग्राम टिकुलिया में आरोपी के पदस्थापना संबंधी दस्तावेजों की सत्य प्रतिलिपि प्रेषित किया। उक्त ज्ञापन प्रदर्श पी 24 है।
11. उक्त ज्ञापन के संबंध में अभियोजन की ओर से तहसीलदार महेश सिंह राजपूत (अ.सा.05) ने अपने परीक्षण में बताया है कि, दिनांक 28.06.2016 को कार्यालय पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर से अपराध क्रं० 42/2016 धारा 7,13(1)0,13(2)पी.सी.एक्ट आरोपी राजीव तिवारी हल्का पटवारी क्रमांक 12 टिकुलिया के प्रकरण के संबंध में उनके कार्यालय से निम्न जानकारी चाही गयी थी उन जानकारियों को उसके कार्यालय द्वारा प्र.पी. 22 के अनुसार आवश्यक दस्तावेजा संलग्न कर प्रेषित किया गया है जिसके अ से अ भाग पर उसके हस्ताक्षर है । आरोपी की सेवापुस्तिका की प्रमाणित प्रतिलिपि प्र.पी.23,आरोपी के कतरव्यों एवं उत्तरदायित्वों की विभागीय प्रपत्रों की प्रमाणित प्रतिलिपि, गोपनीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है जो प्र.पी.24 है ।
12. प्रकरण में आरोपी के विरूद्घ दांडिक प्रकरण चलाने हेतु अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गयी है जो प्र.पी.26 है। जिसमें आरोपी को टिकुलिया का पटवारी होना लेख है। उपरोक्त दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि आरोपी पटवारी हल्का क्रमांक 12 ग्राम टिकुलिया तहसील भाटापारा जिला बलौदाबाजार में पटवारी के रूप में 
लोक सेवक के पद पर पदस्थ था। उपरोक्त आधारों पर यह स्पष्ट है कि, आरोपी पटवारी हल्का नंबर 12,ग्राम टिकुलिया, तहसील-भाटापारा, जिला बलौदाबाजार- भाटापारा (छ.ग.) में पटवारी के पद पर लोक सेवक के रूप में पदस्थ रहना प्रमाणित हो जाता है ।




विचारणीय प्रश्न क्रमांक 02 एवं 03 पर निष्कर्ष व निष्कर्ष के आधार -
13. प्रकरण में प्रार्थी अ०सा० 4 गंगा प्रसाद वर्मा का कहना है कि, उसने कमल किशोर के पावर ऑफ एटार्नि के माध्यम से तिजेश्वर निषाद की भूमि क्रय की थी जिसके नामांतरण हेतु वह तहसीलदार एवं पटवारी के पास चक्का लगाया करता था उसके पश्चात उसे एक दलाल के माध्यम से उसका काम करवाने के लिए पन्द्रह हजार
रूपये की मांग उक्त दलाल ने की थी उसे उक्त दलाल का नाम मालूम नहीं था जिस कारण वह ए.सी.बी.कार्यालय शिकायत करने के लिए गया था। जहां उसने बताया कि दलाल के द्वारा उसका नामांतरण करवाये जाने के लिए पन्द्रह हजार रूपये की मांग की जा रही है।
14. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया कि, उसने पिलेश्वर निषाद के स्वामित्व की भूमि खसरा नं. 677/1 रकबा 0.470 हे. को आम मुख्त्यार के आधार पर कमल किशोर से खरीदा था। साक्षी यह स्वीकार करता है कि उसने उक्त भूमि की संपूर्ण राशि चेक के माध्यम से कमल किशोर को दे दिया। साक्षी यह भी स्वीकार करता है कि रजिस्ट्री बैनामा मिलने के पश्चात वह तहसील कार्यालय भाटापारा गया था। साक्षी ने इस बात से इंकार किया कि भाटापारा तहसील आफिस में उसे पता चला कि पिलेश्वर निषाद ने उक्त भूमि के नामांतरण पर आपत्ति लगाया है। स्व्त: कहता है कि जब वह पटवारी कार्यालय गया था तब आरोपी ने उसे बताया था कि जिस जमीन को आप खरीदे है उस जमीन पर तहसीलदार के न्यायालय में नामांतरण व प्रमाणीकरण की कार्यवाही पर रोक लगाये जाने हेतु आपत्ति किया है। साक्षी ने यह स्वीकार किया कि उसके पश्चात वह तहसीलदार भाटापारा में गया था। जहां उसे पता चला कि पिलेश्वर ने नांमातरण व प्रमाणीकरण पर आपत्ति किया है जिसके संबंध में तहसीलदार भाटापारा ने उसे भी नोटिस दिया था। आरोपी अधिवक्ता के द्वारा दस्तावेज दिखाकर साक्षी से प्रतिपरीक्षण किया गया है जिसमें साक्षी ने आदेश पत्र दिनांक 10.05.20 16 प्र.डी.01 पिलेश्वर द्वारा तहसीलदार को दिया गया आवेदन प्र.डी.02 है। नोटिस प्र.डी.05 तथा कमल किशोर को दी गयी नोटिस प्र.डी.06 व पिलेश्वर को दी गयी नोटिस प्र.डी.07 है प्रार्थी को दी गयी नोटिस प्र.डी.08 है।
15. साक्षी ने स्वीकार किया है कि, नामांतरण और प्रमाणीकरण करने का अधिकार तहसीलदार का है और तहसीलदार के आदेश पर ही नामांतरण और प्रमाणीकरण को पटवारी पंजी में चढाता है । स्वत: कहता है कि, भूमि के नामांतरण हेतु सर्वप्रथम आवेदन पटवारी को देते है।
16. प्रकरण में प्रार्थी ने नामांतरण व प्रमाणीकरण का कार्य लंबित होना कहा है और अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार करता है कि, नामांतरण और प्रमाणीकरण का अधिकार तहसीलदार को है तथा आरोपी से सीधे बात न होना और दलाल के द्वारा उक्त काम करवाये जाने का कथन करना दर्शित होता है। प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेज प्र..डी.01 से लेकर प्र.डी. 11 तक के दस्तावेज में तहसीलदार के समक्ष उक्त आवेदन प्रस्तुत किया जाना दर्शित होता है वैसे भी नामांतरण का कार्य तहसीलदार का होता है और पटवारी का कार्य नहीं होता है यद्यपि पटवारी उक्त प्रतिवेदन तैयार करता है। परन्तु प्रार्थी ने आरोपी के द्वारा आरोपी के समक्ष अपने नामांतरण का कार्य लंबित नहीं रहना बताया है। तथा प्रार्थी ने अपनी भूमि के नामांतरण हेतु आरोपी के समक्ष कोई आवेदन लिखित में नहीं देना स्वीकार किया है। साथ ही भू राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार नामांतरण का अधिकार तहसीदार को होता है।
17. चूंकि नामांतरण का अधिकार तहसीलदार को होता है और प्रार्थी ने आरोपी को कोई भी आवेदन नहीं देना बताया है। जिससे आरोपी के समक्ष प्रार्थी का कोई कार्य लंबित रहने की स्थिति दर्शित नहीं होती है। साथ ही दलाल के माध्यम से नामांतरण के संबंध में जानकारी होना बताया है । ऐसी स्थिति में आरोपी के समक्ष प्रार्थी
का कोई कार्य लंबित रहना प्रमाणित नही हो पाता है। प्रकरण में छ.ग.भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार नामांतरण करने का अधिकार तहसीलदार का होता है जिससे आरोपी प्रार्थी का कार्य करने हेतु सक्षम प्राधिकारी होना प्रमाणित नहीं हो पाता है और आरेपी के समक्ष प्रार्थी का कोई कार्य लंबित रहना भी प्रमाणित नहीं हो पाता है।




विचाणीय प्रश्न क्रमांक 04 ,05 व 06 पर निष्कर्ष एवं निष्कर्ष के आधार-
18. प्रार्थी गंगा प्रसाद वर्मा अ०सा० 04 का कहना है कि, एक दलाल के माध्यम से उसका काम करवाने के लिए पन्द्रह हजार रूपये की मांग उक्त दलाल ने किया था जिसका नाम उसे नहीं मालूम है तब वह शिकायत करने ए.सी.बी.कार्यालय चला गया । जहां उसने बताया कि, एक दलाल के द्वारा नामांतरण करवाये जाने के लिए पन्द्रह हजार रूपये की मांग की जा रही है तब ए.सी.बी.कार्यालय में उससे पूछा गया कि, किसके विरूद्घ शिकायत करना चाहते हो तब उसने बताया कि, हो सकता है पटवारी ही मांग रहा हो जिस कारण उसने पटवारी के विरूद्घ शिकायत की थी।
19. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि, वह जमीन के नामांतरण हेतु पटवारी के पास गया था । तब आरोपी ने उससे कहा था कि जमीन के नामांतरण के संबंध में पिलेश्वर ने आपत्ति लगाया है । साक्षी ने इस बात से इंकार किया कि पटवारी ने उससे नामातरण के संबंध में पैसे की मांग की थी। स्वत: कहा कि तहसीलदार से करवा लो कहा था। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया है कि, दिनांक 01.06.2016 को आरोपी ने अपने कार्यालय में उससे प्रत्यक्ष रूप से रिश्वत की मांग नहीं की थी। स्वत: कहा कि, आरोपी से उसकी केवल मोबाईल पर बात हुई थी और आमने-सामने कोई बात नहीं हुई थी। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि, उसने मोबाईल में आरोपी को कहा था कि, तहसीलदार आपको कार्यालय में बुला रहे है इसके अलावा और कोई बात नहीं हुई थी।
 20. साक्षी से धारा 165 साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत प्रश्न पूछे गये हैं । जिसमें दलाल लोगों ने दस हजार रूपये स्वयं को देने के लिए कहा था बताया है और उसने सोचा कि पटवारी ने पैसे की मांग की है जिस कारण उसने पटवारी को ले जाकर दिया था। इस प्रकार स्वयं प्रार्थी ने आरोपी के द्वारा पैसे की मांग किये जाने की बात को समर्थन प्रदान नहीं किया है।
 21, अभियोजन के द्वारा आरोपी की मांग के संबंध में टेप रिकार्ड और लिप्यांतरण पंचनामा जिसमें रिश्वत पूर्व बातचीत प्र०पी० 03 है और उसकी सी.डी.लेपटाप के माध्यम से तैयार की गयी जिसका जप्तीपत्र प्र०पी0 04 है। इस संबंध में अ०सा० 11 एस.के.सेन ने बताया है कि प्रार्थी के द्वारा दिनांक 28.05.2016 को ए.सी.बी. में आवेदन प्रस्तुत किया था जो प्र.पी. 19 है उक्त लिखत आवेदन के सत्यापन के लिए उसने प्रार्थी को डिजीटल वायस रिकार्डर को चलाने की विधि समझा कर दिया था जिसका पंचनामा प्र.पी.20 है जिसके ब से ब भाग पर उसके हस्ताक्षर है। दिनांक 30.05.2016 को प्रार्थी ने उसे फोन करके बताया कि, उसने आरोपी के साथ दिनांक 29.05.2016 को कार्यालय में जाकर बातचीत कर रिश्वत मांग वार्ता को रिकार्ड किया है जिसमें आरोपी दस हजार रूपये लेने के लिए सहमत हो गया है। तब उसने प्रार्थी को दिनांक 01.06.2016 को उक्त रिकार्डेड वार्तालाप और द्वितीय शिकायत आवेदनपत्र के साथ लिमतरा भाटापारा रोड मेहन्द्रा ट्रेक्टर शो-रूम के सामने मिलने के लिए कहा था।
 22. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि उक्त डिजीटल वायस रिकार्डर में पहले से कोई आवाज मौजूद थी या नहीं अथवा खाली था अथवा नहीं इसकी उसने कोई जांच नहीं किया है। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि उसने दिनांक 28.05.2016 को डिजीटल वायंस रिकार्डर को प्रार्थी को दिया था जिसे प्रार्थी ने उसे दिनांक 01.06.2016 को वापस किया था। साक्षी ने स्वीकार किया कि उक्त अवधि में वाईस रिकार्डर प्रार्थी के पास था और यदि इस बीच प्रार्थी ने किसी और की बातचीत को पुन: रिकार्ड कर लिया हो तो वह नहीं जानता । साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि उक्त वाईस रिकार्डर में कितने लोगों की आवाज थी वह नहीं बता सकता है। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि वह घटना के पूर्व आरोपी के आवाज को नहीं पहचानता था। साक्षी यह भी स्वीकार करता है कि लिप्यांतरण पंचनामा में दस हजार रूपये दोगें तब प्रमाणीकरण नामांतरण और ऋणपुस्तिका बनाउंगा वाली बात नहीं है। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि, उक्त वाईस रिकार्डर में किसी अन्य व्यक्ति की भी आवाज थी।
 23, अ०सा० 04 गंगाप्रसाद वर्मा का कहना है कि इसे शिकायत प्रस्तुत करने के बाद एक माईक्रो वाईस रिकार्डर दिया गया था जिसके संबंध में पंचनामा प्र.पी.20 है वह उक्त टेप रिकार्ड को लेकर आरोपी के कार्यालय में गया था और वहां अत्यधिक भीड थी जिस कारण वह टेप रिकार्ड ठीक से चालू नहीं कर पाया था। प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने दिनांक 01.06.2016 को लिमतरा भाटापारा रोड में महिन्द्रा शो-रूम के सामने ए.सी.बी.वालों द्वारा उक्त वायस रिकार्डर की रिकार्डिंग को सुना जाना इंकार किया है और उसका लिप्तयांतरण पंचनामा बनाया जाना भी याद नहीं होना कहा है। साक्षी ने उक्त टेप रिकार्ड की सी.डी.बनाये जाने को भी इंकार किया है।
 24. अ०सा० 01ए.के.प्रसाद पंच साक्षी है जिसने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि, उसने डिजीटल वायस रिकार्डर को सुना था जिसमें स्पष्ट आवाज नहीं थी और कौन क्या बोल रहा है यह समझ नहीं आ रहा था। अ०सा० 06 शादब मेमन जो भी अन्य पंच साक्षी है उसने अतिरिक्त लोक अभियोजक के द्वारा सूचक प्रश्न पूछे जाने पर प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत टेप रिकार्ड की रिकार्डिंग को सुनना इंकार किया है। अ०सा० 07 दशरथ लाल धृतलहरे सैनिक ने अपने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया है कि जो सी.डी.जप्ती की गयी थी वह खाली थी। 25. प्रकरण में डिजीटल वॉयस रिकार्डर कैसेट के आधार पर रिकार्ड किया जाता है और ऐसे बातचीत को प्रमाणित करने के संबंध में उक्त टेप में जिन व्यक्तियों की आवाजें है उनका आवाज का नमुना लेकर परीक्षण किया जाता है परन्तु प्रकरण में ऐसी कोई जांच कराये जाने का उल्लेख नहीं है। ऐसी स्थिति में उक्त बातचीत आरोपी से ही की गयी है यह स्पष्ट नहीं हो पाता है साथ ही उक्त टेप की आवाजों का भी परीक्षण नहीं करवाया गया है तथा टेप रिकार्ड दो दिन विलंब से प्रार्थी द्वारा जमा किया गया है और उक्त टेप रिकार्ड सीलबंद भी नहीं किया गया था । तथा स्वयं प्रार्थी ने आरपी के पास जाने पर उक्त टेप रिकार्ड को चालू नहीं कर पाना बताया है। जिससे भी स्वयं प्रार्थी के साक्ष्य से उक्त वॉयस रिकार्डर की बातचीत और लिप्यांतरण पंचनामा की कार्यवाही को समर्थन प्राप्त नहीं हो पाता है।
 26. टेप रिकार्डर से टेप की गई वार्ता को साक्ष्य अधिनियम की धारा 3 के अंर्तगत दस्तावेज की श्रेणी में रखा गया है इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायदृष्टांत Ziyauddin Barhanuddin Bukhari Vs Brijmohan Ramdass Mehra and others में टेप रिकार्ड को साक्ष्य में ग्राहय होने की शर्ते बतायी गयी है-




it was held by this court that taperecords of speeches were "documents". as defined by Section 3 of the Evidecne Act, which stood on no different footing than photograplhs, and that they were admissible in evidence on staisfying the following conditions : " (a) The voice of the person alleged to be speaking must be duly identified by the maker of the record or by others who know it. (b) Accuracy of what was actually recorded had to be proved by the maker of the record and satisfactory evidence , direct or circumstantial, had to be there so as to rule out possibilities of tamering with the record. (c) The subjectmatter recorded had to be shown to be relevant according to rules of 1 (1976) 2 SCC 17 : 1975(supp) SCR 281 relevancy found in the Evidence Act." 
 27. इसी प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत R.M.Malkani v. State of Maharashtra में टेप अभिलिखित बातचीत के साक्ष्य में ग्राहय होने की शर्ते बतायी गयी है-
this Court has observed that tape recorded conversation is admissible provided first the conversation is rlevant to the matters in issue: secondly, there is identification of the voice; and, thirdly the accuracy of the tape recorded conversation is proved by eliminating the possiblility of erasing the tape record. 
28. इसके अतिरिक्त प्रकरण में रिश्वत मांगे जाने के संबंध में रिश्वत मांग वार्ता को प्रार्थी व आरोपी के मध्य हुए वार्तालाप को टेप रिकार्ड के माध्यम से टेप किया गया है जिसका लिप्यांतरण पंचनामा तैयार किया गया है। चूंकि लिप्यांतरण पंचनामा को इलेक्ट्रानिक माध्यम से तैयार किया गया है ऐसी स्थिति में वह इलेक्ट्रानिक साक्ष्य की श्रेणी में आता है और ऐसे इलेक्ट्रानिक साक्ष्य को साक्ष्य में ग्राह्य किये जाने हेतु धारा 65(8) साक्ष्य अधिनियम का प्रमाण पत्र होना आवश्यक है । इस संबंध में माननीय 2 (1973)19300471:1973 (2) 507 417 सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा प्रतिपादित न्याय दृष्टांत Anvar P.V. Vs P.K.Basheer & Others में इलेक्ट्रानिक एविडेंस की ग्राह्यता के संबंध में सिद्धांत प्रतिपादित किये गये हैं और प्रकरण में लिप्यांतरण पंचनामा के संबंध में धारा 65(B)साक्ष्य अधिनियम का कोई प्रमाण पत्र नहीं है ऐसी स्थिति में लिप्यांतरण पंचनामा एवं रिश्वत लेन-देन वार्ता से अभियोजन को कोई सहायता प्राप्त नहीं हो पाती है।
29. अ०सा० 04 गंगाप्रसाद वर्मा ने बताया है कि, घटना दिनांक को रिश्वती रकम को उसे फिनाफथलीन पावडर लगाकर दिया गया तथा उसके साथ ए.सी.बी.का एक अधिकारी रिश्वती रकम दिये जाते समय गया था उसे निर्देश दिया गया था कि, रिश्वती रकम देने के पश्चात वह सिर का गमछा खोलकर संकेत देगा। वह जब आरोपी के कार्यालय गया तब उस समय वह कार्यालय में नही था उसके पश्चात उसने आरोपी को फोन करके कहा कि, उसे तहसीलदार बुला रहे हैं तब आरोपी आया उस समय बहुत धूल उड रही थी इसलिए वह अपने आंख को पोछने के लिए सिर से गमछा उतार कर आंख पोछने लगा । जिसे ए.सी.बी.वाले ईशारा समझ कर आ गये तब उसने हडबडाहट में रिश्वती रकम को आरोपी के टेबल में रख दिया था। उस समय आरोपी वहां पर मौजूद नहीं था। इसके पश्चात ए.सी.बी.वाले कार्यालय में आकर उससे पूछे कि पटवारी कौन है तब उसने आरोपी की ओर ईशारा किया तब ए.सी.बी.वाले आरोपी को पकड लिए और उसके पश्चात ए.सी.बी.वालों ने उससे पूछा कि, रूपया कहां है तब उसने बताया कि, रूपया टेबल के उपर है।
30. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि, आरोपी से दस हजार रूपये रिश्वत लेने की बात पूछे जाने पर आरोपी ने इंकार किया था। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि,घटना दिनांक को उसने आरेपी को कोई रकम नहीं दिया था | इस साक्षी से धारा 165 साक्ष्य अधिनियम के अन्तर्गत प्रश्न पूछे गये हैं जिसमें पूछा गया है कि, जब साक्षी ने पटवारी को पैसा नहीं दिया है और टेबल पर रख दिया है उक्त बात को ए.सी.बी.को बताया था या नहीं जिस पर प्रार्थी ने बताया कि उसने उक्त बात ए.सी.बी.को नहीं बतायी उक्त बात नहीं बताने का कारण पूछे जाने पर साक्षी ने बताया कि, ए.सी.बी.वालों ने उससे पैसा कहां है पूछा था और पैसे देने के संबंध में पूछा था जिसे उसने टेबल पर रखना बताया था। इस संबंध में पुन: साक्षी से प्रश्न पूछा गया कि किसे पैसा देना बताये थे तब साक्षी ने पटवारी को दस हजार रूपये नामांतरण के लिए देना बताया था। तत्पश्चात साक्षी से पुन: पूछा गया कि, नामांतरण के लिए दस हजार रूपये देने की बात किसने बतायी थी जिस पर साक्षी ने बताया कि उसे दलाल लोगों ने बताया था और दलाल लोगों ने स्वयं को पैसा देने के लिए कहा था। साक्षी का कहना है कि उसने सोचा कि पटवारी ने पैसे की मांग की है जिस कारण पटवारी को लेकर दिया था।
 31. प्रकरण में प्रार्थी ने आरोपी को रिश्वती रकम नही देने की बात कही है और आरोपी के टेबल में रिश्वती रकम को रख देना बताया है और उस समय आरोपी को वहां पर मौजूद नहीं रहना बताया है। अ०सा० 1 ए.के. प्रसाद जो कि पंचसाक्षी है ने बताया है कि आरपी की तलाशी लेने पर कोई पैसा नहीं मिला तब प्रार्थी से पूछने पर प्रार्थी ने बताया कि पैसा उसने टेबल पर रखा है तब टेबल से पैसे को उठाकर नंबर का मिलान किया गया था । तथा साक्षी ने बताया है कि, ए.सी.बी.के कर्मचारी ने सादा पानी लेकर घाल बनाया था जिसमें आरोपी का हाथ धुलाये जाने पर घोल का रंग परिवर्तित नहीं हुआ था। प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने यह स्वीकार किया है कि पटवारी कार्यालय के पास तोड-फोड चल रही थी और धूल उड रही थी। साक्षी यह भी स्वीकार करता है कि जहां वह खडा था वहां से आरोपी का कमरा नहीं दिखाई देता है।




32. अ०सा० 06 शादाब मेमन पंच साक्षी ने बताया है कि, आरोपी जहां था वहां ए.सी.बी.वालें कुछ कार्यवाही कर रहे थे जिसे वह स्पष्ट रूप से नहीं देख पाया था।अतिरिक्त लोक अभियोजक के द्वारा सूचक प्रश्न पूछने पर साक्षी ने इस बात की जानकारी नहीं होना कहा है कि अरोपी से रिश्वत की बात पूछने पर आरोपी ने इंकार किया था और यह स्वीकार किया कि प्रार्थी को बुलाकर पूछने पर प्रार्थी ने बताया कि आरोपी ने कम्प्यूटर कक्ष में ले जाकर रूपये लेकर कम्प्यूटर टेबल में रखा है। साक्षी ने स्वीकार किया है कि पंच साक्षी ए.के. प्रसाद ने उक्त नोट को कम्प्यूटर टेबल से उठाया था । साक्षी ने इस बात की जानकारी नहीं होना कहा कि घोल में आरोपी का हाथ धुलाये जाने पर उसका रंग गुलाबी हो गया था।
33. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया है कि, पटवारी कार्यालय के आस- पास तोड-फोड की कार्यवाही चल रही थी और वहां बहुत भीड थी और धूल भी उड रहा था। साक्षी ने स्वीकार किया कि, पटवारी कार्यालय के अंदर थोडी देर रूक कर नास्ता करने बाहर चला गया था। साक्षी ने यह स्वीकार किया कि आरोपी के कार्यालय में कम्प्यूटर टेबल में नोट को किसने रखा है उसने नहीं देखा है और यह भी स्वीकार करता है कि ए.सी.बी.वालों ने प्रार्थी से पूछा था तब प्रार्थी ने बताया कि उसने कम्प्यूटर टेबल में नोट को रखा है। 34. अ०सा० 08 रविशंकर तिवारी निरीक्षक हमराह ने बताया है कि, प्रार्थी के द्वारा ईशारा करने के पश्चात तब वे लोग आरेपी के कार्यालय में गये और आरेपी से रिश्वती रकम लेने के संबंध में पूछने पर आरोपी ने इंकार किया और रिश्वती रकम कहां रखे हो यह पूछने पर आरेपी ने रिश्वत लेने से इंकार किया तब प्रार्थी को बुलाकर पूछा गया जिसमें प्रार्थी ने बताया कि उसे कम्प्यूटर रूम ले गये थे जिसमें कम्प्यूटर टेबल के उपर रिश्वती रकम को रखे थे। साक्षी का कहना है कि आरोपी का हाथ घोल में डुबाये जाने पर घोल का रंग हल्का परिवर्तित हुआ था जो गुलाबी नहीं हुआ था।
35. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने यह स्वीकार किया कि आरोपी के कार्यालय के आस-पास तोड-फोड की कार्यवाही चल रही थी जिस कारण बहुत भीड थी और बहुत धुल उड रहा था। साक्षी ने स्वीकार किया कि, पटवारी कार्यालय में चार रूम थे और जिस रूम में आरोपी को पकडे थे उस रूम में रिश्वती रकम नहीं थी और वहां से कम्प्यूटर टेबल नहीं दिख रहा था। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि, आरपी की तलाशी लेने पर उसकी जेब से कुछ नहीं निकला था। तब प्रार्थी को बुलाकर रिश्वती रकम के संबंध में पूछताछ करने पर प्रार्थी ने बताया था कि रिश्वती रकम कम्प्यूटर टेबल के पास रखा है।
36. अ०सा० 09 शिव प्रसाद साहू आरक्षक ने बताया है कि उसे छाया साक्षी के रूप में प्रार्थी के साथ भेजा गया था और जब प्रार्थी रिश्वत देने आरोपी के कार्यालय के अंदर गया था तब वह बाहर ही खडा था । उसके पश्चात प्रार्थी के ईशारा मिलने पर ए.सी.बी.वाले अंदर चले गये और आरोपी को पकड लिये थे। तब उसने घाल कार्यवाही की थी। आरेपी से रिश्वती रकम के संबंध में पूछने पर आरोपी ने रिश्वत लेने से इंकार किया था इसके पश्चात प्रार्थी को बुलाकर पूछने पर प्रार्थी ने रिश्वती रकम को कम्प्यूटर टेबल में रखना बताया था। उक्त कम्प्यूटर कक्ष में आरोपी को साथ ले जाकर प्रार्थी द्वारा बताये गये कम्प्यूटर टेबल से पंच साक्षियों द्वारा ढूढने पर नोट प्राप्त हुआ था। साक्षी ने बताया कि उसने आरोपी के उंगलियों को घोल में डुबाया था तब घोल का रंग हल्का गुलाबी हो गया था।
37. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने स्वीकार किया कि, जिस कमरे में आरोपी को पकडे थे उसके दूसरे कमरे में रिश्वती रकम बरामद हुआ था। साक्षी यह भी स्वीकार करता है कि जिस रूम में आरोपी को पकडा गया था वहां से रिश्वती रकम रखा हुआ कम्प्यूटर टेबल नहीं दिखायी देता। साक्षी यह स्वीकार करता है कि पटवारी कार्यालय के कम्प्यूटर टेबल पर किसने रिश्वती रकम को रखा था वह नहीं देख पाया था।
38. अ०सा० 11 एस.के.सेन विवेचना अधिकारी ने बताया है कि, प्रार्थी का ईशारा पाकर जब वे लोग आरोपी के कार्यालय के अंदर गये तब आरोपी से पूछने पर आरोपी ने रिश्वत लेने से इंकार किया तब प्रार्थी को बुलाकर पूछने पर प्रार्थी ने बताया कि आरोपी ने कम्प्यूटर कक्ष में ले जाकर रिश्वती रकम को अपने हाथ में लिया और कम्प्यूटर टेबल पर रखवा दिया था। आरोपी का हाथ घोल से धुलाये जाने पर घोल का रंग परिवर्तित होकर हल्का गुलाबी हो गया । साक्षी ने आरोपी के हाथ के घोल को प्र.पी.45 के रूप में पहचाना है। 39. प्रतिपरीक्षण में साक्षी ने इंकार किया कि प्र.पी.45 में गुलाबी घोल नहीं है। साक्षी ने आरेपी के कार्यालय के पास तोडफोड की कार्यवाही होने की जानकारी नहीं होना कहा। साक्षी ने स्वीकार किया कि आरेपी की तलाशी लेने पर आरिपी के पास से रिश्वती रकम की बरामदगी नहीं हुई थी। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि, आरोपी से रिश्वती रकम के संबंध में पूछने पर आरापी ने अनभिज्ञता जाहिर की थी और किसी से रिश्वती रकम नहीं लेना कहा था। साक्षी ने स्वीकार किया कि, तत्पश्चात प्रार्थी को बुलाकर पूछने पर प्रार्थी ने दूसरे कमरे में कम्प्यूटर टेबल के उपर रिश्वती रकम को रखा होना बताया था। साक्षी ने यह भी स्वीकार किया कि जिस कमरे में उन्होंने आरोपी को पकडा था उस कमरे से दूसरे कमरे में रखा हुआ कम्प्यूटर टेबल दिखाई नहीं देता था | साक्षी ने यह स्वीकार किया कि, रिश्वती रकम दूसरे कमरे के कम्प्यूटर टेबल में रखा हुआ था।
40. प्रकरण में स्वयं प्रार्थी ने आरापी को रिश्वती रकम देने से इंकार है और रिश्वती रकम को टेबल पर रख देना बताया है और प्रकरण में रिश्वती रकम आरोपी के शरीर से बरामद नहीं हुई है साथ ही जिस कक्ष में आरोपी था उस कक्ष से भी रिश्वती रकम बरामद नही हुई है और रिश्वती रकम दूसरे कमरे में रखे कम्प्यूटर टेबल से बरामद हुआ है। आरोपी का हाथ धुलाने पर घोल का रंग परिवर्तित नही होना पंच साक्षी ए.के. प्रसाद ने स्वीकार किया है। जिससे दर्शित होता है कि, आरोपी ने रिश्वती रकम को हाथ में नहीं लिया है इसके अतिरिक्त अन्य साक्षियों ने आरापी का हाथ धुलाये जाने पर हल्का गुलाबी होना बताया है जिससे इस बिन्दु पर विरोधाभाष की स्थिति दर्शित हो रही है। साथ ही आरोपी के द्वारा प्रार्थी से रिश्वती रकम की मांग किया जाना भी प्रमाणित नही हुआ है जो ऐसे अपराधों में आवश्यक शर्त है साथ ही आरोपी के समक्ष प्रार्थी का कार्य लंबित नही था और आरोपी प्रार्थी का कार्य करने हेतु सक्षम प्राधिकारी भी नहीं है जिससे उपरोक्त आधारों पर अभियोजन के प्रकरण पर सन्देह करने का आधार उत्पन्न हो जाता है।
41. प्रकरण में मात्र रिश्वती रकम की बरामदगी से आरोपी को दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। इस संबंध विभिन्न न्यायदृष्टांतों में सिद्धांत प्रतिपादित किये गये हैं जिनमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय Krishan Chander Vs. State of Delhi तथा C.M.Girish Babu v. CBI, Cochin तथा M.Narsinga Rao v. State of A.P. माननीय छ.ग. माननीय छ.ग.उच्च न्यायालय के न्यायदृष्टांत S.K.Nande v State of Madhya Pradesh में इसी प्रकार के सिद्धांत प्रतिपादित किये गये हैं।
42, उपरोक्त साक्ष्य की विवेचना के आधार पर आरोपी के समक्ष प्रार्थी का कोई कार्य लंबित रहना प्रमाणित नहीं हुआ है इससे आरोपी के द्वारा रिश्वत की मांग किया जाना और रिश्वत की रकम स्वेच्छापूर्वक प्राप्त किया जाना भी सन्देह से परे प्रमाणित नहीं हो पाता है तथा आरोपी के कब्जे से रिश्वती रकम की जप्ती भी नहीं हुई है । ऐसी स्थिति में आरोपी के द्वारा लोक सेवक के रूप में प्रार्थी से रिश्वत की राशि प्राप्त करना और लोक सेवक के रूप में अवचार कारित किया जाना सन्देह से परे प्रमाणित नहीं हो पाता है।
43. उपरोक्त सभी आधारों पर अभियोजन अपना प्रकरण आरोपी के विरूद्घ धारा (डी) व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अन्तर्गत सन्देह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है। अत: सन्देह का लाभ देकर आरोपी राजीव तिवारी को धारा 07,13(1)(डी) व 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के आरोप से दोष मुक्त किया जाता है। 
44. आरोपी दिनांक 01.06.2016 से 04.08.2016 तक कुल दो माह 05 दिन न्यायिक अभिरक्षा में निरूद्ध रहा है। 45. प्रकरण में जप्त संपत्ति 10,000/-(दस हजार रूपये) 1000/-, 1000/-(एक-एक हजार रूपये का दस नोट) की राशि अपील अवधि पश्चात् प्रार्थी को वापस किया जावे अन्यथा किसी दावेदार के उपस्थित न होने पर धारा 458 दं.प्र.सं. के अन्तर्गत कार्यवाही की जावे । प्रकरण में जप्तशुदा 7 नग सीलबंद घोल की शीशियां, दो नग सीलबंद लिफाफा, एक पैकेट में फुलपेंट एवं पर्स, दो नग सी.डी. अपील अवधि बाद नष्ट किया जावे। प्रकरण में जप्त ग्राम टिकुलिया पटवारी हल्का नं. 12 रा.नि.मं. भाटापारा का नामांतरण पंजी वापस किया जावे, अपील होने की दशा में माननीय अपीलीय न्यायालय के निर्देशानुसार निराकरण किया जावे।
निर्णय खुले न्यायालय में दिनांकित हस्ताक्षरित व मुद्रांकित कर घोषित।
मेरे निर्देश में टंकित।
सही /-

(प्रफुल्ल सोनवानी
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार अधि.) 
बलौदाबाजार (छ.ग.) 




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